अब Paytm, Google Pay, PhonePe की दौड़ खत्म | एक ही स्क्रीन पर दिखेंगे सारे AutoPay, मिस हुआ तो फाइन से भी बचेंगे

NPCI जल्द ऐसा फीचर ला रहा है जिससे Paytm, Google Pay और PhonePe समेत सभी UPI ऐप्स के AutoPay एक ही जगह दिखाई देंगे। इससे ऑटो-पे मैनेज करना आसान होगा और फेल ट्रांजैक्शन व जुर्माने से बचाव मिलेगा।

नई दिल्ली। अगर आपके मोबाइल में Paytm, Google Pay और PhonePe तीनों ऐप मौजूद हैं और अलग-अलग सब्सक्रिप्शन या बिल पेमेंट्स के लिए ऑटो-पे सेट कर रखा है, तो जल्द ही एक बड़ी परेशानी खत्म होने वाली है। अब यूजर्स को यह देखने के लिए अलग-अलग ऐप्स में भटकना नहीं पड़ेगा कि किस प्लेटफॉर्म पर कौन-सा ऑटोमैटिक पेमेंट सक्रिय है।

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नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) एक ऐसा नया सिस्टम तैयार कर रहा है, जिससे सभी UPI ऐप्स में किए गए ऑटो-पे या ई-मैंडेट एक ही जगह दिखाई देंगे। यानी चाहे आपने नेटफ्लिक्स का सब्सक्रिप्शन एक ऐप से लिया हो, बिजली बिल का ऑटो-पे दूसरे ऐप से और मोबाइल रिचार्ज तीसरे ऐप से, अब इन सभी की जानकारी एक ही इंटरफेस पर मिल सकेगी।

दरअसल, डिजिटल पेमेंट्स की दुनिया में ऑटो-पे फीचर तेजी से लोकप्रिय हुआ है। OTT सब्सक्रिप्शन, मोबाइल रिचार्ज, बिजली-पानी के बिल, SIP निवेश और कई अन्य सेवाओं के लिए लोग ऑटोमैटिक भुगतान का विकल्प चुन रहे हैं। लेकिन समस्या यह रही कि हर ऐप में अलग-अलग जाकर इन मैंडेट्स को ट्रैक और मैनेज करना पड़ता था।

NPCI का नया फीचर इसी झंझट को खत्म करने की तैयारी में है। इसके तहत ऐसा साझा सॉफ्टवेयर सिस्टम विकसित किया जा रहा है जिसे सभी UPI प्लेटफॉर्म इस्तेमाल कर सकेंगे। इससे यूजर्स को एक ही जगह अपने सभी ऑटो-पे मैंडेट्स देखने, संशोधित करने या जरूरत पड़ने पर बंद करने की सुविधा मिलेगी।

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इस सुविधा की जरूरत इसलिए भी महसूस की गई क्योंकि ऑटो-पे ट्रांजैक्शन की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रही है। NPCI के आंकड़ों के अनुसार मई महीने में देश के शीर्ष 10 बैंकों ने करीब 1.6 बिलियन ई-मैंडेट ट्रांजैक्शन प्रोसेस किए। यह आंकड़ा पिछले वर्ष इसी अवधि के 577 मिलियन ट्रांजैक्शनों की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक है।

हालांकि बढ़ते उपयोग के साथ एक और समस्या सामने आई है—ट्रांजैक्शन रिजेक्शन। कई बार खाते में पर्याप्त बैलेंस नहीं होने के कारण ऑटो-पे फेल हो जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक देश के सबसे बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक SBI में ऑटो-पे आधारित ट्रांजैक्शनों की स्वीकृति दर करीब 30 प्रतिशत है, जबकि बड़ी संख्या में भुगतान असफल हो जाते हैं।

ऐसी स्थिति में कई सेवाओं पर लेट फीस या पेनाल्टी भी लग सकती है। नया सिस्टम यूजर्स को पहले से अपने सक्रिय मैंडेट्स पर नजर रखने में मदद करेगा, जिससे भुगतान फेल होने और अनावश्यक जुर्माने की संभावना कम होगी।

NPCI पहले ही ई-मैंडेट से जुड़ी जानकारी और सहायता के लिए चैटबॉट आधारित हेल्प पोर्टल शुरू कर चुका है। अब आने वाला यह नया फीचर करोड़ों UPI यूजर्स के लिए ऑटो-पे मैनेजमेंट को और आसान बनाने वाला साबित हो सकता है।

डिजिटल भुगतान के तेजी से बढ़ते दौर में यह बदलाव यूजर्स को न केवल बेहतर नियंत्रण देगा, बल्कि अलग-अलग ऐप्स के बीच भटकने की मजबूरी से भी राहत दिलाएगा।

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