30 की उम्र में ही हड्डियां हो रहीं खोखली | ये आदतें चुपचाप शरीर को बना रही हैं ‘फ्रैक्चर मशीन’

कम उम्र में कमजोर होती हड्डियां बन सकती हैं बड़ा खतरा। जानिए कौन-सी 5 खराब आदतें हड्डियों को खोखला बना रही हैं और कैल्शियम, विटामिन D, डाइट व एक्सरसाइज से कैसे रखें बोन हेल्थ मजबूत।

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आज की भागदौड़ वाली लाइफ में लोग फिट दिखने की कोशिश तो खूब कर रहे हैं, लेकिन शरीर की असली नींव यानी हड्डियां अंदर ही अंदर कमजोर होती जा रही हैं। हालत ये है कि अब सिर्फ बुज़ुर्ग ही नहीं, कम उम्र के लोग भी मामूली फिसलन या हल्की चोट में फ्रैक्चर का शिकार हो रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक इसकी सबसे बड़ी वजह हमारी रोज़मर्रा की खराब आदतें हैं, जो धीरे-धीरे शरीर से कैल्शियम चूस रही हैं।

सबसे बड़ा हमला हमारी प्लेट और ग्लास से हो रहा है। ज़्यादा नमक, कोल्ड ड्रिंक्स, सोडा और प्रोसेस्ड फूड हड्डियों के दुश्मन बन चुके हैं। शरीर अतिरिक्त नमक को बाहर निकालते वक्त कैल्शियम भी पेशाब के जरिए बाहर फेंक देता है। दूसरी तरफ सॉफ्ट ड्रिंक्स में मौजूद फॉस्फोरिक एसिड और भारी मात्रा में शुगर शरीर का कैल्शियम बैलेंस बिगाड़ देते हैं। नतीजा—हड्डियां अंदर से खोखली होने लगती हैं।

शराब और स्मोकिंग इस खतरे को कई गुना बढ़ा देते हैं। लगातार शराब पीने से शरीर कैल्शियम और विटामिन D को ठीक से इस्तेमाल नहीं कर पाता। इससे ऑस्टियोपोरोसिस यानी हड्डियों के कमजोर और खोखले होने का खतरा तेजी से बढ़ता है। वहीं सिगरेट और तंबाकू हड्डियों तक पहुंचने वाले खून के फ्लो को कम कर देते हैं, जिससे रिकवरी स्लो हो जाती है और फ्रैक्चर जल्दी होने लगता है।

फास्ट फूड का बढ़ता क्रेज भी शरीर को भारी पड़ रहा है। चिप्स, प्रोसेस्ड मीट और पैकेट वाले जंक फूड शरीर में सूजन बढ़ाते हैं। यही सूजन धीरे-धीरे हड्डियों की ताकत को खा जाती है। बाहर से सब कुछ सामान्य दिखता है, लेकिन अंदर बोन डेंसिटी गिरने लगती है।

आखिर हड्डियों को ताकत कैसे मिले?

विशेषज्ञ मानते हैं कि मजबूत हड्डियों का सबसे बड़ा हथियार है—कैल्शियम, विटामिन D और एक्टिव लाइफस्टाइल। दूध, दही, पनीर और रागी कैल्शियम के बेहतरीन स्रोत हैं। वहीं धूप शरीर में विटामिन D बनाने का सबसे आसान तरीका है, जो कैल्शियम को शरीर में सही तरीके से एब्जॉर्ब करने में मदद करता है।

हरी सब्जियां जैसे पालक, मेथी और ब्रॉकली भी हड्डियों के लिए बेहद फायदेमंद मानी जाती हैं। इनमें कैल्शियम, मैग्नीशियम और विटामिन K भरपूर मात्रा में होता है। इसके अलावा दाल, अंडा, मछली और मीट जैसी प्रोटीन वाली चीजें मांसपेशियों को मजबूत बनाती हैं, जिससे हड्डियों को सपोर्ट मिलता है।

सिर्फ डाइट नहीं, चलना-फिरना भी ज़रूरी

जो लोग घंटों कुर्सी पर बैठे रहते हैं, उनमें हड्डियों की कमजोरी का खतरा ज्यादा देखा जा रहा है। रोजाना वॉकिंग, हल्की एक्सरसाइज़ और फिजिकल एक्टिविटी हड्डियों पर सही दबाव डालती है, जिससे उनकी ताकत बढ़ती है। शरीर जितना एक्टिव रहेगा, बोन लॉस का खतरा उतना कम होगा।

कब पड़ती है कैल्शियम सप्लीमेंट की ज़रूरत?

डॉक्टरों के मुताबिक बुज़ुर्गों, मेनोपॉज़ के बाद महिलाओं और प्रेग्नेंट महिलाओं में अक्सर कैल्शियम की कमी देखी जाती है। कई बार डाइट से पर्याप्त कैल्शियम नहीं मिल पाता या शरीर उसे सही तरह पचा नहीं पाता। ऐसे मामलों में डॉक्टर सप्लीमेंट की सलाह देते हैं। लेकिन बिना सलाह के सप्लीमेंट लेना भी नुकसानदायक हो सकता है।

चुपचाप कमजोर होती हैं हड्डियां, ऐसे पहचानें खतरा

कमजोर हड्डियों की सबसे डरावनी बात ये है कि शुरुआत में कोई बड़ा लक्षण दिखाई नहीं देता। कई लोगों को इसका पता तब चलता है, जब मामूली चोट में कलाई, कमर या कूल्हे की हड्डी टूट जाती है। खासकर बुज़ुर्ग महिलाओं में यह खतरा ज्यादा रहता है।

डॉक्टर विटामिन D की कमी पता करने के लिए ब्लड टेस्ट करवाते हैं। वहीं हड्डियों की असली स्थिति जानने के लिए बोन डेंसिटोमेट्री यानी DEXA स्कैन किया जाता है। इसमें T-स्कोर के जरिए पता चलता है कि हड्डियां कितनी मजबूत हैं। समय रहते जांच हो जाए तो हड्डियों को टूटने और और ज्यादा कमजोर होने से बचाया जा सकता है।

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