विकसित भारत की राह पर भव्य मंथन | भरतपुर में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का दमदार आगाज़

भरतपुर (Bharatpur) में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (ABRSM) और महारानी श्री जया राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय (MSJ College)द्वारा आयोजित द्विदिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का भव्य उद्घाटन। मंत्रियों, कुलगुरुओं और शिक्षाविदों ने विकसित भारत की वैश्विक दृष्टि पर रखे विचार।

भरतपुर 

अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ और महारानी श्री जया राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय की संयुक्त मेजबानी में शनिवार को भरतपुर विकास प्राधिकरण के ऑडिटोरियम में द्विदिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का भव्य शुभारंभ हुआ। मंच पर मंत्रियों, कुलगुरुओं, शिक्षाविदों और शोधार्थियों का ऐसा संगम बना कि सभागार ज्ञान, शोध और भारत-दृष्टि की ऊर्जा से गूंज उठा।

मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन, माल्यार्पण और वंदना के साथ शुरू हुए इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि जल संसाधन मंत्री सुरेश रावत, राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. डॉ. नारायण लाल गुप्ता, विशिष्ट अतिथि कुलगुरु प्रो. त्रिभुवन शर्मा, कार्यक्रम अध्यक्ष महेंद्र कपूर, प्राचार्य प्रो. सुनीता पांडे, संयोजक प्रो. योगेंद्र कुमार भानु और आयोजन सचिव प्रो. मुकेश कुमार सहित सभी अतिथियों का पुष्प-गुच्छ और शॉल से स्वागत किया गया।

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‘भारत को मिला नेतृत्व का अवसर’

इस अवसर पर समारोह के मुख्य अतिथि जल संसाधन मंत्री सुरेश रावत ने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों में भारत नेतृत्व की स्थिति में है और यह हमारे युवाओं के लिए एक बड़ा अवसर है। उन्होंने पश्चिमी राजस्थान की जल-संरक्षण परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि “मरू-प्रदेश जल-संरक्षण का विश्व स्तरीय उदाहरण है, जिसे युवा आगे बढ़ा सकते हैं।”

शिक्षक बनें मूर्तिकार-महेंद्र कपूर 

ABRSM के राष्ट्रीय संगठन मंत्री महेंद्र कपूर ने कहा कि शिक्षक वही है जो विद्यार्थी के व्यक्तित्व की मूर्ति को तराश दे। उन्होंने युवाओं को महाराणा प्रताप की संकल्प-शक्ति याद दिलाते हुए कहा—“2047 का भारत ऐसे ही सशक्त, अनुशासित और मूल्य-आधारित युवाओं के हाथों गढ़ा जाएगा।”

‘ब्रेन ड्रेन से ब्रेन गेन’

विशिष्ट अतिथि कुलगुरु प्रो. त्रिभुवन शर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारत की युवा शक्ति डिजिटल इंडिया के माध्यम से तीव्र प्रगति पर है। यदि भारत ब्रेन-ड्रेन रोककर ब्रेन-गेन कर ले, तो विश्व की सबसे बड़ी शक्ति बनने से हमें कोई नहीं रोक सकता। उन्होंने कहा कि “वसुधैव कुटुम्बकम्” भारतीय संस्कृति की वह धुरी है, जो दुनिया को शांति और उन्नति की राह दिखा सकती है।

‘आत्मविश्वास ही नवाचार का आधार’

अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. डॉ. नारायण लाल गुप्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पंच-प्रण को राष्ट्रव्यापी व्यवहार में लाना समय की मांग है।
उन्होंने कहा—“भारत को विकसित बनाने के लिए हमें गुलामी की मानसिकता से मुक्त होकर अपनी संस्कृति पर गर्व करना होगा और कर्तव्यबोध को जीवन का मूल आधार बनाना होगा।”

कार्यक्रम के प्रारम्भ में कॉलेज प्राचार्य डॉ. सुनीता पांडे ने बताया कि यह  महाविद्यालय पूर्वी राजस्थान का सबसे बड़ा शिक्षण संस्थान है, जहाँ 6000 से अधिक विद्यार्थी और शोधार्थी अध्ययनरत हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि “विकसित भारत की अवधारणा : भारत-केंद्रित वैश्विक दृष्टिकोण” विषय पर होने वाला यह सम्मेलन विद्यार्थियों और अध्यापकों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा।

आयोजन सचिव प्रो. मुकेश कुमार ने कहा कि देश-विदेश से आए विशेषज्ञ पत्र वाचन और पोस्टर प्रस्तुति के माध्यम से भारत की चिकित्सा, कला, कृषि, उद्योग, योग और अन्य क्षेत्रों में भूमिका पर महत्वपूर्ण दृष्टिकोण सामने रखेंगे।

 इससे पूर्व मंचस्थ अतिथियों का स्वागत जिला कलेक्टर कमर चौधरी, एसपी दिगंत आनंद सहित अनेक शिक्षाविदों और जनप्रतिनिधियों ने किया। सात तकनीकी सत्रों में बीएचयू, ICMR, IISER, IISc, एम्स और विभिन्न विश्वविद्यालयों के शीर्ष शोधकर्ताओं ने पत्र-वाचन किया। मथुरा-वृंदावन के कलाकारों ने सांस्कृतिक प्रस्तुति दी।

समापन में संयोजक प्रो. डॉ. योगेंद्र भानु ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों, पत्रकारों और प्रशासन को सफल आयोजन के लिए धन्यवाद दिया।

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