भरतपुर में जिला व्यापार महासंघ (Bharatpur Zila Vyapar Mahasangh) की प्रस्तावित काले झंडों वाली विरोध रैली आखिरी समय पर सात दिन के लिए स्थगित कर दी गई। प्रशासन से वार्ता और तोड़फोड़ कार्रवाई रोकने की मांग पर व्यापारी डटे रहे।
भरतपुर
भरतपुर शहर में सोमवार को व्यापारियों का गुस्सा सड़कों पर उतरने ही वाला था। Bharatpur Zila Vyapar Mahasangh की ओर से निकाली जाने वाली विशाल विरोध रैली के लिए हजारों व्यापारी काले झंडों और तख्तियों के साथ तैयार बैठे थे। माहौल ऐसा था कि किसी भी क्षण रैली शुरू होकर प्रशासन के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन बन सकती थी।
सभागार के भीतर व्यापारी संगठनों के नेताओं के भाषणों से जोश लगातार बढ़ रहा था। महासंघ के जिलाध्यक्ष संजीव गुप्ता, जिला महामंत्री विपुल शर्मा, संघर्ष समिति संयोजक विष्णु जैन और पूर्व नेता प्रतिपक्ष इन्द्रजीत भारद्वाज ने मंच से व्यापारियों के मुद्दे उठाए और आंदोलन के लिए तैयार रहने का आह्वान किया। गुस्सा इतना था कि लोग काले झंडों के साथ रैली निकालने पर अड़े हुए थे और प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी कर रहे थे।
इसी बीच मौके पर Bharatiya Janata Party की जिला अध्यक्ष शिवानी दायमा, प्रदेश प्रवक्ता शैलेष कौशिक, जिला महामंत्री भगवानदास शर्मा, गोविंद चौधरी, जिला उपाध्यक्ष ब्रजेश अग्रवाल और जिला मंत्री नरेन्द्र सिंघल सहित कई पदाधिकारी पहुंच गए। उन्होंने व्यापारियों से बातचीत कर प्रशासन के साथ समाधान निकालने का भरोसा दिलाने की कोशिश की।
हालांकि शुरू में आक्रोशित व्यापारी नेताओं की बात मानने को तैयार नहीं थे। काले झंडों के साथ रैली निकालने की मांग पर लोग डटे रहे और लगातार नारे लगाते रहे। काफी मशक्कत के बाद व्यापारी नेताओं ने भीड़ को शांत किया। इस दौरान यह भी चर्चा रही कि उसी दिन बीजेपी का स्थापना दिवस होने के कारण पार्टी नेता रैली टालने की कोशिश कर रहे थे।
आखिरकार बातचीत के बाद बीजेपी पदाधिकारियों ने आश्वासन दिया कि सात दिन के भीतर प्रशासन और व्यापारियों के बीच बैठक कराकर सभी समस्याओं पर चर्चा कर समाधान का प्रयास किया जाएगा। व्यापारियों की यह मांग भी मानी गई कि जब तक बातचीत नहीं होती, तब तक जेसीबी से तोड़फोड़ की कार्रवाई रोकने का प्रयास किया जाएगा।
मौके पर Kanishk Kataria (बीडीए कमिश्नर) और एडीएम सिटी राहुल सैनी को भी बुलाया गया। अधिकारियों ने मौजूद हजारों लोगों को आश्वस्त किया कि सात दिनों के भीतर शहर के विकास और सड़क चौड़ीकरण से जुड़ा पूरा प्लान सार्वजनिक रूप से रखा जाएगा।
इसके बाद मंच से महासंघ के जिलाध्यक्ष संजीव गुप्ता ने मुख्यमंत्री के नाम तैयार ज्ञापन पढ़कर सुनाया और उसे प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपा। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि पहले भी बातचीत के लिए तीन दिन का समय मांगा गया था, लेकिन करीब बीस दिन बीतने के बाद भी कोई बैठक नहीं हुई। ऐसे में यह आखिरी मौका है।
जिला महामंत्री विपुल शर्मा ने कहा कि व्यापारी बार-बार धोखा नहीं खा सकते। यदि सात दिन में संतोषजनक समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगली बार काले कपड़ों और काले झंडों के साथ पहले से चार गुना बड़ी रैली निकाली जाएगी, फिर दुकानों पर काली पट्टी बांधकर काम किया जाएगा और जरूरत पड़ी तो अनिश्चितकालीन भरतपुर बंद तक का फैसला लिया जाएगा।
संघर्ष समिति संयोजक विष्णु जैन ने कहा कि व्यापारी विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास के नाम पर लोगों के घर-दुकान उजाड़े नहीं जा सकते। उन्होंने मांग रखी कि जिनकी संपत्ति प्रभावित हो रही है, उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए और नाले के निर्माण में वही एलाइनमेंट अपनाया जाए जो अदालत में प्रस्तुत नक्शे में दर्शाया गया है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि जरूरत पड़ी तो व्यापारी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाने को तैयार हैं।
इस आंदोलन को कई सामाजिक संगठनों के साथ-साथ Indian National Congress का भी समर्थन पत्र मिलने की बात कही गई। रैली में शहर के कई हिस्सों—मानसिंह सर्किल, अछनेरा रोड, हीरादास, सेवर, कुम्हेर गेट, रेडकास सर्किल, स्टेशन बजरिया, बीनारायण गेट और गोलबाग रोड सहित विभिन्न क्षेत्रों से व्यापारी और आमजन बड़ी संख्या में पहुंचे थे।
हालांकि फिलहाल आंदोलन को सात दिन के लिए स्थगित कर दिया गया है, लेकिन व्यापारी साफ कर चुके हैं कि यदि तय समय में समाधान नहीं हुआ तो भरतपुर में एक बड़ा आंदोलन देखने को मिल सकता है।
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