लेजेंडरी सिंगर आशा भोसले (Asha Bhosle) का 92 साल की उम्र में निधन, बॉलीवुड में शोक की लहर। जानिए उनके करियर, सुपरहिट गानों और अविस्मरणीय सफर की पूरी कहानी।
मुम्बई
मुंबई की उस सुबह में कुछ टूट गया… रेडियो की दुनिया, रिकॉर्डिंग स्टूडियो और लाखों दिलों की धड़कनों में बसी आवाज अब हमेशा के लिए थम गई। बॉलीवुड की लेजेंडरी सिंगर आशा भोसले ने 92 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया।
11 अप्रैल को तबीयत बिगड़ने पर उन्हें मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। चेस्ट इंफेक्शन और लगातार थकान ने उनके शरीर को कमजोर कर दिया था… लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि ये जंग इतनी जल्दी खत्म हो जाएगी।
जब हर दौर में गूंजा ‘आशा’ का जादू
40 के दशक में शुरू हुआ उनका सफर सिर्फ एक करियर नहीं था—वो एक दौर था, एक अहसास था। मंगेशकर परिवार की इस बेटी ने अपनी बड़ी बहन लता मंगेशकर की छाया से निकलकर अपनी अलग पहचान बनाई… और फिर वो पहचान इतनी बड़ी हो गई कि खुद इतिहास बन गई।
शुरुआत आसान नहीं थी। छोटी फिल्मों से लेकर संघर्ष तक… लेकिन 1957 में आई फिल्म नया दौर ने सब बदल दिया। ओ पी नय्यर के संगीत और मोहम्मद रफी के साथ उनकी जोड़ी ने ऐसे गीत दिए, जो आज भी हर पीढ़ी की जुबान पर हैं—
“मांग के साथ तुम्हारा”, “साथी हाथ बढ़ाना”, “उड़े जब-जब जुल्फें तेरी”…
चुनौती से बना इतिहास
फिल्म तीसरी मंजिल का गाना ‘आजा आजा’… शुरुआत में उन्हें खुद पर शक था। वेस्टर्न बीट पर गाना? मुश्किल लगा। लेकिन आर डी बर्मन के साथ 10 दिन की मेहनत ने इस गाने को अमर बना दिया।
इसके बाद तो जैसे हर पार्टी, हर महफिल में आशा की आवाज ही गूंजती रही—
“पिया तू अब तो आजा”, “ये मेरा दिल”, “ओ हसीना जुल्फों वाली”…
जब आवाज ने गजल में भी जादू किया
1981 में फिल्म उमराव जान आई… और आशा भोसले ने खुद को फिर से साबित कर दिया।
“दिल चीज क्या है”, “इन आंखों की मस्ती”…
इन गजलों ने उन्हें पहला नेशनल अवॉर्ड दिलाया।
फिर इजाजत का “मेरा कुछ सामान”… दूसरा नेशनल अवॉर्ड लेकर आया।
आशा भोसले ने अपने करियर में 14 से अधिक भाषाओं में 12,000 से ज्यादा गाने गाए। उनके गाने ‘इन आंखों की मस्ती’, ‘दम मारो दम’, ‘पिया तू अब तो आजा’ और ‘चुरा लिया है तुमने’ आज भी सदाबहार हैं।
आशा भोसले मशहूर थिएटर एक्टर और क्लासिकल सिंगर दीनानाथ मंगेशकर की बेटी और लता मंगेशकर की छोटी बहन थीं। जब वो सिर्फ 9 साल की थीं तब उनके पिता का निधन हो गया था, जिसकी वजह से उन्होंने बहन लता मंगेशकर के साथ मिलकर परिवार को सपोर्ट करने के लिए सिंगिंग शुरू कर दी थी।
उम्र सिर्फ नंबर… सुर हमेशा जवान
62 साल की उम्र में फिल्म रंगीला में “तन्हा तन्हा” और “रंगीला रे”… फिर 2000 के दशक में लगान का “राधा कैसे न जले”—हर दौर में उन्होंने खुद को नया किया।
79 साल की उम्र में फिल्म माई से एक्टिंग डेब्यू… और 90 पार करने के बाद भी स्टेज पर वही ऊर्जा! जनवरी 2025 में दुबई कॉन्सर्ट में उन्होंने करण औजला के गाने “तौबा तौबा” पर परफॉर्म कर साबित कर दिया था—
“आशा ताई” सिर्फ एक नाम नहीं… एक जज्बा हैं।
आवाज जो कभी नहीं मिटेगी
20 से ज्यादा भाषाओं में हजारों गाने… गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज नाम… और करोड़ों दिलों में बसी यादें।
आज भले ही आवाज थम गई हो…
लेकिन सच ये है—
आशा भोसले कभी नहीं जाएंगी… वो हर गाने में, हर धुन में हमेशा जिंदा रहेंगी।
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