उदयपुर
रविवार का दिन सीटीएई (College of Technology and Engineering) उदयपुर के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया। मौका था 23वें एलुमनाई मिलन और सम्मान समारोह का — जहाँ एक बार फिर पुराने साथी, प्रोफेसर और यादें एक साथ लौट आईं।
कार्यक्रम की शुरुआत हुई संस्थापक अधिष्ठाता डॉ. के. एन. नाग की मूर्ति के अनावरण से, जिसे देखकर हर चेहरे पर गर्व और nostalgia झलक रहा था। मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे अमूल के पूर्व प्रबंध निदेशक डॉ. आर. एस. सोढी, जो खुद सीटीएई के पूर्व छात्र हैं, ने कहा—
“भारत की अगली क्रांति खेतों से आएगी — ज्ञान, नवाचार और सहयोग की शक्ति से।”
उन्होंने अपने कॉलेज दिनों को याद करते हुए बताया कि यहीं से उनकी सोच ने दिशा पाई। उन्होंने विद्यार्थियों को तकनीक आधारित खेती, जल संरक्षण और ग्रामीण सहकारिता से जुड़े स्टार्टअप्स पर ध्यान देने का आह्वान किया।
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कार्यक्रम में एमपीयूएटी के कुलगुरु डॉ. अजीत कुमार कर्णाटक ने भी शिरकत की। उन्होंने कहा-
“किसी भी संस्थान की असली ताकत उसके एलुमनाई होते हैं, और सीटीएई के पूर्व छात्र तो दुनिया भर में अपना नाम रोशन कर रहे हैं।”
इस अवसर पर डायमंड, गोल्डन और सिल्वर जुबिली पूर्ण करने वाले पूर्व छात्रों को साफा और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। जब पुराने साथी 25-50 साल बाद आमने-सामने मिले तो माहौल में भावनाओं की बाढ़ आ गई।
किसी ने हंसते हुए कहा — “यार तू तो मोटा हो गया!”
तो किसी ने जवाब दिया — “भाई, तू तो अभी भी वैसा ही है — सीक्रेट बता दे!”
इसी बीच अर्पण सेवा संस्थान के डॉ. शुभकरण ने एलुमनाई सोसाइटी के साथ एक समझौता किया — जिसके तहत वे हर साल ज़रूरतमंद विद्यार्थियों की मदद के लिए ₹1 लाख का सहयोग देंगे।
एलुमनाई सोसाइटी के अध्यक्ष इंजीनियर विपिन लड्ढा और मानद सचिव डॉ. सांवल सिंह मीणा ने बताया कि समारोह में 12 उत्कृष्ट विद्यार्थियों और 9 पूर्व छात्रों को विशेष सम्मान दिए गए।
अधिष्ठाता डॉ. सुनील जोशी ने सभी पुरस्कार विजेताओं को शुभकामनाएं दीं।
कार्यक्रम का समापन गीत “सीटीएई के रंग, एलुमनाई के संग” के साथ हुआ — और सभागार तालियों की गूंज से भर उठा।
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