कविता
सीए विनय गर्ग
रिश्ता नाम समर्पण का,
तो श्रद्धा नाम है अर्पण का।
साथ ये चलते जीवन भर,
तो भाव है बनता तर्पण का ll
कोई लाख दिखाए रिश्तों को,
नीयत तो पता चल जाती है।
चाहे मुँह पर मीठे बोल रखो,
सीरत तो पता चल जाती है।।
मैं कितना भी धीरज धर लूँ,
मन को निर्मल नीरज कर लूँ।
ये बात जो घात यूँ देती हैं,
कैसे मन में धीरज धर लूँ।।=2
ये भी पढ़ें
- Haryana News: गश्त पर निकली पुलिस टीम पर काल का वार… टैंकर से टकराई ERV, दो हेड कॉन्स्टेबल की मौत
- भरतपुर में फ्लाईओवर निर्माण से ठप पड़ा कारोबार, व्यापारियों की दो टूक- ‘दुकानों में ग्राहक नहीं, अब आंदोलन ही आखिरी रास्ता’
- ऊंट संरक्षण योजना में रिश्वत का खेल! ACB ने डॉक्टर और पशुधन निरीक्षक को रंगे हाथों दबोचा
- जयपुर क्लब में खूनी बर्थडे पार्टी, भरतपुर ओपन जेल से भागे कैदियों ने चाकू से गोदकर दोस्त को उतारा मौत के घाट | लड़की को थप्पड़ पड़ते ही भड़का विवाद
- भोमियाजी के दर्शन से लौट रही SUV पर काल का कहर, 5 दोस्तों की मौत, एक ही गांव में पसरा मातम
