जयपुर में सड़क हादसे की कहानी ने चौंका दिया। पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि मां की नौकरी और संपत्ति के लालच में बेटी ने ही ताऊ और अन्य आरोपियों के साथ मिलकर 7 लाख की सुपारी देकर हत्या कराई। 7 आरोपी गिरफ्तार, एक फरार।
जयपुर। 4 जुलाई को जयपुर के प्रताप नगर में हुई एक महिला की मौत को हर कोई सड़क हादसा मान रहा था। परिवार ने भी इसे दुर्घटना बताया, लेकिन चार दिन बाद पुलिस जांच में ऐसा खुलासा हुआ जिसने पूरे मामले की तस्वीर बदल दी। जिस बेटी ने सबसे पहले मां की मौत की सूचना दी, उसी पर मां की हत्या की साजिश रचने का आरोप लगा है। पुलिस का दावा है कि सरकारी नौकरी और संपत्ति के लालच में बेटी ने अपने ताऊ और अन्य रिश्तेदारों के साथ मिलकर मां की सुपारी दी और तेज रफ्तार स्कॉर्पियो से टक्कर मारकर हत्या करवा दी। इसके लिए उसने सात लाख रुपए देकर भरतपुर से शूटर को बुलवाया।
मां की मौत के बाद नौकरी चाहिए थी, इसलिए रच डाली पूरी साजिश
मृतका नीरज शर्मा को अपने दिवंगत पति की जगह अनुकंपा नियुक्ति मिली थी। पुलिस जांच में सामने आया कि 24 वर्षीय बेटी आयुषी शर्मा खुद वह नौकरी हासिल करना चाहती थी। आरोप है कि इसी मकसद से उसने ताऊ मोहन और चचेरे भाई बलराम के साथ मिलकर मां को रास्ते से हटाने की योजना बनाई।
7 लाख की सुपारी, स्कॉर्पियो से टक्कर… ताकि लगे हादसा
पुलिस के मुताबिक, हत्या को दुर्घटना दिखाने के लिए रिश्तेदार हेमंत को 7 लाख रुपये की सुपारी दी गई। हेमंत ने अपने साथियों के साथ मिलकर पूरी योजना बनाई और 4 जुलाई को तेज रफ्तार स्कॉर्पियो से नीरज शर्मा को टक्कर मार दी। वारदात को इस तरह अंजाम दिया गया कि पहली नजर में यह सामान्य सड़क हादसा लगे।
भाई को नहीं हुआ हादसे की कहानी पर यकीन
पूरे मामले की दिशा तब बदली जब नीरज शर्मा के भाई राकेश शर्मा ने पुलिस को बताया कि उनकी बहन लंबे समय से बेटी और ससुराल पक्ष के कुछ लोगों की प्रताड़ना से परेशान थी। उन्होंने साफ कहा कि यह हादसा नहीं हो सकता। इसी एक शिकायत ने पुलिस को दोबारा जांच करने पर मजबूर कर दिया।
पुलिस ने घटनास्थल के सीसीटीवी, प्रत्यक्षदर्शियों और स्कॉर्पियो चालक तक पहुंच बनाई। पूछताछ में जब आरोपी टूटे तो एक-एक कर पूरी साजिश सामने आ गई। पुलिस ने आयुषी, मोहन समेत सात आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि बलराम अभी फरार है।
सबसे बड़ा सवाल—क्या एक सरकारी नौकरी के लिए मां की जान ले ली गई?
जांच एजेंसियों का मानना है कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे अनुकंपा नियुक्ति और संपत्ति सबसे बड़ा कारण बनकर सामने आए हैं। पुलिस अब आरोपियों के मोबाइल, बैंक ट्रांजेक्शन और आपसी बातचीत की भी जांच कर रही है, ताकि साजिश की हर कड़ी सामने लाई जा सके।
ऐसे खुली मर्डर मिस्ट्री, CCTV से लेकर लावारिस स्कॉर्पियो तक ऐसे खुलती चली गई हत्या की हर कड़ी
पुलिस जांच में सामने आया कि यह हत्या किसी एक व्यक्ति का काम नहीं थी, बल्कि पूरी प्लानिंग के साथ अंजाम दिया गया ऑपरेशन था। आरोप है कि आयुषी शर्मा, उसके ताऊ मोहन स्वरूप और चचेरे भाई बलराम ने भरतपुर के खटनवाली निवासी हेमंत शर्मा को 7 लाख रुपये में नीरज शर्मा की हत्या की सुपारी दी थी।
हेमंत ने इसके बाद अपने साथियों का नेटवर्क तैयार किया। भरतपुर के खिजूरी निवासी आकाश शर्मा को स्कॉर्पियो चलाने की जिम्मेदारी दी गई। घटना के वक्त आकाश ड्राइविंग सीट पर था, जबकि अरविंद उसके साथ बैठा था। मोहित लगातार नीरज शर्मा की गतिविधियों और लोकेशन की जानकारी आरोपियों तक पहुंचा रहा था। वहीं रोहित वारदात स्थल के पास बाइक लेकर पहले से मौजूद था, ताकि घटना के बाद फरार होने की योजना सफल हो सके।
टक्कर के बाद स्कॉर्पियो छोड़ भागे आरोपी, पहले बस फिर बाइक से बदला ठिकाना
4 जुलाई को जैसे ही स्कॉर्पियो ने नीरज शर्मा को टक्कर मारी, वाहन का अगला हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। आरोपियों ने तुरंत प्लान-बी लागू किया। आकाश और अरविंद स्कॉर्पियो छोड़कर रोहित की बाइक पर सवार होकर मौके से निकल गए। रास्ते में उन्होंने मोहित को नारायण सिंह सर्किल से बस में बैठा दिया, जबकि दोनों बाइक से आगे बढ़ गए। बाद में दौसा में सभी फिर मिले और वहां से अलग-अलग बाइक पर भरतपुर के सेवर इलाके की ओर रवाना हो गए, ताकि पुलिस को उनकी गतिविधियों का सुराग न मिल सके।
एक हेड कांस्टेबल की सूचना ने बदल दी जांच की दिशा
डीसीपी रंजिता शर्मा ने बताया कि शुरुआती जांच में प्रत्यक्षदर्शियों ने सिर्फ इतना बताया था कि तेज रफ्तार सफेद स्कॉर्पियो ने महिला को टक्कर मारी थी। इसी बीच प्रताप नगर थाने के हेड कांस्टेबल दयाराम को सूचना मिली कि सफेद रंग की एक स्कॉर्पियो आकाश नाम के युवक के पास है और वह भरतपुर के कुछ युवकों के साथ जयपुर आता-जाता रहा है।
यह इनपुट मिलते ही पुलिस ने इलाके के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की। जांच में पता चला कि घटना से पहले यही स्कॉर्पियो कई बार कल्याण नगर थर्ड इलाके में देखी गई थी। इससे साफ हो गया कि आरोपियों ने वारदात से पहले कई दिनों तक रेकी की थी।
मिट्टी से ढकी नंबर प्लेट… लेकिन नहीं बच पाए आरोपी
सीसीटीवी के आधार पर पुलिस ने स्कॉर्पियो की तलाश शुरू की। कुछ ही देर बाद वाहन एक चौपाटी के पास लावारिस हालत में मिला। जांच में सामने आया कि आगे और पीछे की नंबर प्लेट पर जानबूझकर मिट्टी पोती गई थी, ताकि पहचान छिपाई जा सके। वहीं वाहन के दाहिने हिस्से की हेडलाइट और बंपर पर टक्कर के ताजा निशान भी मिले।
4 राज्यों नहीं, 4 जिलों में दबिश… फिर खुल गई पूरी साजिश
तकनीकी सर्विलांस और मोबाइल लोकेशन के आधार पर पुलिस आरोपियों तक पहुंची। एक आरोपी की लोकेशन भरतपुर के सेवर में मिलने के बाद पुलिस टीमों ने भरतपुर, दौसा, आगरा और मथुरा तक लगातार दबिश दी। एक-एक कर पांच संदिग्ध हिरासत में लिए गए। पूछताछ में पहले सुपारी किलिंग का खुलासा हुआ और फिर आयुषी, मोहन स्वरूप और बलराम के नाम सामने आए। इसके बाद पुलिस ने सात आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया, जबकि बलराम अब भी फरार है और उसकी तलाश जारी है।
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