राजस्थान JEN भर्ती पेपर लीक मामले में SOG ने जल संसाधन विभाग के AEN अतुल मीना को गिरफ्तार किया है। जांच में 25 लाख रुपये देकर कथित रूप से पेपर खरीदकर नौकरी हासिल करने का दावा किया गया है।
जयपुर। कई प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार असफल रहने वाला एक अभ्यर्थी अचानक सरकारी इंजीनियर बन गया, फिर विभागीय पदोन्नति पाकर सहायक अभियंता (AEN) की कुर्सी तक पहुंच गया। अब राजस्थान स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) की जांच में दावा किया गया है कि इस सफलता के पीछे मेहनत नहीं, बल्कि 25 लाख रुपये में खरीदा गया कथित लीक पेपर था। इसी मामले में एसओजी ने जल संसाधन विभाग में कार्यरत सहायक अभियंता (AEN) अतुल मीना को गिरफ्तार कर लिया है।
दौसा जिले के सालीमपुर गांव निवासी अतुल मीना वर्तमान में जल संसाधन विभाग के कोटा उपखंड में एईएन के पद पर तैनात है। अदालत ने उसे 5 अगस्त तक एसओजी रिमांड पर भेजा है, जहां उससे पेपर लीक नेटवर्क और उससे जुड़े अन्य अभ्यर्थियों के बारे में पूछताछ की जा रही है।
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दरअसल, वर्ष 2020 की संयुक्त सीधी भर्ती JEN परीक्षा पेपर लीक के कारण निरस्त कर दी गई थी। इसके बाद 12 सितंबर 2021 को दोबारा परीक्षा आयोजित हुई, लेकिन एसओजी की जांच में दावा किया गया कि दूसरी परीक्षा का प्रश्नपत्र भी कथित तौर पर लीक हो गया था और चुनिंदा अभ्यर्थियों तक पहले ही पहुंचा दिया गया था।
इसी मामले में पहले गिरफ्तार किए जा चुके पेपर लीक माफिया हर्षवर्धन मीना उर्फ पटवारी से पूछताछ के दौरान अतुल मीना का नाम सामने आया। जांच के अनुसार, अतुल ने हर्षवर्धन मीना के एक करीबी रिश्तेदार के माध्यम से संपर्क किया और कथित तौर पर 25 लाख रुपये देकर प्रश्नपत्र हासिल किया। इसके बाद उसने परीक्षा पास की, जल संसाधन विभाग में कनिष्ठ अभियंता (JEN) के रूप में नियुक्ति पाई और बाद में पदोन्नत होकर सहायक अभियंता (AEN) बन गया।
एसओजी की जांच में एक और तथ्य सामने आया है कि अतुल मीना इससे पहले करीब दर्जनभर प्रतियोगी परीक्षाएं दे चुका था, लेकिन उसे किसी भी परीक्षा में सफलता नहीं मिली थी। जांच एजेंसी अब इसी पहलू को भी मामले की अहम कड़ी मानकर पड़ताल कर रही है।
एसओजी के अतिरिक्त महानिदेशक विशाल बंसल ने बताया कि नए साक्ष्यों और पूछताछ में सामने आए तथ्यों के आधार पर अतुल मीना को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, जिसके बाद उसे गिरफ्तार किया गया। रिमांड के दौरान यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि पेपर लीक नेटवर्क के जरिए और किन-किन अभ्यर्थियों तक प्रश्नपत्र पहुंचाया गया था तथा इस पूरे खेल में किन लोगों ने बिचौलिये की भूमिका निभाई।
जांच एजेंसी का मानना है कि यह मामला केवल एक अभ्यर्थी तक सीमित नहीं हो सकता। पूछताछ में सामने आने वाली जानकारी के आधार पर पेपर लीक गिरोह से जुड़े अन्य लोगों और कथित रूप से लाभ लेने वाले अभ्यर्थियों पर भी कार्रवाई की जा सकती है। इसी कारण एसओजी पूरे नेटवर्क की परत-दर-परत जांच कर रही है।
राजस्थान में भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक मामलों पर पहले से ही सख्ती बरती जा रही है। ऐसे में सरकारी सेवा में कार्यरत अधिकारी की इस गिरफ्तारी को जांच का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है।
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