UP: जनगणना ड्यूटी के बीच शिक्षकों की दोहरी परेशानी | MDM राशन संकट और ऑनलाइन कार्यों के दबाव पर BSA को सौंपे गए दो ज्ञापन

लखीमपुर-खीरी में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने BSA को दो ज्ञापन सौंपकर पीएम पोषण योजना में वास्तविक मांग के अनुसार राशन आवंटन और ग्रीष्मावकाश के दौरान ऑनलाइन कार्यों से शिक्षकों को राहत देने की मांग की है।

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लखीमपुर खीरी 

जनगणना कार्य में जुटे शिक्षकों की समस्याओं को लेकर राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने एक साथ दो अहम मुद्दे उठाते हुए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) को ज्ञापन सौंपे हैं। संगठन ने एक ओर पीएम पोषण (MDM) योजना के तहत खाद्यान्न आवंटन में आ रही व्यावहारिक दिक्कतों की ओर ध्यान दिलाया है, वहीं दूसरी ओर ग्रीष्मावकाश के दौरान शिक्षकों पर लगातार डाले जा रहे ऑनलाइन विभागीय कार्यों के दबाव से राहत की मांग की है।

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राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, जनपद इकाई लखीमपुर-खीरी के जिलाध्यक्ष संतोष मौर्य के नेतृत्व में दिए गए ज्ञापनों में कहा गया है कि पीएम पोषण योजना के अंतर्गत विद्यालयों को खाद्यान्न का आवंटन प्रायः TRG रिपोर्ट के आधार पर स्वतः निर्धारित किया जा रहा है। जबकि वास्तविक स्थिति में छात्र संख्या, दैनिक उपस्थिति और स्थानीय परिस्थितियों के कारण खाद्यान्न की आवश्यकता लगातार बदलती रहती है। इसके चलते कई विद्यालयों को जरूरत से कम या अधिक राशन मिल रहा है, जिससे योजना के संचालन में बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं।

संगठन ने मांग की है कि खाद्यान्न आवंटन केवल TRG रिपोर्ट के आधार पर न करके संबंधित विद्यालयों द्वारा भेजी गई वास्तविक मांग और आवश्यकता के अनुरूप किया जाए। महासंघ का कहना है कि कई विद्यालयों में राशन की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है, जिससे प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों को अनावश्यक प्रशासनिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

अपना हाथ जगन्नाथ …

इसी के साथ महासंघ ने दूसरे ज्ञापन में ग्रीष्मावकाश के दौरान शिक्षकों पर बढ़ते ऑनलाइन कार्यभार का मुद्दा भी उठाया है। ज्ञापन में कहा गया है कि वर्तमान में जनगणना जैसे राष्ट्रीय महत्व के कार्य में बड़ी संख्या में शिक्षक पूरी जिम्मेदारी के साथ लगे हुए हैं। इसके बावजूद अपार आईडी, उल्लास ऐप और अन्य ऑनलाइन विभागीय कार्यों को पूरा करने के लिए लगातार दबाव बनाया जा रहा है, जिससे शिक्षकों को मानसिक तनाव और व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

महासंघ ने तर्क दिया कि 22 जून 2026 तक जनगणना कार्य जारी रहने के कारण अधिकांश शिक्षक पहले से ही अतिरिक्त जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। वहीं ग्रीष्मावकाश के दौरान कई शिक्षक अपने गृह जनपद या अन्य स्थानों पर रह रहे हैं, जबकि विद्यार्थियों से संबंधित आवश्यक दस्तावेज विद्यालयों में उपलब्ध हैं। ऐसी स्थिति में ऑनलाइन कार्यों का समयबद्ध निस्तारण करना कठिन हो रहा है।

संगठन ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी से मांग की है कि ग्रीष्मावकाश अवधि में अपार आईडी, उल्लास ऐप और अन्य ऑनलाइन विभागीय कार्यों से शिक्षकों को अस्थायी राहत प्रदान की जाए तथा इन कार्यों को विद्यालय खुलने के बाद पूरा कराने के लिए आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं।

राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ का कहना है कि यदि इन दोनों मुद्दों पर व्यावहारिक समाधान निकाला जाता है तो न केवल विद्यालयों के संचालन में सुधार आएगा, बल्कि जनगणना जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य में लगे शिक्षकों को भी राहत मिल सकेगी।

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