उदयपुर के सीटीएई कॉलेज में आयोजित एनसीसी संयुक्त वार्षिक प्रशिक्षण शिविर में 600 कैडेट भाग ले रहे हैं। ड्रोन प्रशिक्षण, फायरिंग, एयर विंग गतिविधियां और नेतृत्व विकास कार्यक्रम आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
उदयपुर। सीटीएई कॉलेज परिसर इन दिनों किसी सैन्य प्रशिक्षण केंद्र से कम नहीं दिख रहा। मैदानों में कदमताल करते कैडेट, फायरिंग की तैयारी, ड्रोन संचालन की बारीकियां सीखते युवा और अनुशासन की मिसाल पेश करती टुकड़ियां—यह सब संयुक्त वार्षिक प्रशिक्षण शिविर (CATC) का हिस्सा है, जो महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमपीयूएटी) में पूरे जोश के साथ शुरू हो चुका है।
एनसीसी निदेशालय, राजस्थान के तत्वावधान में आयोजित यह दस दिवसीय शिविर 20 जून तक चलेगा। पहले ही दिन कैडेटों में उत्साह और ऊर्जा देखने लायक रही। राजस्थान के विभिन्न समूहों से पहुंचे करीब 600 कैडेट यहां सैन्य प्रशिक्षण, तकनीकी दक्षता और नेतृत्व विकास की विशेष गतिविधियों में हिस्सा ले रहे हैं।
इस बार शिविर की सबसे बड़ी खासियत आधुनिक तकनीक से जुड़ा ड्रोन प्रशिक्षण है। थल सेना, नौसेना और वायु सेना विंग के 60 चयनित कैडेटों को ड्रोन संचालन, सुरक्षा मानकों और इसके व्यावहारिक उपयोगों का विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। वहीं करीब 100 कैडेट प्री वायु सैनिक कैंप-1 में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं, जहां से आगे अखिल भारतीय वायु सैनिक शिविर के लिए चयन का रास्ता खुलेगा।
शिविर में शामिल 440 थल सेना विंग कैडेट भी विभिन्न सैन्य गतिविधियों में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। सुबह से शाम तक चलने वाले सत्रों में कैडेटों को रेंज फायरिंग, स्कीट शूटिंग, ड्रिल, मार्चिंग, टेंट पिचिंग और मैप रीडिंग जैसी गतिविधियों का अभ्यास कराया जा रहा है।
केवल सैन्य प्रशिक्षण ही नहीं, बल्कि व्यक्तित्व विकास और नेतृत्व क्षमता को भी विशेष महत्व दिया जा रहा है। आपदा प्रबंधन, टीम वर्क, नेतृत्व कौशल, एयरो मॉडलिंग और विमान संचालन से जुड़े तकनीकी विषय भी प्रशिक्षण कार्यक्रम का हिस्सा हैं।
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कैंप के कमांडिंग ऑफिसर विंग कमांडर नटराज डागुर ने विश्वविद्यालय और सीटीएई कॉलेज प्रशासन द्वारा की गई व्यवस्थाओं की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे शिविर युवाओं को अनुशासित, आत्मनिर्भर और राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित नागरिक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रोफेसर (डॉ.) मनोज कुमार महला, अधिष्ठाता प्रोफेसर (डॉ.) सुनील जोशी तथा केयर टेकर ऑफिसर राम नारायण कुम्हार का विशेष आभार भी व्यक्त किया।
कैडेटों की स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए पैसिफिक हॉस्पिटल, उदयपुर द्वारा चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे प्रशिक्षण के दौरान किसी भी आपात स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।
आने वाले दिनों में शिविर और भी रोचक होने वाला है। विभिन्न प्रतियोगिताओं, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और उन्नत प्रशिक्षण गतिविधियों के जरिए कैडेटों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा। फिलहाल उदयपुर का यह कैंप युवाओं को सिर्फ सैन्य प्रशिक्षण ही नहीं, बल्कि भविष्य के नेतृत्व की भी तैयारी करवा रहा है।
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