अभी तक तो मैंने आदमखोर शेर का नाम ही सुना था। लेकिन अब तो देख लिया ऐसे लोगों को जो जानवर जैसे ही नज़र आते हैं।
क्योंकि सांप से डसना सीख लिया और जहर उगलना भी। क्रूरता में तो उसके सामने भेड़िए भी शरमाते हैं। और चालाकी में उसने लोमड़ी के कान काटे हैं।
बगुला भगत बनने की तो बस होड़ ही लगी है। कुर्सी के लिए हर जगह जोड़ – तोड़ ही लगी है। रंग बदलने में गिरगिट से होड़ लगाते हैं। मुझे तो अब आदमी भी खूंखार जानवर ही नजर आते हैं।
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