RGHS में करीब दो महीने से लाभार्थियों को दवाइयां नहीं देने वाली 215 निजी फार्मेसियों का TMS अस्थायी रूप से बंद किया गया है। जयपुर की 39 फार्मेसियां भी कार्रवाई की जद में हैं।
जयपुर। आरजीएचएस लाभार्थियों को दवाइयां नहीं देने वाली फार्मेसियों पर सरकार ने अब सख्ती दिखाई है। करीब दो महीने से योजना के तहत काम नहीं करने और लाभार्थियों को दवाइयां उपलब्ध नहीं कराने वाली 215 निजी फार्मेसियों का टीएमएस अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। इनमें अकेले जयपुर की 39 फार्मेसियां शामिल हैं। यानी जिन फार्मेसियों से आरजीएचएस लाभार्थियों को दवाइयां मिलनी थीं, वहीं लंबे समय तक दवा वितरण में लापरवाही सामने आने के बाद अब उनके सिस्टम पर ही रोक लगा दी गई है।
नोटिस का जवाब नहीं दिया या जवाब संतोषजनक नहीं मिला, तो बंद हुआ टीएमएस
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक आरजीएचएस की दवा वितरण व्यवस्था की लगातार निगरानी की जा रही थी। लंबे समय से दवा उपलब्ध नहीं कराने वाली फार्मेसियों को पहले अपनी स्थिति स्पष्ट करने का मौका दिया गया। लेकिन कई फार्मेसियों के जवाब संतोषजनक नहीं मिले। कुछ ने तो कारण बताओ नोटिस का जवाब तक नहीं दिया। इसके बाद विभाग ने संबंधित फार्मेसियों का टीएमएस अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया। सरकार का कहना है कि कार्रवाई का मकसद सिर्फ फार्मेसियों पर रोक लगाना नहीं, बल्कि आरजीएचएस के तहत दवा वितरण व्यवस्था में अनुशासन कायम करना है।
जयपुर सबसे आगे, इन जिलों में भी हुई कार्रवाई
215 फार्मेसियों पर हुई कार्रवाई में जयपुर सबसे ऊपर है। यहां 39 फार्मेसियों का टीएमएस बंद किया गया है। इसके बाद अलवर और सीकर में 20-20 फार्मेसियों पर कार्रवाई हुई। भरतपुर, चूरू और दौसा में 10-10, अजमेर में 9, जबकि झुंझुनूं और श्रीगंगानगर में 8-8 फार्मेसियां कार्रवाई की जद में आई हैं।
जोधपुर और कोटा में 7-7, हनुमानगढ़ और पाली में 6-6 तथा बारां और कोटपूतली-बहरोड़ में 5-5 फार्मेसियों का टीएमएस अस्थायी रूप से बंद किया गया।
डीग, खैरथल-तिजारा और टोंक में 4-4, डीडवाना-कुचामन, नागौर और उदयपुर में 3-3 फार्मेसियों पर कार्रवाई की गई है। ब्यावर, भीलवाड़ा, बूंदी, चित्तौड़गढ़, धौलपुर, जैसलमेर, जालोर और करौली में 2-2 फार्मेसियां कार्रवाई की सूची में हैं।
इसके अलावा बालोतरा, बाड़मेर, बीकानेर, झालावाड़, सवाई माधोपुर और सिरोही में एक-एक फार्मेसी का टीएमएस बंद किया गया है। राजस्थान से बाहर दिल्ली और गुरुग्राम की एक-एक फार्मेसी पर भी कार्रवाई हुई है।
अब सिर्फ टीएमएस बंद करने तक मामला सीमित नहीं
विभाग ने साफ किया है कि यह कार्रवाई अंतिम फैसला नहीं है। संबंधित फार्मेसियों से मिले स्पष्टीकरण और उपलब्ध रिकॉर्ड की जांच की जाएगी। इसके बाद नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई तय होगी।
आरजीएचएस का उद्देश्य पात्र लाभार्थियों को आवश्यक दवाइयां समय पर उपलब्ध कराना है। ऐसे में दवा वितरण में देरी या लापरवाही को लेकर विभाग ने अपना रुख सख्त कर दिया है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि रिकॉर्ड की जांच के बाद इन 215 फार्मेसियों में से कितनों को दोबारा योजना से जोड़ा जाता है और कितनों पर इससे भी कड़ी कार्रवाई होती है।
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