राजस्थान के सेवानिवृत्त समायोजित शिक्षक-कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर अनुदानित संस्थाओं का सेवाकाल जोड़ते हुए पुरानी पेंशन का पूरा लाभ देने की मांग की।
जयपुर। राजस्थान में सेवानिवृत्त समायोजित शिक्षक-कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन को लेकर एक बार फिर सरकार का दरवाजा खटखटाया है। मंच ने विधानसभा अध्यक्ष प्रो. वासुदेव देवनानी और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र भेजकर मांग की है कि अनुदानित संस्थाओं में की गई सेवा को भी जोड़ते हुए 64 से 74 वर्ष आयु के बुजुर्ग शिक्षाकर्मियों को पुरानी पेंशन का पूरा लाभ दिया जाए।
मंच के मुख्य संचालक विजय उपाध्याय ने कहा कि राज्य सरकार 15 जुलाई को छह या उससे अधिक बार विधायक रहे जनप्रतिनिधियों का सम्मान करने जा रही है, जो सराहनीय पहल है। लेकिन दूसरी ओर ऐसे शिक्षाकर्मी, जिन्होंने 30 वर्ष से अधिक समय तक शिक्षा के क्षेत्र में सेवाएं दीं, आज महज 2 से 4 हजार रुपये मासिक पेंशन पर जीवन बिताने को मजबूर हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह उनके योगदान का सम्मान है या अपमान?
विजय उपाध्याय और मंच के संचालक डी.पी. ओझा ने संयुक्त बयान में कहा कि शिक्षाकर्मियों ने दशकों तक विद्यार्थियों को वैज्ञानिक, चिकित्सक, इंजीनियर, आईएएस, आरएएस, जनप्रतिनिधि और विभिन्न क्षेत्रों के सफल नागरिक बनने की प्रेरणा दी। राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका निभाने वाले इन शिक्षाकर्मियों को आज बुढ़ापे में आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।
मंच का कहना है कि यदि अनुदानित संस्थाओं में की गई सेवा अवधि को पेंशन गणना में शामिल कर पुरानी पेंशन का लाभ दिया जाए, तो हजारों सेवानिवृत्त शिक्षाकर्मियों को राहत मिल सकती है। इसी मांग को लेकर सरकार से शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने का आग्रह किया गया है।
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