अस्पतालों का खौफनाक खेल: ‘सिंगल-यूज़’ उपकरणों से हो रहा था इलाज, सरकार का चला हंटर

केंद्र सरकार ने देश भर के सभी अस्पतालों में सिंगल-यूज़ मेडिकल उपकरणों और सर्जिकल सामग्री के दोबारा इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। मरीजों की सुरक्षा और संक्रमण के खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह सख्त कदम उठाया है।

‘एक बार इस्तेमाल करो, फिर धोकर दोबारा चिपकाओ’—मरीजों की जान से हो रहे इस खतरनाक खिलवाड़ पर केंद्र सरकार ने आखिरकार कड़ा रुख अपना लिया है।

जानलेवा लापरवाही: क्या आपके साथ भी हुआ ऐसा?

क्या आपने कभी सोचा है कि जिस अस्पताल में आप अपनी जिंदगी बचाने जा रहे हैं, वहां आपके शरीर में इस्तेमाल होने वाला सर्जिकल सामान पहले भी किसी और पर इस्तेमाल हो चुका हो? जी हां! स्वास्थ्य मंत्रालय की हालिया रिपोर्ट ने जो खुलासा किया है, उसने होश उड़ा दिए हैं। देश के कई बड़े निजी और कॉरपोरेट अस्पताल पैसों की बचत के चक्कर में मरीजों की जान दांव पर लगा रहे थे।

इन गंभीर बीमारियों के इलाज में हो रहा था सबसे बड़ा खेल

यह लापरवाही कोई छोटी-मोटी चीज़ों में नहीं, बल्कि उन अति-संवेदनशील विभागों में चल रही थी जहां जरा सी चूक भी सीधे मौत को दावत देती है:

  • कार्डियोलॉजी (दिल की धड़कनों से जुड़ा मामला)

  • किडनी और डायलिसिस (खून साफ करने की प्रक्रिया)

  • कैंसर की सर्जरी

  • न्यूरोसर्जरी (दिमाग के ऑपरेशन)

  • हार्डकोर वैस्कुलर सर्जरी

इस्तेमाल के बाद री-साइकिल और जेब ढीली

अस्पतालों का यह खेल यहीं नहीं रुकता था। एक बार इस्तेमाल हो चुके डिस्पोजेबल उपकरणों को केमिकल से धोकर या स्टरलाइज करके दोबारा मरीजों पर इस्तेमाल किया जा रहा था। हद तो तब हो गई जब इन ‘कचरा बनने लायक’ उपकरणों की पूरी फ्रेश कीमत मरीजों के बिल में जोड़ी जा रही थी या फिर सरकार से मोटा क्लेम वसूला जा रहा था। यानी बीमारी भी आप झेलो और री-साइकिल कचरे के पैसे भी आप ही दो!

सीधा मौत का बुलावा: संक्रमण का महा-खतरा

विशेषज्ञों का कहना है कि सिंगल-यूज़ (Single-Use) उपकरणों को दोबारा इस्तेमाल करने से जानलेवा बैक्टीरिया और वायरस सीधे मरीज के खून में उतर जाते हैं। इससे लाइलाज इंफेक्शन (Infection), ऑर्गन फेलियर और इलाज के दौरान अचानक जटिलताएं बढ़ने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

अब क्या होगा?

स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों और औषधि नियंत्रकों (Drug Controllers) को साफ फरमान जारी कर दिया है—जो अस्पताल नियमों को तोड़ते पकड़ा गया, उसकी खैर नहीं। मूल निर्माता (OEM) के नियमों को ताक पर रखने वाले अब सीधे कानून के शिकंजे में होंगे।

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