भरतपुर के बयाना स्थित खटनावाली गांव में सूखे कुएं से करीब 5 करोड़ रुपए की 274 कार्टून दवाइयां बरामद हुई हैं। एक्सपायरी बदलकर बेचने की आशंका की जांच जारी है।
भरतपुर/बयाना। सूखा कुआं था, लेकिन उसके अंदर जो मिला उसने औषधि नियंत्रण विभाग के भी होश उड़ा दिए। बयाना तहसील के खटनावाली गांव में एक सूखे कुएं से करीब 5 करोड़ रुपए कीमत की दवाइयों के 274 कार्टून बरामद किए गए हैं। इतनी बड़ी मात्रा में दवाइयां जमीन के नीचे छिपाकर रखे जाने से अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इन्हें कुएं में क्यों छिपाया गया था और इनका असली स्रोत क्या है?
औषधि नियंत्रण विभाग की टीम ने स्थानीय पुलिस और ग्रामीणों की मदद से कार्रवाई करते हुए दवाइयों को जब्त कर लिया है। बरामद दवाइयों में हृदय रोग, डायबिटीज और एलर्जी के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाइयां शामिल हैं। इनमें लोसार-50, जानुमेट, केटोरोल-एम, एलेग्रा-एम और जालरा जैसी दवाइयां मिली हैं।
274 कार्टन दवाइयां, कीमत करीब 5 करोड़
मुखबिर से सूचना मिलने के बाद सहायक औषधि नियंत्रक, भरतपुर के नेतृत्व में औषधि नियंत्रण अधिकारियों की टीम खटनावाली गांव पहुंची। स्थानीय पुलिस और ग्रामीणों के सहयोग से सूखे कुएं की जांच की गई तो वहां बड़ी मात्रा में दवाइयों के कार्टून मिले। टीम ने करीब 274 कार्टून दवाइयां बरामद कर नियमानुसार जब्त कर लीं। विभाग के मुताबिक इनकी अनुमानित बाजार कीमत करीब 5 करोड़ रुपए है। मौके पर औषधि नियंत्रण अधिकारी भरतपुर श्रीमती कोमुदी सिंह ने दवाइयों की गुणवत्ता जांच के लिए 10 नमूने लिए हैं। इन नमूनों को जांच के लिए भेजने की प्रक्रिया के साथ जब्त दवाइयों से जुड़े रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल—कुएं में क्यों छिपाई गईं दवाइयां?
दवाइयों को इस तरह छिपाकर रखने के पीछे क्या वजह थी, अब जांच का सबसे अहम हिस्सा यही है। औषधि नियंत्रण आयुक्त श्री अविचल चतुर्वेदी के अनुसार इतनी बड़ी मात्रा में दवाइयों को सूखे कुएं में छिपाकर रखना प्रथम दृष्टया गंभीर और संदिग्ध मामला है। विभाग अब हर दवा का बैच नंबर, निर्माण तिथि, समाप्ति तिथि, स्रोत और सप्लाई चेन खंगाल रहा है। निर्माता स्तर से भी दवाइयों का बैचवार सत्यापन कराया जा रहा है।
कहीं एक्सपायरी बदलकर बाजार में बेचने की तैयारी तो नहीं?
जांच का एक और गंभीर पहलू यह है कि कहीं इन दवाइयों को किसी निर्माता, डिपो या सीएंडएफ से अवैध तरीके से निकालकर तो नहीं लाया गया। विभाग इस आशंका की भी पड़ताल कर रहा है कि कहीं अवधि-पार दवाइयों की एक्सपायरी तिथि बदलकर उन्हें दोबारा बाजार में बेचने की तैयारी तो नहीं थी। हालांकि अभी यह जांच का विषय है और इसकी पुष्टि प्रयोगशाला परीक्षण तथा निर्माता स्तर पर बैच और सप्लाई रिकॉर्ड के सत्यापन के बाद ही हो सकेगी।
मामले की कड़ी आगरा तक पहुंची, वहां भी दवाइयां जब्त
मामला सिर्फ भरतपुर तक सीमित नहीं रहा है। औषधि नियंत्रण विभाग ने दवाइयों से जुड़े इनपुट औषधि नियंत्रक उत्तर प्रदेश, औषधि निरीक्षक आगरा और संबंधित निर्माता कंपनियों के साथ साझा किए हैं। इसके बाद आगरा में भी संबंधित दवाइयां जब्त की गई हैं। वहां थाना मलपुरा, आगरा में संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। इससे मामले की जांच अब राजस्थान से आगे उत्तर प्रदेश तक पहुंच गई है।
निर्माता से लेकर सप्लाई चेन तक खंगाली जा रही
औषधि नियंत्रक श्री अजय फाटक के अनुसार दवाइयों के निर्माता, सप्लाई चेन और संबंधित प्रतिष्ठानों के स्तर पर विस्तृत जांच की जा रही है। विभाग निर्माता स्तर से प्रत्येक बैच के निर्माण, वितरण और सप्लाई से जुड़े अभिलेख हासिल कर रहा है।
अब जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि करोड़ों की दवाइयां आखिर कहां से निकलीं, किसके जरिए खटनावाली पहुंचीं और कुएं में इन्हें किसने और किस उद्देश्य से छिपाया।
फिलहाल दवाइयों को जब्त कर आगे की वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है और मामले में शामिल लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की कार्रवाई भी चल रही है। जांच में यदि दवाइयां नकली, मिलावटी, परिवर्तित या अवैध तरीके से बाजार में बेचने के लिए रखी गईं मिलती हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
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