भरतपुर के खडेरा गांव में बीडीए की लैण्ड पूलिंग योजना पर आयोजित जनसुनवाई में किसानों ने बहुफसली कृषि भूमि देने से इनकार कर दिया। इन्द्रजीत भारद्वाज ने योजना की वैधानिकता, मुआवजे और राजपत्र पर सवाल उठाए, जबकि नगर नियोजक मुकेश जांगिड ने किसानों को योजना का पक्ष समझाया।
भरतपुर। भरतपुर विकास प्राधिकरण (बीडीए) की प्रस्तावित लैण्ड पूलिंग योजना (एलपीएस) को लेकर गांव खडेरा में आयोजित जनसुनवाई के दौरान किसानों और अधिकारियों के बीच लंबी बहस हुई। किसानों ने अपनी बहुफसली सिंचित कृषि भूमि को योजना में शामिल करने से साफ इनकार कर दिया और कहा कि जब तक उनकी शंकाओं का संतोषजनक समाधान नहीं होता, तब तक वे अपनी जमीन देने के लिए तैयार नहीं हैं।
अनुशासनहीन अधिकारियों पर सख्त हुई सरकार, 19 विभागीय मामलों में लिए बड़े फैसले
अटल सेवा केंद्र में हुई इस जनसुनवाई में बीडीए के नगर नियोजक मुकेश जांगिड ने किसानों को योजना की जानकारी देते हुए बताया कि एलपीएस के तहत किसानों को 45 से 55 प्रतिशत विकसित भूमि वापस दी जाएगी, जबकि शेष 55 प्रतिशत भूमि सड़क, सीवरेज, पार्क, सार्वजनिक सुविधाओं और अन्य आधारभूत ढांचे के विकास के लिए प्राधिकरण के पास रहेगी। उन्होंने कहा कि यह योजना ‘नो प्रॉफिट-नो लॉस’ के सिद्धांत पर आधारित है और किसानों को चकबंदी के बाद विकसित भूखंड उपलब्ध कराए जाएंगे।
किसानों ने उठाए कई कानूनी और मुआवजे से जुड़े सवाल
जनसुनवाई के दौरान किसानों की ओर से पूर्व नगर निगम प्रतिपक्ष नेता इन्द्रजीत भारद्वाज ने कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि एलपीएस में प्रस्तावित आवासीय भूमि का मास्टर प्लान और जोनल डेवलपमेंट प्लान में क्या दर्ज है तथा जिन क्षेत्रों को योजना में शामिल किया गया है, वहां आवासीय योजना किस कानूनी आधार पर लागू की जा रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि योजना में शामिल कुछ क्षेत्र ऐसे हैं जो रीजनल पार्क, वन विभाग, वेटरिनरी एरिया, जलदाय विभाग, चम्बल लाइन परियोजना कार्यालय, मंदिर, बगीची, नाले, चारागाह, प्रतिबंधित पीडब्ल्यूडी सड़क तथा इको-सेंसिटिव जोन जैसी श्रेणियों से जुड़े हैं। ऐसे में योजना की वैधानिक स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।
राजपत्र, सीमांकन और मुआवजे पर भी उठे सवाल
इन्द्रजीत भारद्वाज ने 12 मार्च 2026 को जारी राजपत्र का हवाला देते हुए कहा कि एलपीएस की अधिसूचित सीमा और विभिन्न नियमों के बीच विसंगतियां दिखाई देती हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि किसानों को मिलने वाले भूखंड का प्रतिशत, कन्वर्जन चार्ज, विकसित भूमि शुल्क, लीज शुल्क और मुआवजे का पूरा ढांचा सार्वजनिक किया जाना चाहिए ताकि किसानों के सामने पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सके।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भूमि चिन्हांकन (डिमार्केशन) कार्यालय में बैठकर किया गया, जबकि मौके पर वास्तविक सत्यापन नहीं हुआ। उनका कहना था कि योजना में ऐसे कई खसरा नंबर भी शामिल बताए गए हैं, जो मौके पर उपलब्ध ही नहीं हैं।
‘मुआवजा तय किए बिना जमीन नहीं देंगे’
किसानों ने कहा कि जब तक मुआवजे की नीति पूरी तरह स्पष्ट नहीं होगी और भुगतान की व्यवस्था सामने नहीं आएगी, तब तक भूमि देने का कोई औचित्य नहीं है। उनका कहना था कि वर्षों गुजरने के बावजूद पूर्व की योजनाओं में किसानों को कई मामलों में राहत नहीं मिल सकी है, इसलिए इस बार वे पूरी स्पष्टता चाहते हैं।
बैठक में मौजूद भूखंडधारकों ने भी अपना पक्ष रखते हुए कहा कि शहरी शिविर-2026 के तहत सुमोटो नक्शों का नियमानुसार निस्तारण कराया जाए, ताकि भविष्य में भूखंडधारियों और किसानों के बीच मुआवजे अथवा स्वामित्व को लेकर कानूनी विवाद पैदा न हों।
‘भू-माफिया’ जैसे शब्दों पर किसानों ने जताई नाराजगी
बैठक के दौरान किसान महावीर झीलरा ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि किसानों के लिए भविष्य में किसी भी प्रकार के अपमानजनक शब्दों, विशेषकर “भू-माफिया” जैसे संबोधनों का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए। किसानों का कहना था कि वे पीढ़ियों से खेती कर रहे हैं और उनका सम्मान बनाए रखा जाना चाहिए।
जनसुनवाई में मौजूद किसानों ने हाथ उठाकर एलपीएस के प्रति अपनी असहमति दर्ज कराई और एक ज्ञापन बीडीए के नगर नियोजक मुकेश जांगिड को सौंपा। किसानों ने मांग की कि योजना पर पुनर्विचार किया जाए और कृषि भूमि से जुड़े उनके अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।
अधिकारियों का जवाब
बीडीए के नगर नियोजक मुकेश जांगिड ने कहा कि एलपीएस के तहत किसी प्रकार का अनापत्ति प्रमाण-पत्र (एनओसी) लेने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसानों के सुझावों के आधार पर योजना की समीक्षा की जाएगी और भविष्य में फिर से किसानों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श आयोजित किया जाएगा।
ये लोग रहे मौजूद
जनसुनवाई में किसानों की ओर से अमर सिंह, भगवान सिंह, वीरपाल, पं. हजारी, रामवीर, अर्जुन योगी, सुरेश, योगेश, सोहनलाल, सुंदर, विशन जाटव, अजय सिंह सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
नई हवा खबरें अपने मोबाइल पर नियमित और डायरेक्ट प्राप्त करने के लिए व्हाट्सएप नंबर 9460426838 सेव करें और ‘Hi’ और अपना नाम, स्टेट और सिटी लिखकर मैसेज करें। आप अपनी खबर या रचना भी इस नंबर पर भेज सकते हैं।
