नई दिल्ली
देश के रियल एस्टेट (Real estate) और बैंकिंग सिस्टम में सालों से पल रही गठजोड़ की गंदगी पर अब सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का चाबुक चला है। जिस सबवेंशन स्कीम (Subvention scheme) को लोन सुविधा की तरह पेश किया गया, उसमें हजारों करोड़ की सांठगांठ, भ्रष्टाचार और घोटाले की परतें अब खुलने जा रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई (CBI) को सीधी जांच के आदेश देते हुए कहा है कि बिल्डर-बैंकर के इस नेक्सस को बेनकाब किया जाए। कोर्ट की सख्ती का मतलब साफ है— अब सिर्फ फाइलें नहीं उलटेंगी, चेहरों से नकाब भी उतरेंगे। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद बिल्डर और बैंक अगर गुनाहगार हैं, तो उनका नाम भी उजागर होगा और नतीजा भी तय होगा। यह सिर्फ एक जांच नहीं, एक मिसाल बनने जा रही है।
सात जांचें, पर एक ही मंशा: घोटाले का पर्दाफाश
सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को सात स्वतंत्र शुरुआती जांच करने का आदेश दिया है। इसका मकसद है, उन हाउसिंग प्रोजेक्ट्स और बैंकों (Bank) की भूमिका की पड़ताल करना, जो सबवेंशन स्कीम के नाम पर आम जनता से खेलते रहे। इनमें मुख्य रूप से सुपरटेक जैसे बड़े बिल्डरों के प्रोजेक्ट्स और उन्हें करोड़ों के लोन देने वाले बैंकों की भूमिका शामिल है।
सबवेंशन स्कीम क्या है? लोन में राहत या धोखे की चाल?
सबवेंशन स्कीम एक ऐसी होम लोन (Home loan) योजना होती है जिसमें मकान खरीदार को लोन की EMI शुरू में नहीं चुकानी पड़ती, बल्कि कुछ निश्चित समय तक वह बिल्डर द्वारा दी जाती है। इस दौरान बैंक को लगता है कि सब ठीक है, खरीदार को लगता है कि बोझ हल्का है, लेकिन असल में बिल्डर और बैंक के बीच छिपी मिलीभगत से लोन पास होता है—even फर्जी बुकिंग, फर्जी प्रोजेक्ट या अधूरी कंस्ट्रक्शन पर भी। कई बार ये स्कीमें लुभावनी पेश कर खरीदारों को फंसा देती हैं, और जब प्रोजेक्ट फेल होता है, तो न घर मिलता है, न राहत—सिर्फ कर्ज और धोखा बचता है।
एनसीआर से बाहर भी फैला घोटाले का जाल
सीबीआई की जांच सिर्फ एनसीआर तक सीमित नहीं होगी। नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यमुना एक्सप्रेसवे, गाजियाबाद और गुरुग्राम जैसे हाई-रिस्क जोन के अलावा अन्य राज्यों के प्रोजेक्ट्स को भी जांच में शामिल किया जाएगा।
SIT का गठन, पुलिस से लेकर चार्टर्ड अकाउंटेंट तक होंगे शामिल
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाई जाए जिसमें यूपी और हरियाणा पुलिस, ICAI के तीन सीए, और आवास मंत्रालय व आरबीआई के नोडल अधिकारी हों। SIT को एक महीने में पहली अंतरिम रिपोर्ट देनी होगी।
कोर्ट की चेतावनी: हर महीने होगी मॉनिटरिंग, अब बचने की नहीं गुंजाइश
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि जांच की निगरानी हर महीने की जाएगी, ताकि मामला ठंडे बस्ते में न चला जाए। बिल्डरों और बैंकों की मिलीभगत को जड़ से उखाड़ना अब सर्वोच्च अदालत की प्राथमिकता है।
नई हवा की खबरें अपने मोबाइल पर नियमित और डायरेक्ट प्राप्त करने के लिए व्हाट्सएप नंबर 9460426838 सेव करें और ‘Hi’ और अपना नाम, स्टेट और सिटी लिखकर मैसेज करें। आप अपनी खबर या रचना भी इस नंबर पर भेज सकते हैं।
फैसला लिखने लायक भी नहीं निकले जज साहब! | हाईकोर्ट ने तीन महीने की ट्रेनिंग पर भेजा
नई हवा’ की खबरें नियमित और अपने मोबाइल पर डायरेक्ट प्राप्त करने के लिए व्हाट्सएप नंबर 9460426838 सेव करें और ‘Hi’ और अपना नाम, स्टेट और सिटी लिखकर मैसेज करें
