सैलरीड कर्मचारियों के लिए HRA क्लेम के नियमों में बड़ा बदलाव प्रस्तावित है। CBDT के ड्राफ्ट इनकम टैक्स रूल्स 2026 के तहत HRA प्रक्रिया में नई सख्ती और डेटा आधारित जांच की तैयारी है, जिससे परिवार को किराया देने वालों पर खास असर पड़ सकता है।
नई दिल्ली
सैलरी पाने वाले कर्मचारियों के लिए हाउस रेंट अलाउंस (HRA) अब सिर्फ रेंट रसीद और PAN तक सीमित नहीं रहेगा। नए आयकर ढांचे की तैयारी के बीच केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने ड्राफ्ट इनकम-टैक्स रूल्स 2026 में बड़ा प्रस्ताव रखा है—अब HRA डिक्लेरेशन फॉर्म में यह भी बताना होगा कि जिस मकान मालिक को किराया दे रहे हैं, उससे आपका रिश्ता क्या है।
अप्रैल 2026 से नया टैक्स फ्रेमवर्क लागू करने की तैयारी है और इसी के साथ HRA क्लेम की जांच का दायरा भी तकनीकी रूप से और सख्त होने जा रहा है।
अब सिर्फ रसीद नहीं, ‘रिलेशनशिप कॉलम’ भी
अब तक कर्मचारी रेंट रसीद देते थे और तय सीमा से अधिक सालाना किराया होने पर मकान मालिक का PAN साझा करते थे। अगर किराया बैंक के जरिए गया और मकान मालिक ने अपनी ITR में वह आय दिखाई, तो दावा सामान्यतः स्वीकार हो जाता था। लेकिन अब फॉर्म में ‘रिलेशनशिप’ का कॉलम जुड़ने से विभाग के पास डेटा एनालिटिक्स के जरिए ऐसे मामलों को ट्रैक करने का सीधा आधार होगा।
यानी—
- किराया किसे दिया?
- वह आपके माता-पिता, ससुराल पक्ष या कोई अन्य रिश्तेदार तो नहीं?
- मकान मालिक ने अपनी ITR और AIS में वह आय दिखाई या नहीं?
- संपत्ति वास्तव में उसी के नाम है या नहीं?
- भुगतान बैंकिंग चैनल से हुआ या नकद?
इन सबका डिजिटल मिलान पहले से कहीं ज्यादा आसान हो जाएगा।
फर्जी इंतजाम पर नकेल, असली व्यवस्था को राहत
टैक्स विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम उन मामलों को चिन्हित करने के लिए है जहां केवल कागजों पर किराया दिखाकर HRA का फायदा लिया जाता है।
हालांकि नियम साफ करते हैं कि अगर व्यवस्था वास्तविक है तो माता-पिता या अन्य करीबी रिश्तेदार को दिया गया किराया भी वैध रहेगा। लेकिन अब सबूत मजबूत रखने होंगे—साफ रेंट एग्रीमेंट, बैंक ट्रांसफर, संपत्ति के दस्तावेज और मकान मालिक की रिटर्न में किराये की आय का उल्लेख अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करना होगा।
TDS और भारी पेनल्टी का खतरा
अगर किराया तय सीमा से अधिक है तो Section 194-I के तहत TDS काटना पड़ सकता है। ऐसा न करने पर पेनल्टी का जोखिम रहेगा। गलत जानकारी देने या आय छिपाने की स्थिति में Section 270A के तहत 200% तक जुर्माना भी लगाया जा सकता है। यानी HRA क्लेम अब “रूटीन प्रक्रिया” नहीं, बल्कि पूरी तरह डेटा-आधारित जांच के दायरे में होगा।
पारदर्शिता बनाम परेशानी?
सरकार का मकसद सिस्टम को पारदर्शी और टेक्नोलॉजी-ड्रिवन बनाना है। लेकिन टैक्स सलाहकार यह भी मानते हैं कि अंतिम नियम आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि इससे ईमानदार करदाताओं पर अनावश्यक विवाद बढ़ेंगे या नहीं। फिलहाल ड्राफ्ट नियमों पर सुझाव मांगे गए हैं। तस्वीर पूरी तरह तब साफ होगी जब अंतिम अधिसूचना जारी होगी।
तब तक एक बात साफ है—HRA क्लेम करते समय अब ‘किराया कितना’ के साथ ‘किराया किसे’ भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा।
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