डॉ. शिखा अग्रवाल, सेवानिवृत्त सहआचार्य (कॉलेज शिक्षा), सीकर
कुछ उधड़े रिश्ते सी लें कुछ याद पुरानी जी लें।
निष्फिक्र गांव- घर जाने मन लौटता बचपन में, कुछ दोस्त पुराने मिल लें कुछ मन की मस्ती कर लें
जहां खेले थे कभी कंचे उन गलियों में जा बैठें जम कर लड़ते थे जिनसे शिकवे उनसे कम कर लें
दादी की लठिया बन के मंदिर उनको पहुंचा दें फिर उन बूढ़ी दादी से आशीष अनेकों को ले लें
कुछ उधड़े रिश्ते सी लें कुछ याद पुरानी जी लें।
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