नई दिल्ली
केंद्रीय कर्मचारियों के लिए 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के गठन की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। यह वेतन आयोग कब तक गठन होगा, होगा भी या नहीं, इसका किसी को पता नहीं। पर चर्चाएं शुरू हो चुकी हैं। आपको बता दें कि पांच साल पहले 2016 में 7वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू की गई थीं। इसलिए अब 8वें वेतन आयोग के गठन के लिए माथापच्ची शुरू हो चुकी है। पर इसका गठन कब होगा और इसका स्वरूप क्या होगा, यह किसी को नहीं पता।
अपुष्ट सूचनाओं के अनुसार वेतन आयोग को लेकर दो अलग-अलग बातें सामने आ रही हैं। पहला- अब कोई नया वेतन आयोग का गठन नहीं होगा। दूसरा- नए फॉर्मूले से केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी हर साल तय होगी। इन दोनों ही मसलों पर सरकार की तरफ अधिकृत तौर पर कोई कुछ नहीं कह रहा। बस यही बात अभी छनकर सामने आ रही है कि अब वक्त है जब वेतन आयोग से अलग फॉर्मूले पर विचार हो। कॉस्ट ऑफ लिविंग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में उसे ध्यान में रखते हुए हर साल कर्मचारियों की सैलरी में इजाफा करना ज्यादा बेहतर है
7वें वेतन आयोग भी कर चुका है Aykroyd फॉर्मूला पर चर्चा
केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी में इजाफे को लेकर इस बार जिस फॉर्मूले की चर्चा है वो Aykroyd फॉर्मूला है। इस फॉर्मूले से कर्मचारियों की सैलरी को महंगाई, कॉस्ट ऑफ लिविंग और कर्मचारी की परफॉर्मेंस से जोड़ा जाएगा। इन सब चीजों के आंकलन के बाद ही सैलरी में इजाफा होगा। इससे सभी वर्ग के कर्मचारियों को फायदा होता दिखेगा। हालांकि, वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी का कहना है कि सुझाव अच्छा है, लेकिन अभी तक ऐसे किसी फॉर्मूले पर कोई विचार नहीं हुआ है। 8वां वेतन आयोग भी कब आएगा, आएगा भी या नहीं , इसकी भी कोई पता नहीं है।
सातवें वेतन आयोग में केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी बढ़ाने के लिए एक्राय्ड फॉर्मूले का इस्तेमाल किया गया था। एक्राय्ड फॉर्मूले के अनुसार सरकारी नौकरियों में न्यूनतम वेतन 18,000 रुपए प्रति माह निर्धारित करने की सिफारिश की गई है जबकि अधिकतम वेतन सबसे ऊंचे पे स्केल के लिए ₹2,25,000 प्रति माह और कैबिनेट सचिव और इसी ग्रेड पर के अन्य अधिकारियों के लिए ₹2,50,000 प्रति माह निर्धारित किया गया है। एक्राय्ड फॉर्मूले के अनुसार 7वां पे कमीशन अंतिम पे कमीशन होगा। इसके बाद कोई आठवां पे कमीशन नहीं बनाया जाएगा। सातवें वेतन आयोग का नेतृत्व कर रहे न्यायमूर्ति ए के माथुर ने कहा कि सरकार को वैल्यू इंडेक्स के आधार पर उपलब्ध आंकड़ों को देखते हुए हर साल केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के वेतन की समीक्षा करनी चाहिए। यदि इस बार सरकार 7th पे कमीशन की सिफारिशों के हिसाब से चलती है तो तय है कि 8th पे कमीशन का गठन नहीं होगा।
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किसने दिया था Aykroyd फॉर्मूला
यह फॉर्मूला वॉलेस रुडेल आयकरॉयड ने दिया था। उनका मानना था कि आम आदमी के लिए दो अहम चीजें हैं, भोजन और कपड़ा। इनकी कीमतों के बढ़ने के साथ ही कर्मचारियों की सैलरी में भी इजाफा होना चाहिए। जस्टिस माथुर ने सिफारिश में कहा था कि सरकार को प्राइस इंडेक्स के मुताबिक हर साल केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन की समीक्षा करनी चाहिए। ए के माथुर ने कहा कि वेतन मैट्रिक्स की दस साल की लंबी अवधि का इंतजार किए बिना समय- समय पर सरकारी कर्मचारियों की सैलरी की समीक्षा करी जा सकती है। माथुर ने यह भी कहा कि यदि सरकार चाहे तो हर साल कर्मचारियों की सैलरी की समीक्षा के लिए आयक्रोइड फॉर्मूले का इस्तेमाल कर सकती है। इस फॉर्मूले की खास बात यह है कि यह एक आम कर्मचारी से लेकर कैबिनेट सचिव की सैलरी का भी ध्यान रखता है।
1946 में में बना था पहला वेतन आयोग
भारत में बढ़ती महंगाई और उत्पादन साधनों की बढ़ती लागत को ध्यान में रखते हुए सरकार वर्ष 1946 से हर 10 वर्ष के अन्तराल पर पे कमीशन या वेतन आयोग का गठन करती आ रही है ताकि सरकारी कर्मचारी अपनी जरूरतों को पूरा करने से सफल हों और उनमें असंतोष ना फैले साथ ही भ्रष्टाचार को बढ़ावा ना मिले। भारत में पहले वेतन आयोग का गठन श्रीनिवास वरादाचरियर की अध्यक्षता में जनवरी, 1946 में किया गया था। वर्ष 1946 में गठित पहले वेतन आयोग (Pay Commission) में चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी का मूल वेतन 30 रुपए और तृतीय श्रेणी के कर्मचारी का मूल वेतन 60 रुपए निर्धारित किया गया था। भारत में अब तक 7 पे कमीशन बनाये जा चुके हैं और इसकी सिफारिशों को 1 जनवरी 2016 से लागू किया गया है।
