श्रीनगर
जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती को अगले आदेश तक के लिए घर में नजरबंद कर दिया गया है। घाटी में बढ़ती आतंकी घटनाओं और सुरक्षाबल के ताबड़तोड़ एनकाउंटर के बीच प्रशासन ने ये बड़ा फैसला किया है।
ये फैसला भी तब लिया गया है जब महबूबा मुफ्ती ने हाल ही में केंद्र पर बड़ा आरोप लगा दिया था कि ये कोई नहीं जानता कि घाटी में आतंकियों को मारा भी जा रहा है या नहीं। उन्होंने दावा कर दिया था कि सोमवार को हुए एनकाउंटर में तीन नागरिकों को मार दिया गया था। उन्होंने यहां तक कह दिया था कि घाटी में उग्रवाद के नाम पर आम नागरिकों को निशाना बनाया जा रहा है। इससे पहले भी जब घाटी में सुरक्षाबलों की संख्या बढ़ा दी गई थी, मुफ्ती ने इसकी निंदा की थी। उन्होंने कहा था कि सरकार सेना की उपस्थिति बढ़ा जम्मू-कश्मीर को छावनी में तब्दील करना चाहती है। उनके उस बयान पर सरकार ने कड़ा रुख अपनाया था।
इस बीच आज महबूबा मुफ्ती ने अपने जम्मू स्थित कार्यलय में एक रैली को संबोधित किया था। वहां पर उन्होंने अपना विरोध प्रदर्शन भी किया। उनके उस कार्यक्रम के दौरान कार्यकर्ताओं ने जोर-जोर से नारे लगाए थे कि कश्मीरियों का कत्लेआम बंद करो। खुद महबूबा भी इन नारों का समर्थन कर रही थीं और केंद्र पर कई गंभीर आरोप लगा रही थीं।
विवादित बयानों ने बढ़ाई मुफ्ती की मुसीबत
इससे पहले उस समय भी पीडीपी प्रमुख विवादों में थीं जब उन्होंने उन कश्मीरियों का समर्थन कर दिया था जिन्होंने टी20 वर्ल्ड कप में पाकिस्तान की जीत पर जश्न मनाया था। तब मुफ्ती ने एक ट्वीट कर लोगों को विराट कोहली से सीखने की नसीहत दे डाली थी। कह दिया था कि पाकिस्तान की जीत पर अगर जश्न मना तो इतना गुस्सा क्यों, इस देश में तो और भी कई तरह के नारे लगाए जाते हैं। बीजेपी ने उनके उस बयान को आड़े हाथों लिया था।
अब उन्हीं विवादित बयानों के बीच ये एक्शन लिया गया है और जम्मू-कश्मीर के उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने बड़ा संदेश भी दे दिया है। एक कार्यक्रम में मनोज सिन्हा ने कहा है कि कुछ लोग घाटी में माहौल खराब करने का काम करते हैं। उन्होंने सभी को आश्वासन दे दिया कि आने वाले दो सालों में घाटी को आतंक मुक्त कर दिया जाएगा।
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