‘शिक्षा विभूषण’ से लेकर ‘शिक्षा श्री’ तक… किसे मिलेगा कौन-सा सम्मान? | शिक्षा विभाग ने जारी किए नए मानदंड

राजस्थान शिक्षा विभाग 29 जून को शिक्षा क्षेत्र में योगदान देने वाले भामाशाहों और प्रेरकों का सम्मान करेगा। जयपुर में तैयारियों को लेकर उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई।

जयपुर। राजस्थान में स्कूलों और शिक्षा के विकास में सहयोग करने वाले भामाशाहों के लिए इस बार सम्मान का दायरा और बड़ा होने जा रहा है। शिक्षा विभाग 29 जून को ऐसे दानदाताओं और प्रेरकों को सम्मानित करेगा, जिन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देकर सरकारी विद्यालयों की तस्वीर बदलने में भूमिका निभाई है।

इस राज्यस्तरीय आयोजन को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। जयपुर स्थित श्री राधाकृष्णन शिक्षा संकुल के मंथन सभागार में प्रारंभिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें कार्यक्रम की रूपरेखा, व्यवस्थाओं और विभिन्न समितियों की तैयारियों की समीक्षा की गई।

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इस बार बदले गए सम्मान के नियम

बैठक में बताया गया कि शिक्षा विभाग ने भामाशाह सम्मान की विभिन्न श्रेणियों के लिए पात्रता मानदंडों में बदलाव किया है। अब दान की राशि के आधार पर अलग-अलग स्तर के सम्मान दिए जाएंगे।

  • 1 करोड़ रुपये या उससे अधिक दान करने वाले दानदाताओं को ‘शिक्षा विभूषण सम्मान’ दिया जाएगा।
  • 30 लाख रुपये से लेकर 1 करोड़ रुपये से कम तक दान करने वालों को ‘शिक्षा भूषण सम्मान’ से नवाजा जाएगा।
  • 1 लाख रुपये से अधिक और 30 लाख रुपये से कम योगदान देने वाले भामाशाहों को जिला स्तरीय समारोह में ‘शिक्षा श्री सम्मान’ प्रदान किया जाएगा।

सिर्फ दानदाता ही नहीं, प्रेरक भी होंगे सम्मानित

शिक्षा विभाग ने उन लोगों को भी सम्मानित करने का निर्णय लिया है, जिन्होंने दूसरों को शिक्षा के लिए योगदान देने के लिए प्रेरित किया।

  • 50 लाख रुपये या उससे अधिक के कार्य के लिए प्रेरित करने वालों को राज्य स्तरीय प्रेरक सम्मान मिलेगा।
  • 5 लाख रुपये से लेकर 50 लाख रुपये से कम के कार्य के लिए प्रेरित करने वालों को जिला स्तरीय प्रेरक सम्मान दिया जाएगा।

जयपुर संभाग की संयुक्त निदेशक मंजू शर्मा ने बताया कि आयोजन को व्यवस्थित और प्रभावी बनाने के लिए सभी समितियों के कार्यक्षेत्र स्पष्ट कर दिए गए हैं। तैयारियों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने और कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं की विस्तार से समीक्षा की गई।

बैठक में उपनिदेशक दीपक शुक्ला, उप जिला शिक्षा अधिकारी बसंत जिन्दल सहित विभिन्न समितियों के प्रभारी, सहप्रभारी और सदस्य मौजूद रहे। अधिकारियों का कहना है कि इस सम्मान समारोह का उद्देश्य केवल भामाशाहों का अभिनंदन करना नहीं, बल्कि समाज में शिक्षा के लिए सहयोग और सहभागिता की भावना को और मजबूत करना भी है।

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