हिमाचल हाईकोर्ट ने कहा कि दो साल की निरंतर अनुबंध सेवा पूरी करने वाले लेक्चरर स्कूल-न्यू शिक्षक उसी तारीख से नियमितीकरण के हकदार हैं। देरी का लाभ रोका नहीं जा सकता।
शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी स्कूलों में अनुबंध पर काम कर रहे लेक्चरर (स्कूल-न्यू) शिक्षकों के नियमितीकरण को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कहा कि प्रशासनिक देरी या चुनाव आचार संहिता किसी कर्मचारी के उस अधिकार को खत्म नहीं कर सकती, जो दो साल का निर्धारित अनुबंध सेवाकाल पूरा करने के साथ उसे हासिल हो जाता है।
न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि यदि शिक्षक की नियुक्ति स्वीकृत पद पर वैधानिक प्रक्रिया के तहत हुई है और उसका काम संतोषजनक रहा है, तो दो वर्ष की निरंतर अनुबंध सेवा पूरी करते ही वह उसी तारीख से नियमितीकरण का हकदार है। सरकारी स्तर पर आदेश जारी करने में हुई देरी का खामियाजा कर्मचारी को नहीं भुगताया जा सकता।
दो साल पूरे किए तो एक अप्रैल 2024 से माना जाएगा नियमित
मामला मोहिंद्र और अन्य याचिकाकर्ताओं का है। इन शिक्षकों का वर्ष 2019 में लोक सेवा आयोग के माध्यम से चयन हुआ था और नवंबर-दिसंबर 2021 में उन्हें लेक्चरर (स्कूल-न्यू) के पद पर अनुबंध आधार पर नियुक्त किया गया था।
राज्य सरकार की 2 दिसंबर 2023 की नीति के तहत 31 मार्च 2024 तक दो वर्ष का लगातार अनुबंध सेवाकाल पूरा करने वाले कर्मचारी नियमितीकरण के पात्र थे। याचिकाकर्ताओं ने नवंबर-दिसंबर 2023 में ही दो वर्ष पूरे कर लिए थे। ऐसे में उन्हें 1 अप्रैल 2024 से नियमितीकरण का लाभ मिलना था।
लेकिन सरकार ने उन्हें छह जुलाई 2024 से नियमित किया। यानी पात्रता हासिल करने के बावजूद नियमितीकरण का लाभ उन्हें करीब तीन महीने की देरी से मिला।
सरकार ने चुनाव आचार संहिता को बताया वजह
सरकार की ओर से अदालत में दलील दी गई कि लोकसभा चुनाव और उपचुनाव के कारण 16 मार्च 2024 से 14 जून 2024 तक आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू थी। इसी वजह से नियमितीकरण के आदेश समय पर जारी नहीं हो सके।
सरकार ने यह भी तर्क दिया कि नियमितीकरण नीति के क्लॉज-9 के अनुसार नियमितीकरण उसी तारीख से प्रभावी होता है, जिस दिन आदेश जारी किया जाता है। इसलिए इसे पिछली तारीख से लागू नहीं किया जा सकता।
हाईकोर्ट ने कहा- सरकार की देरी का नुकसान शिक्षक क्यों उठाए?
खंडपीठ ने सरकार की इस दलील को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि जब कर्मचारी की पात्रता को लेकर कोई विवाद ही नहीं है तो केवल प्रशासनिक देरी के कारण उसके अधिकार को रोका नहीं जा सकता।
अदालत ने स्पष्ट किया कि चुनाव आचार संहिता समाप्त होने के बाद सरकार का दायित्व था कि पात्र कर्मचारियों को उनका नियमितीकरण उनकी वास्तविक पात्रता की तारीख से दिया जाता। सरकार के स्तर पर हुई देरी का नुकसान कर्मचारी को नहीं दिया जा सकता।
क्लॉज-9 भी हुआ अमान्य
हाईकोर्ट ने नियमितीकरण नीति के क्लॉज-9 को याचिकाकर्ताओं के मामले में अमान्य और अप्रभावी करार दिया। कोर्ट के मुताबिक इस प्रावधान से सरकार को नियमितीकरण की तारीख तय करने की ऐसी असीमित शक्ति मिलती है, जिसका मनमाने तरीके से इस्तेमाल हो सकता है।
पीठ ने माना कि ऐसी शर्त संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के विपरीत है।
अब मिलेगा एरियर, वेतन वृद्धि और वरिष्ठता का लाभ
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ताओं को 31 मार्च 2024 को दो वर्ष की सेवा पूरी करने के बाद 1 अप्रैल 2024 से नियमित माना जाए।
इसके साथ ही उन्हें नियमित वेतनमान, वार्षिक वेतन वृद्धि और वरिष्ठता समेत सभी संबंधित लाभ दिए जाएंगे। अदालत ने एरियर सहित सभी वित्तीय लाभ छह सप्ताह के भीतर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।
नई हवा खबरें अपने मोबाइल पर नियमित और डायरेक्ट प्राप्त करने के लिए व्हाट्सएप नंबर 9460426838 सेव करें और ‘Hi’ और अपना नाम, स्टेट और सिटी लिखकर मैसेज करें। आप अपनी खबर या रचना भी इस नंबर पर भेज सकते हैं।
