भरतपुर में आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में देशभर के कवियों ने काव्य पाठ किया। इस दौरान ‘ब्रज गौरव सम्मान’ प्रदान किए गए तथा प्रो. डॉ. अशोक कुमार गुप्ता की दो पुस्तकों का लोकार्पण भी हुआ।
भरतपुर। ब्रजभाषा की मिठास, राष्ट्रभक्ति की गूंज, हास्य-व्यंग्य की फुहार और गीत-ग़ज़लों की सरस प्रस्तुति ने भरतपुर में आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन को यादगार बना दिया। राजस्थान जन सांस्कृतिक परिषद्, भरतपुर, ब्रजवानी जन सेवा समिति, ब्रजनगर (डीग) तथा राष्ट्रीय कवि संगम, भरतपुर (राजस्थान) के संयुक्त तत्वावधान में रुचि रेस्टोरेंट में आयोजित समारोह में देशभर से आए साहित्यकारों और कवियों ने देर रात तक श्रोताओं को बांधे रखा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार एवं समीक्षक वेदप्रकाश शर्मा ‘वेद’ ने की, जबकि सोनी ग्रुप ऑफ एजूकेशन के डायरेक्टर विकास सोनी मुख्य अतिथि रहे। विशिष्ट अतिथियों में अंतरराष्ट्रीय वैश्य महासभा के उपाध्यक्ष एवं समाजसेवी अनुराग गर्ग, ब्रजवानी जन सेवा समिति के प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. मोहकम सिंह ‘सहजी’, राजस्थान जन सांस्कृतिक परिषद् के जिला अध्यक्ष एवं एम.एस.जे. राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के हिन्दी विभाग के प्रोफेसर डॉ. अशोक कुमार गुप्ता, ब्रजवानी जन सेवा समिति के हरीशचंद्र ‘हरि’ नगर, राजस्थान जन सांस्कृतिक परिषद् के जिला सचिव लोकेश सिंघल, प्रांतीय महासचिव राजेन्द्र अनुरागी, राष्ट्रीय कवि संगम के जिला अध्यक्ष श्यामसिंह जघीना ‘मधुर’, पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी एवं साहित्यकार लखनपाल सिंह ‘शलभ’, साहित्यकार एवं एम.एस. सर्जन डॉ. डी.डी. गोयल, प्रो. डॉ. संतोष गुप्ता, अनीता सिंह ‘सुरभि’, वीर रस के राष्ट्रीय कवि अभिषेक ‘अमर’, एम.एस.जे. महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य प्रो. डॉ. उमेश चन्द शर्मा तथा ओमप्रकाश गुप्ता उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ अभिषेक ‘अमर’ की सरस्वती वंदना और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।
‘इतनी कमाई चाहिए…’ क्या अब डॉक्टरों को भी दिए जा रहे हैं सेल्स टारगेट?
मुख्य अतिथि विकास सोनी ने भारतीय संस्कृति, शिक्षा और साहित्य की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति हमारे जीवन और संस्कारों में रची-बसी है। उन्होंने संत परंपरा की महिमा का उल्लेख करते हुए कहा कि ‘राधा’ नाम व्यक्ति के जीवन में आध्यात्मिक परिवर्तन लाने की शक्ति रखता है। इस अवसर पर उन्होंने विनोद अग्रवाल की चर्चित काव्य पंक्तियों का उल्लेख करते हुए जीवन के आध्यात्मिक संबंधों का संदेश भी दिया।
समारोह में देशभर से आए साहित्यकारों और कवियों को ‘ब्रज गौरव सम्मान’ से अलंकृत किया गया। सम्मानित रचनाकारों को स्मृति चिन्ह, अंगवस्त्र, माला, अभिनंदन पत्र के साथ सम्मानजनक नगद राशि तथा बांके बिहारी और राधारानी की चुनरी भेंट कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम दो सत्रों में आयोजित हुआ। पहले सत्र में स्थानीय कवियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं, जबकि दूसरे सत्र में विभिन्न राज्यों से आए कवियों ने काव्य पाठ किया।
इसी दौरान मंचासीन अतिथियों ने प्रो. डॉ. अशोक कुमार गुप्ता की दो नई पुस्तकों ‘अशोक वाटिका’ और ‘आओ संग चलें’ का लोकार्पण किया। डॉ. गुप्ता ने कहा कि दोनों पुस्तकें हिन्दी साहित्य के विद्यार्थियों, शोधार्थियों और काव्य प्रेमियों के लिए उपयोगी सिद्ध होंगी। उन्होंने अपनी रचनाओं “क्या कहने उपवन के, खिलते ठाट का, लेके आई गीतों की अशोक वाटिका” तथा “भाई-भाई नहीं लड़ेंगे, आओ संग चलें” का पाठ कर भारतीय संस्कृति, भाईचारे और सामाजिक समरसता का संदेश दिया।
काव्यपाठ की शुरुआत करते हुए वेदप्रकाश शर्मा ‘वेद’ ने “सवेरे की नई किरणें कभी ना रूठने देंगे” सुनाकर वातावरण को भावपूर्ण बना दिया। श्यामसिंह जघीना ‘मधुर’ ने “ब्रजवानी तौ ब्रज के कन्हैया की भाषा ऐ, ब्रज के लोगन के जीवे की आसा ऐ” प्रस्तुत कर ब्रजभाषा की महिमा का गुणगान किया।
इसके बाद डॉ. लोकेश शर्मा ‘नीरज’ ने “ऐ मेरे प्यारे वतन दिल तुझ पर ये कुर्बान है”, अशोक सिंह धाकरे ने “भारत देश हमारौ”, राकेश राजस्थानी ने “अपनी बोली में तू बोल”, अभिषेक ‘अमर’ ने “ब्रजभाषा में रस बड़ौ”, प्रियंका पुरोहित ने “धन्य-धन्य भाग बाकौ”, सी.एस. ‘कृष्णा’ ने “राधा जू के नैनन में मोहन की छवि है”, गोविन्द डागुर ने “श्रावण की इन बूँदन में”, हरीशचंद्र ‘हरि’ ने “कुंज बड़े कि कछार बड़े हैं”, मनमोहन ‘अभिलाषी’ ने “द्वापर की श्यामा”, सुरेश सुनार ने “आओ दो घड़ी”, राधाकिशन सैनी ने “याद जो सतावै”, नरेन्द्र ‘निर्मल’ ने “संतोष कौ मिल्यौ है जाकूँ सदा सहारौ”, हरिओम ‘हरि’ ने “ऊधम सिंह की स्मृति में…”, राजेन्द्र अनुरागी ने “राधे-राधे गाता चल” तथा अनुराग गर्ग ने अपनी मधुर काव्य प्रस्तुति से श्रोताओं की भरपूर तालियां बटोरी।
दूसरे सत्र में मंच पर देशभर से आए कवियों ने अपनी रचनाओं से ऐसा समां बांधा कि श्रोता देर रात तक कार्यक्रम स्थल पर डटे रहे। हास्य, व्यंग्य, ओज, करुण, श्रृंगार और ब्रजभाषा की रसधारा ने सम्मेलन को बहुरंगी स्वरूप प्रदान किया।
डॉ. रामदास शर्मा ने “जि कैसो सावन बिना फुहार”, चन्द्रभान वर्मा ‘चंद्र’ ने “लगता है हम कैद पड़े हैं”, सुरेश चतुर्वेदी ने “राधे कहे श्याम-श्याम”, कमलसिंह ‘कमल’ ने “जमुना के तट नटखट”, लोकेन्द्र सुमन ने “गुरु जी की महिमा”, डॉ. अविनाश सोनी ने “इस वर्ष सावन में”, पूरन शर्मा ने “कदमन की सीरी छैया”, डी.के. हसमुख ने “कहाँ गई वो मांखन मिश्री”, ओमप्रकाश कुंतल ने “आजकल के युवा”, मंगतूराम शर्मा ने “या दुनिया में”, अमर सिंह ‘विद्रोही’ ने “कहीं साधन है”, नेकराम ‘नेक’ ने “जो चरित्र का धनी रहा”, सुघड़सिंह ‘सुग्गा’ ने “ब्रजभाषा अथाह जल”, चन्द्रभान फौजदार ने “इस देश के उत्थान की”, प्रवेश ‘अकेला’ (आगरा) ने “सुन्दर सा हो एक घर”, आचार्य निर्मल ने “सावन का मधुमास सुहावन”, अनिल पंडित (अलवर) ने “चित्तौड़ जीत इतराया खिलजी”, वीरसिंह बेनिबाल (हिंडौन) ने “हमें आँधी क्या डराएँगी”, गोविन्द ब्रजवासी (कामा) ने “राधा नाम अति प्यारौ”, अशोक शर्मा (जयपुर) ने “सूने चूल्हे, भीगी आँखें” तथा खेमेंद्र देव ने “देखि कै बाट और खोलि कपाट” का प्रभावशाली पाठ किया।
अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में बाहर से आए कवियों ने भी अपनी विशिष्ट प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। महेन्द्र मिहोनवी (भिण्ड) ने “एक नज़र से देखते सबको लम्बरदार”, गीतकार ललित तारा (मेरठ) ने “ग़मों के पहाड़ पे बैठा हूँ”, राजवीर सिंह (मुरैना) ने “धीर आप ना धरोगे तो धरैया फिर कौन है”, ग़ज़लकार महेश मंगल (इटावा) ने “वक्त के संग बदल सारे मानी गये”, करुण रस के कवि वीरेन्द्र जैन ‘विद्रोही’ ने “आज आये हैं तेरे शहर में नये”, व्यंग्यकार सोहनलाल ‘प्रेम’ (डीग) ने “वन उपवन से चलते-चलते हम गमलों तक आ पहुँचे” सुनाकर भरपूर ठहाके बटोरे।
इसी क्रम में गीतकार वीरेन्द्र पाठक (हाथरस) ने “जुग-जुग जियो मैया तेरौ ये लाला…” सुनाकर ऐसा माहौल बनाया कि अनेक श्रोता झूम उठे। सबरस (मुरसानी) ने “हम तो जाते अपने गाँव”, डॉ. मोहकम सिंह ‘सहजी’ ने “है तपिश चारों तरफ, मंजर सुहाना ढूँढ़ता हूँ”, अनीता सिंह ‘सुरभि’ ने “ब्रजलोक बड़ौ सुहानौ” तथा लोकेश सिंघल ने अपनी चर्चित हास्य रचना “ओम जय खसमानु खानी” प्रस्तुत कर सभागार को ठहाकों से गूंजा दिया।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर पूर्व प्राचार्य प्रो. डॉ. उमेश चन्द शर्मा ने आयोजन की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए कहा कि ऐसे साहित्यिक आयोजन समाज में भाषा, संस्कृति और संस्कारों को नई ऊर्जा प्रदान करते हैं तथा इन्हें निरंतर आयोजित किया जाना चाहिए।
अंत में आयोजक प्रो. डॉ. अशोक कुमार गुप्ता एवं प्रो. डॉ. संतोष गुप्ता ने कार्यक्रम में पधारे सभी अतिथियों, साहित्यकारों, कवियों एवं श्रोताओं का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम का प्रभावी संचालन श्यामसिंह जघीना ‘मधुर’ एवं वीर रस के राष्ट्रीय कवि अभिषेक ‘अमर’ ने संयुक्त रूप से किया।
इस अवसर पर अग्रवाल शोभा यात्रा समिति के मोहन मित्तल, विष्णु लोहिया, दिलीप गुप्ता, छीतर बाबा, रमा शर्मा, डॉ. सीमा सिंह, डॉ. मुकुट बिहारी, डॉ. राहुल यादव, मानवेन्द्र सिंह, ऋतु चौधरी, प्रिया शर्मा, गुंजन शर्मा, रविन्द्र मोहन शर्मा, आलोक बंसल, मनोज, हिमांशी भारद्वाज ‘नीतू’, सोमेन्द्र गोपालिया, उषा शर्मा, सोनम शर्मा, अमित भारद्वाज, राजेश लवानिया, कुसुम शर्मा, दुष्यंत सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार, कविगण एवं श्रोतागण उपस्थित रहे।
नई हवा खबरें अपने मोबाइल पर नियमित और डायरेक्ट प्राप्त करने के लिए व्हाट्सएप नंबर 9460426838 सेव करें और ‘Hi’ और अपना नाम, स्टेट और सिटी लिखकर मैसेज करें। आप अपनी खबर या रचना भी इस नंबर पर भेज सकते हैं।
