ठहाकों से गूंजा अनुराग-31 का मंच | देशभर के कवियों ने हास्य-व्यंग्य और ओज से रात भर बांधे रखा समां

लालसोट में अनुराग सेवा संस्थान के अनुराग-31 कार्यक्रम के तहत भव्य अखिल भारतीय हास्य कवि सम्मेलन हुआ, जिसमें देशभर के कवियों ने हास्य, व्यंग्य और देशभक्ति की रचनाओं से देर रात तक श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।

लालसोट 

हंसी, व्यंग्य, देशभक्ति और सामाजिक सरोकारों से सजी कविताओं के बीच अनुराग सेवा संस्थान द्वारा आयोजित अनुराग-31 के अंतर्गत भव्य अखिल भारतीय हास्य कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ, जहां देशभर से आए ख्यातनाम कवियों ने अपनी प्रस्तुतियों से ऐसा रंग जमाया कि पंडाल देर रात तक तालियों और ठहाकों से गूंजता रहा। साहित्य और सामाजिक चेतना का अनोखा संगम इस आयोजन की खास पहचान बना।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि दिलीप तन्मय सहित अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्वलन कर किया। वरिष्ठ गीतकार यशपाल ‘यश’ ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर माहौल को भक्तिमय बना दिया।

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कवि सुनहरी लाल ‘तुरंत’ ने बेटियों के महत्व पर मार्मिक पंक्तियां सुनाईं—
‘घर के आंगन की तुलसी है ये बेटियां…’
उनकी भावपूर्ण प्रस्तुति ने श्रोताओं को भावुक कर दिया और बेटियों के सम्मान का संदेश दिया।

इसके बाद रोहित चौधरी ने अपनी देशभक्ति से ओतप्रोत रचना—
‘वंदे मातरम होने पर दिल पर भारत रखता हूं…’
सुनाकर पूरे पंडाल में देशप्रेम की भावना जगा दी।

कवि रामबाबू सिकरवार ने अपनी पैरोडी और समसामयिक व्यंग्य से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया।
उनकी पंक्तियां—
“जो वतन की खातिर मिटे उनको सलाम है…”
और
“ऑपरेशन अपना सफल सिंदूर हो गया…”
पर देर तक ठहाके गूंजते रहे।

सुरेंद्र सार्थक ने समाज की विडंबनाओं पर कटाक्ष करते हुए कहा—
“वाह रे मेरे समाज, तेरी परंपरा…”
उनकी रचनाओं ने श्रोताओं को हंसाते हुए सोचने पर मजबूर किया।

कवि डॉ. अंजीव अंजुम ने गंभीर कविता के माध्यम से सामाजिक सच्चाइयों को उजागर करते हुए कहा—
“झील का पानी जहां छिछला मिला है…”
उनकी प्रस्तुति में बदलते सामाजिक मूल्यों की गहरी झलक दिखाई दी।

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फिरोजाबाद से आए गीतकार यशपाल ‘यश’ ने अपने गीतों में करीब 50 वर्ष पुराने ग्रामीण जीवन और चूड़ियों की परंपरा का भावपूर्ण चित्रण किया, जिसने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम के दौरान संस्थान सचिव श्याम सुन्दर शर्मा ने संस्थान की गतिविधियों पर प्रकाश डाला। समापन अवसर पर संस्थान अध्यक्ष अंशुल सोनी ने सभी अतिथियों, कवियों और उपस्थित जनसमूह का आभार व्यक्त किया। मंच संचालन मदन पारीक ने प्रभावी ढंग से किया।

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इस अवसर पर अनेक गणमान्य नागरिकों और संस्थान पदाधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिनमें प्रमुख रूप से अंजना त्यागी, पिंकी चौधरी, अनुराधा सोनी, डोली रावत, संतोष ऋचा शर्मा, चांद देवी, मनमोहन शर्मा, अजय हट्टीका, पप्पू लाल शर्मा, चिराग जोशी, एल.एन. भारद्वाज, सुदीप मिश्रा, अशोक हट्टीका, वेदप्रकाश शर्मा, अनुराग तिवाड़ी, संजीव रावत, राजेंद्र डोब, आशीष थलोज, अमन राजपूर्ण, सुनील खारला, राकेश सेडूलाई, बालमुकुंद शर्मा, मुकेश निर्झरना, सुनील पंचोली, सुरेश अशोक सुकलाव, एम.पी. त्यागी, गिर्राज सेडूलाई, दीपक सुकार, विनीत उपाध्याय, अशोक व्यास, अक्षय तिवाड़ी, विशाल गौतम, उत्कर्ष नारायण और सियाराम शर्मा सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।

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