1 करोड़ के लिए दोस्त बना कातिल | 48 घंटे तक चारे में छुपाई लाश, डिक्की में भरकर ठिकाने लगाने निकला तो खुल गया राज

जयपुर में 1 करोड़ रुपये के विवाद में व्यापारी हरिशंकर शर्मा की हत्या का मामला सामने आया है। आरोपी ने शव को दो दिन तक चारे के ढेर में छुपाए रखा और बाद में कार की डिक्की में भरकर ठिकाने लगाने की कोशिश की।

जयपुर में एक करोड़ रुपये के लेनदेन का विवाद ऐसी खूनी कहानी में बदल गया, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया। जिस दोस्त पर भरोसा करके व्यापारी ने करोड़ों रुपये उधार दिए थे, उसी पर अब उसकी हत्या का आरोप है। हत्या के बाद आरोपी ने दो दिन तक शव को चारे के ढेर में छुपाए रखा और फिर रातभर कार में लेकर घूमता रहा, लेकिन जब लाश ठिकाने लगाने की आखिरी कोशिश की तो उसका राज खुल गया।

मृतक की पहचान 40 वर्षीय हरिशंकर शर्मा के रूप में हुई है, जो बिल्डिंग मटेरियल सप्लाई का कारोबार करते थे। परिजनों के मुताबिक हरिशंकर शनिवार सुबह घर से निकले थे, लेकिन वापस नहीं लौटे। शाम करीब 7 बजे के बाद उनका मोबाइल भी बंद हो गया। काफी तलाश के बाद रविवार को शिवदासपुरा थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई गई।

परिवार को उम्मीद थी कि हरिशंकर कहीं चले गए होंगे, लेकिन सोमवार सुबह जो खबर मिली उसने सबको झकझोर दिया। पुलिस ने सूचना दी कि एक कार में शव मिला है। महात्मा गांधी अस्पताल पहुंचने पर परिजनों को पता चला कि वह शव हरिशंकर का ही है।

मृतक के छोटे भाई प्रहलाद शर्मा का आरोप है कि हरिशंकर ने अपने दोस्त सीताराम खोज को बिल्डिंग मटेरियल और अन्य कामों के लिए करीब एक करोड़ रुपये उधार दिए थे। रुपये लौटाने के बदले सीताराम प्लॉट का सौदा करने की बात कह रहा था, लेकिन लंबे समय से रकम वापस नहीं लौटा रहा था। इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद चल रहा था।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि शनिवार शाम दोनों आरोपी के बाड़े पर मिले थे। साथ बैठकर चाय पी और फिर पैसों के हिसाब-किताब को लेकर कहासुनी शुरू हो गई। विवाद इतना बढ़ा कि मामला हिंसक झगड़े में बदल गया। इसी दौरान हरिशंकर को गंभीर चोटें लगीं और उनकी मौत हो गई।

मौत के बाद आरोपी घबरा गया। पुलिस के अनुसार उसने शव को अपने बाड़े में चारे के ढेर के नीचे छुपा दिया। रविवार को वह लाश को ठिकाने लगाने की योजना बनाता रहा। देर रात उसने किसी परिचित से कार मांगी और शव को कट्टों में भरकर रस्सियों से बांध दिया। इसके बाद वह शहर और आसपास के इलाकों में घूमता रहा, लेकिन शव को कहीं फेंक नहीं पाया।

सोमवार सुबह आरोपी एक बार फिर शव को ठिकाने लगाने निकला। वह बॉम्बे हॉस्पिटल के पास बहने वाले नाले की ओर पहुंचा और मदद के लिए अपने एक दोस्त को बुलाया। लेकिन जैसे ही दोस्त को कार की डिक्की में रखे कट्टों के भीतर शव होने का पता चला, उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। उसने तुरंत पुलिस को सूचना दे दी।

पुलिस के पहुंचने से पहले आरोपी कार छोड़कर भाग निकला, लेकिन ज्यादा देर तक बच नहीं पाया। पुलिस ने कुछ ही समय बाद उसे हिरासत में ले लिया और पूछताछ शुरू कर दी।

चाकसू एसीपी भवानी सिंह और शिवदासपुरा थाना पुलिस मामले की जांच में जुटी है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि हत्या पूरी योजना के तहत की गई थी या फिर पैसों के विवाद में अचानक हुए झगड़े ने यह खौफनाक मोड़ ले लिया।

फिलहाल एक बात साफ है—एक करोड़ रुपये के विवाद ने दोस्ती की कहानी को ऐसी दुश्मनी में बदल दिया, जिसका अंत एक लाश, कार की डिक्की और पुलिस हिरासत में हुआ।

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