भरतपुर के रामेश्वरी देवी कन्या महाविद्यालय में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के तत्वावधान में गुरु वंदन कार्यक्रम आयोजित हुआ। डॉ. योगेन्द्र भानु और डॉ. रामकिशोर उपाध्याय ने भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा और शिक्षक के दायित्व पर विचार रखे।
भरतपुर। भारतीय संस्कृति में गुरु की महिमा और गुरु-शिष्य परंपरा के मूल्यों को आत्मसात करने के उद्देश्य से रामेश्वरी देवी कन्या महाविद्यालय, भरतपुर में प्राचार्य डॉ. उर्मिला मीणा की अध्यक्षता में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (उच्च शिक्षा, राजस्थान) के तत्वावधान में ‘गुरु वंदन कार्यक्रम’ आयोजित किया गया। कार्यक्रम में शिक्षकों और शिक्षाविदों ने भारतीय परंपरा में गुरु के महत्व, शिक्षा के मूल्यों और शिक्षक के सामाजिक दायित्वों पर विस्तार से विचार रखे।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. योगेन्द्र भानु, कार्यकारिणी सदस्य, अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (उच्च शिक्षा, राजस्थान) तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. रामकिशोर उपाध्याय, जिला अध्यक्ष, अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (उच्च शिक्षा, राजस्थान) उपस्थित रहे।
भारतीय परंपरा में गुरु का स्थान सर्वोच्च: डॉ. योगेन्द्र भानु
मुख्य वक्ता डॉ. योगेन्द्र भानु ने भारतीय चिंतन, व्याकरण शास्त्र, नैतिक आदर्शों और सामाजिक उत्तरदायित्व के संदर्भ में गुरु-शिष्य संबंधों की व्याख्या की। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में पहली पूर्णिमा गुरु वंदन के लिए समर्पित होती थी, जबकि दूसरी पूर्णिमा पर शिष्यों का चयन कर उनका यज्ञोपवीत संस्कार किया जाता था, जिसे श्रावणी उपाकर्म कहा जाता है।
उन्होंने कहा कि चातुर्मास की प्रथम पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। गुरु में जो ‘गुरुत्व’ होता है, वही उन्हें वंदन का अधिकारी बनाता है। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षक का निरंतर स्वाध्याय ही विद्यार्थियों के लिए अमृत समान होता है और यही गुरु के व्यक्तित्व को और अधिक समृद्ध बनाता है।
‘गुरु ही ब्रह्मा, विष्णु और महेश हैं’: डॉ. उर्मिला मीणा
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य डॉ. उर्मिला मीणा ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु को सृष्टि का पथप्रदर्शक माना गया है। उन्होंने कहा कि “गुरु ही ब्रह्मा हैं, गुरु ही विष्णु हैं और गुरु ही महेश्वर हैं।” उन्होंने विद्यार्थियों से गुरुजनों के प्रति सम्मान, अनुशासन और ज्ञानार्जन के प्रति समर्पण का भाव बनाए रखने का आह्वान किया।
‘राष्ट्र के हित में शिक्षा’ के मूल मंत्र पर जोर
विशिष्ट अतिथि डॉ. रामकिशोर उपाध्याय ने अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के ध्येय वाक्य “राष्ट्र के हित में शिक्षा, शिक्षा के हित में शिक्षक तथा शिक्षक के हित में समाज” पर प्रकाश डाला। उन्होंने संगठन के मूल विचार “शिक्षक राष्ट्र के लिए है” को रेखांकित करते हुए कर्तव्यबोध, शिक्षक की भूमिका और समाज के प्रति उत्तरदायित्व पर अपने विचार व्यक्त किए।
उन्होंने महासंघ के तीन प्रमुख कार्यक्रमों—नवसंवत्सर, गुरु वंदन कार्यक्रम तथा संगठन की वैचारिक गतिविधियों—की उपादेयता और वर्तमान समय में उनकी प्रासंगिकता पर भी विस्तार से चर्चा की।
इन शिक्षकों की रही सक्रिय उपस्थिति
कार्यक्रम में अकादमिक प्रभारी डॉ. मधु शर्मा, वरिष्ठ संकाय सदस्य डॉ. निशा गोयल, डॉ. सुनील कुमार गुप्ता, डॉ. अंजु पाठक, डॉ. लालाशंकर गयावाल, डॉ. कविता आचार्य, डॉ. अलका गोयल, श्रीमती साधना शर्मा, डॉ. सरोज, श्री दीवान सिंह, डॉ. नटवर सिंह, डॉ. जयराम, श्री विनय खण्डेलवाल और श्री योगेन्द्र सिंह सहित महाविद्यालय के संकाय सदस्य उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का समापन गुरु-शिष्य परंपरा के मूल्यों को जीवन में अपनाने और शिक्षा के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने के संकल्प के साथ हुआ।
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