राजस्थान हाईकोर्ट (Rajasthan High Court) के बड़े फैसले में सस्पेंड सिविल जज वंदना शर्मा की बहाली, बालकृष्ण मिश्रा का ट्रांसफर और कई न्यायिक अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार।
जोधपुर
राजस्थान की न्यायिक गलियारों में अचानक हलचल तेज हो गई। एक तरफ लंबे समय से सस्पेंड चल रही सिविल जज की वापसी हुई, तो दूसरी ओर कई कोर्टरूम की तस्वीर एक ही दिन में बदल गई। हाईकोर्ट प्रशासन के लगातार जारी आदेशों ने साफ कर दिया—यह सिर्फ फेरबदल नहीं, बल्कि सिस्टम को नए सिरे से सेट करने की कवायद है।
रेल पटरियों पर अब ‘स्मार्ट पहरा’ | हल्के कॉम्पोजिट स्लीपर और AI निगरानी से बदलेगा ट्रेन सफर
सबसे चौंकाने वाला मोड़ आया सिविल जज वंदना शर्मा के मामले में। करीब दो साल पहले 5 सितंबर 2023 को सस्पेंड हुईं वंदना शर्मा की अब बहाली कर दी गई है। उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई अभी जारी है, लेकिन कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने सस्पेंशन खत्म कर उन्हें तुरंत जिम्मेदारी भी दे दी। बहाली के साथ ही उन्हें जोधपुर स्थित राजस्थान हाईकोर्ट में विशेष कार्याधिकारी (OSD) बना दिया गया। हालांकि, सस्पेंशन अवधि का हिसाब-किताब विभागीय जांच पूरी होने के बाद ही तय होगा—यानी कहानी अभी बाकी है।
इसी के साथ जिला न्यायाधीश स्तर पर भी बड़ा बदलाव हुआ। भीलवाड़ा में पोक्सो एक्ट की विशेष अदालत संख्या-1 में कार्यरत बालकृष्ण मिश्रा को अब जोधपुर स्थित राजस्थान राज्य न्यायिक अकादमी का नया निदेशक बनाया गया है। उन्हें तुरंत वर्तमान जिम्मेदारी सौंपकर नई पोस्टिंग जॉइन करने के निर्देश दिए गए हैं।
एक और आदेश में पाली जिले के बाली में तैनात वरिष्ठ सिविल जज-सह-अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी मदनलाल बालोतिया को एपीओ (Awaiting Posting Orders) कर दिया गया है। अब वे जोधपुर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कार्यालय में मुख्यालय के साथ अगली पोस्टिंग का इंतजार करेंगे।
उधर, खाली पड़ी अदालतों का काम ठप न पड़े, इसके लिए हाईकोर्ट ने सात न्यायिक अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार देकर जिम्मेदारी बढ़ा दी है—
- अजमेर: एडीजे-1 रेणु श्रीवास्तव को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विशेष अदालत
- अलवर: जगेन्द्र कुमार अग्रवाल को पोक्सो कोर्ट-2 का अतिरिक्त जिम्मा
- बांसवाड़ा: एडीजे इंदिरा बानेरा को पोक्सो कोर्ट
- बारां: काना राम मीणा को अतिरिक्त सिविल जज व न्यायिक मजिस्ट्रेट का कार्यभार
- बूंदी: विवेक शर्मा (पोक्सो कोर्ट-1) और मीनाक्षी मीणा (पोक्सो कोर्ट-2)
- जयपुर महानगर-प्रथम: अनिमा दाधीच को सीबीआई कोर्ट-5 का अतिरिक्त प्रभार
इन सभी अधिकारियों को साफ निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने नियमित काम के साथ कम से कम 40% अतिरिक्त मामलों का निपटान सुनिश्चित करें। खासतौर पर वे केस, जिनमें आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं या हाईकोर्ट ने समयसीमा तय कर रखी है—उन्हें प्राथमिकता देना अनिवार्य किया गया है।
नई हवा खबरें अपने मोबाइल पर नियमित और डायरेक्ट प्राप्त करने के लिए व्हाट्सएप नंबर 9460426838 सेव करें और ‘Hi’ और अपना नाम, स्टेट और सिटी लिखकर मैसेज करें। आप अपनी खबर या रचना भी इस नंबर पर भेज सकते हैं।
तीन-तीन जन्मतिथि, तीन बार 10वीं… दस्तावेज़ों की जांच में फंसा ‘मोनू’ | कोर्ट के आदेश पर FIR
ट्रांसफर की आहट से शिक्षक जगत में हलचल | शिक्षा मंत्री बोले—अब सेकंड ग्रेड टीचर्स की बारी
‘नई हवा’ की खबरों को Subscribe करने के लिए हमारे WhatsApp Channel से जुड़ें।
