केंद्र सरकार ने आयकर नियम 2026 (Income Tax Rules 2026) की अधिसूचना जारी की। 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले इन नियमों में HRA, स्टॉक मार्केट लेनदेन और कैपिटल गेन रिपोर्टिंग से जुड़े कई अहम बदलाव किए गए हैं।
नई दिल्ली
देश की टैक्स व्यवस्था में अगले वित्तीय वर्ष से बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को नए आयकर नियम, 2026 की अधिसूचना जारी कर दी है, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले नए आयकर अधिनियम 2025 के लिए रास्ता तैयार करेगी।
इन नए नियमों का मकसद टैक्स सिस्टम को ज्यादा पारदर्शी, डिजिटल और सख्त निगरानी वाला बनाना है। इसके साथ ही कई मामलों में टैक्स से जुड़ी रिपोर्टिंग और खुलासों को पहले से ज्यादा कड़ा किया गया है।
क्या बदलने वाला है?
सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक इन नियमों में कोई नया टैक्स नहीं लगाया गया है, लेकिन टैक्स से जुड़े लेनदेन की निगरानी और रिपोर्टिंग को काफी मजबूत किया जाएगा। इसके लिए अधिक डिस्क्लोजर और डिजिटल ट्रैकिंग की व्यवस्था की गई है।
इन नियमों को केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने ई-राजपत्र में प्रकाशित किया है। ये नियम पहले से लागू कई पुराने प्रावधानों की जगह लेंगे और वित्त वर्ष 2026-27 के लिए एक नया ढांचा तय करेंगे।
HRA में बड़ा बदलाव
नए नियमों की सबसे बड़ी चर्चा हाउस रेंट अलाउंस (HRA) को लेकर हो रही है। अब तक सैलरी का 50 प्रतिशत तक HRA क्लेम करने की सुविधा केवल मुंबई, दिल्ली, चेन्नई और कोलकाता जैसे मेट्रो शहरों में रहने वाले कर्मचारियों को मिलती थी। लेकिन नए नियम लागू होने के बाद बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद के कर्मचारी भी सैलरी के 50 प्रतिशत हिस्से तक HRA क्लेम कर सकेंगे। हालांकि बाकी शहरों के लिए यह सीमा अभी भी 40 प्रतिशत ही बनी रहेगी।
मकान मालिक से संबंध बताना होगा
पारदर्शिता बढ़ाने के लिए सरकार ने एक और अहम बदलाव किया है। अब करदाताओं को एक निर्धारित फॉर्म में यह भी बताना होगा कि जिस मकान के लिए HRA क्लेम किया जा रहा है, उस मकान मालिक से उनका कोई पारिवारिक या व्यक्तिगत संबंध है या नहीं।
स्टॉक मार्केट लेनदेन पर सख्त नियम
नए आयकर नियमों में स्टॉक मार्केट और डेरिवेटिव ट्रेडिंग को लेकर भी कड़े प्रावधान किए गए हैं। स्टॉक एक्सचेंजों को अब डेरिवेटिव ट्रेडिंग के लिए मान्यता प्राप्त प्लेटफॉर्म बनने के लिए सेबी की मंजूरी लेनी होगी। साथ ही उन्हें हर लेनदेन का विस्तृत रिकॉर्ड रखना होगा, जिसमें ग्राहक का पैन और विशिष्ट पहचान संख्या भी शामिल होगी।
इतना ही नहीं, एक्सचेंजों को
- ट्रेडिंग गतिविधियों का मासिक डेटा टैक्स विभाग को भेजना होगा
- सभी लेनदेन का ऑडिट ट्रेल कम से कम सात साल तक सुरक्षित रखना होगा
कैपिटल गेन की गणना भी स्पष्ट
सरकार ने नए नियमों में यह भी साफ कर दिया है कि किसी संपत्ति से होने वाला लाभ अल्पकालिक (Short Term) है या दीर्घकालिक (Long Term), यह तय करने के लिए होल्डिंग अवधि कैसे गिनी जाएगी।
इसके अलावा आय घोषणा योजना 2016 के तहत घोषित परिसंपत्तियों पर टैक्स के नियम भी अलग-अलग श्रेणियों के आधार पर स्पष्ट किए गए हैं।
यदि किसी परिसंपत्ति से जुड़ा लाभ अल्पकालिक संपत्ति या स्व-निर्मित संपत्ति से जुड़ा है, तो उसे शॉर्ट टर्म माना जाएगा, जबकि अन्य मामलों में उसे संपत्ति की प्रकृति के आधार पर लॉन्ग टर्म के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा।
कुल मिलाकर सरकार इन नए नियमों के जरिए टैक्स सिस्टम को ज्यादा डिजिटल, पारदर्शी और ट्रैक करने योग्य बनाना चाहती है, ताकि टैक्स अनुपालन बेहतर हो और अनियमितताओं पर नजर रखी जा सके।
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