अदालत के आर्डर पर अफसर का ‘स्टे आर्डर’, हाईकोर्ट की फटकार पड़ी तो आदेश लिया वापस

जयपुर 

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राजस्थान के माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने अदालत के स्टे आर्डर की पालना नहीं करने के कर दिए थे आदेश 


हाईकोर्ट की फटकार के बाद आखिर राजस्थांन के माध्यमिक शिक्षा निदेशक बीकानेर ने दो सप्ताह पहले ही जारी अपने उस आदेश को वापस ले लिया जिसमें उन्होंने अपने अधीनस्थ अधिकारियों को यह निर्देश दिए थे कि तबादलों के मामलों में बिना उनकी मंजूरी के अदालत के स्टे आर्डर की पालना नहीं की जाए और ऐसे शिक्षक को ज्वाइन नहीं कराया जाए। इस पर एक शिक्षक ने निदेशक के आदेश को चुनौती दी जिसे हाईकोर्ट ने अदालत की अवमानना माना और शिक्षा सचिव अपर्णा अरोड़ा व शिक्षा निदेशक बीकानेर सौरभ स्वामी को 23 फरवरी को अदालत में हाजिर होने के निर्देश दिए। हाईकोर्ट की फटकार के बाद 23 को ही आनन-फानन में विभाग ने अपने 8 फरवरी के आदेश को वापस ले लिया।

शिक्षा निदेशक ने यह निकाला था आदेश 
माध्यमिक शिक्षा निदेशक बीकानेर सौरभ स्वामी ने 8 फरवरी, 2021 को यह आदेश निकाला था कि तबादलों के मामलों में किसी भी अदालत से स्टे है तो उसकी पालना नहीं की जाए। कोई इसकी पालना करेगा तो विभाग उस के खिलाफ कार्रवाई करेगा। निदेशक ने साथ ही यह भी कहा कि इस बाबत जो भी कागजात हों उनको उनके पास भेज दिया जाए। वे जब चाहेंगे तब कार्रवाई करेंगे।

यह था पूरा मामला 
माध्यमिक शिक्षा के एक व्याख्याता अरविन्द कुमार शर्मा का तबादला 4 जनवरी, 2021 को जयपुर से अजमेर कर दिया गया था। जिसे उन्होंने सिविल अपीलीय अधिकरण में  चुनौती दी। अधिकरण ने इस पर स्टे आर्डर दे दिया। इसके बावजूद उनको उनके पुराने पद पर निदेशक के आदेश का हवाला दे कर ज्वाइनिंग नहीं करने दी गई। व्याख्याता अरविन्द कुमार शर्मा ने अपने अधिवक्ता हनुमान चौधरी के जरिए हाईकोर्ट में चुनौती दी और इसे अदालत की अवमानना माना। इस पर राजस्थान हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग में तबादलों के मामले में अदालती रोक के बावजूद शिक्षकों को पुराने पद पर पुन: ज्वाइनिंग करने से पहले शिक्षा निदेशक से स्वीकृति लेने के परिपत्र को देने को अवमानना कारक माना। इसके साथ ही अदालत ने शिक्षा सचिव अपर्णा अरोड़ा व शिक्षा निदेशक बीकानेर सौरभ स्वामी को 23 फरवरी को पेश होने को कहा है। न्यायाधीश एसपी शर्मा ने यह आदेश दिए। अदालत की सख्ती के बाद शिक्षा निदेशक बीकानेर ने 23 फरवरी, 2021 को पेशी के दिन ही अपने 8 फरवरी, 2021 के आदेश को वापस ले लिया।





 

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