शोध की दिशा तय करती है सही परिकल्पना | संगम विश्वविद्यालय में प्रो. मीनू माहेश्वरी ने समझाए रिसर्च मेथोडोलॉजी के सूत्र

संगम विश्वविद्यालय भीलवाड़ा में आईसीएसएसआर प्रायोजित रिसर्च मेथोडोलॉजी कोर्स में कोटा विश्वविद्यालय की प्रो. मीनू माहेश्वरी ने हाइपोथेसिस फ्रेमिंग, टेस्टिंग और शोध की विधियों पर व्याख्यान दिया।

भीलवाड़ा 

संगम विश्वविद्यालय में आई.सी.एस.एस.आर. द्वारा प्रायोजित सात दिवसीय रिसर्च मेथोडोलॉजी कोर्स में कोटा विश्वविद्यालय के वाणिज्य विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. मीनू माहेश्वरी मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुईं। उन्होंने अपने व्याख्यान में हाइपोथेसिस फ्रेमिंग, टेस्टिंग तथा शोध के उद्देश्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

प्रो. माहेश्वरी ने अपने सत्र में प्रतिभागियों को समझाया कि किसी भी शोध की सफलता के लिए सही परिकल्पना (Hypothesis) का निर्माण अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने कहा कि परिकल्पना शोध के लिए दिशा-सूचक की तरह कार्य करती है। यदि शोधार्थी परिकल्पना को सही ढंग से तैयार कर लेता है तो आगे का शोध कार्य काफी सहज हो जाता है।

अपने व्याख्यान के दौरान उन्होंने विभिन्न सरल उदाहरणों के माध्यम से बताया कि परिकल्पना का निर्माण कैसे किया जाता है। साथ ही उन्होंने परिकल्पना के विभिन्न प्रकार, उसके निर्माण में आने वाली कठिनाइयों तथा एक आदर्श परिकल्पना की विशेषताओं पर भी प्रकाश डाला।

प्रो. माहेश्वरी ने सत्र में परिकल्पना की टेस्टिंग की प्रक्रिया को भी विस्तार से समझाया। उन्होंने पैरामेट्रिक और नॉन-पैरामेट्रिक टेस्ट की जानकारी देते हुए टाइप-वन और टाइप-टू त्रुटियों, डेस्क्रिपटिव स्टैटिस्टिक्स तथा इनफ्रेंशियल स्टैटिस्टिक्स की अवधारणाओं को स्पष्ट किया।

इसके अलावा उन्होंने हाइपोथेसिस टेस्टिंग के विभिन्न तरीकों—टी टेस्ट, एफ टेस्ट, जेड टेस्ट, एनोवा, क्रुस्कल-वालिस टेस्ट और मैक-नेमर टेस्ट—को भी विस्तार से समझाया, जिससे शोधार्थियों को शोध प्रक्रिया की व्यावहारिक समझ मिल सके।

सत्र के प्रारंभ में प्रोफेसर मुकेश कुमार ने प्रो. मीनू माहेश्वरी का स्वागत किया। कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों द्वारा पूछे गए विभिन्न प्रश्नों के उत्तर प्रो. माहेश्वरी ने दिए।

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