भरतपुर
केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (Keoladeo National Park) — पक्षियों का वो जन्नत, जहाँ आसमान भी परों की फड़फड़ाहट से गूंज उठता है — इस बार एक नए रंग में रंगा हुआ है।
इस बार यहां पेंटेड स्टॉर्क की रिकॉर्ड संख्या ने न सिर्फ वैज्ञानिकों को चौंकाया है, बल्कि प्रकृति प्रेमियों का दिल भी जीत लिया है।
मानसून की भरपूर बारिश और पांचना बांध से लगातार पानी की आपूर्ति ने उद्यान की झीलों को जीवन से भर दिया है। पानी की ठंडी चमक और झील किनारे झुके पेड़ों के बीच, इन गुलाबी-सफेद पक्षियों के झुंड किसी जीवंत पेंटिंग जैसे लगते हैं।
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वन्यजीव फोटोग्राफर दीपक मुदगल ने इन अद्भुत नजारों को अपने कैमरे में कैद किया है। उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही हैं।
मुदगल कहते हैं —
“सुबह की सुनहरी धूप में जब ये पक्षी अपने घोंसलों में व्यस्त होते हैं, तो वो नजारा किसी जादू से कम नहीं लगता। उनकी उड़ान, पानी में झलक और पंखों की चमक — सब कुछ मानो प्रकृति की आरती हो।”
मुदगल के अनुसार, पेंटेड स्टॉर्क हर साल दक्षिण भारत से अगस्त-सितंबर में भरतपुर आती हैं। यहां वे झीलों के किनारे घोंसले बनाकर वंश वृद्धि करती हैं, और फिर मार्च के आसपास अपने बच्चों के साथ लौट जाती हैं।
इस पूरे चक्र के दौरान केवलादेव झील उनके जीवन की पालना बन जाता है।
उद्यान के डीएफओ मानस सिंह ने बताया —
“इस साल पेंटेड स्टॉर्क की संख्या अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर है। यह हमारे संरक्षण प्रयासों की बड़ी सफलता है। पानी की उपलब्धता और प्रदूषण नियंत्रण ने इन पक्षियों के लिए स्वर्ग जैसा वातावरण तैयार किया है।”
इन दिनों झीलों के किनारे साइकिल और रिक्शा सफारी के जरिए पर्यटक इस मनोरम दृश्य का आनंद ले रहे हैं।
परिंदों की परछाइयाँ जब पानी की सतह पर तैरती हैं, तो लगता है — प्रकृति खुद अपनी सबसे सुंदर तस्वीर बना रही है।
केवलादेव एक बार फिर याद दिला रहा है कि अगर इंसान और प्रकृति साथ चलें, तो धरती पर हर मौसम में “रंगों का मौसम” लौट सकता है।
आइए, हम सब मिलकर इस प्राकृतिक धरोहर को संजोएँ — ताकि हर साल यही पेंटेड परिंदे लौटकर आसमान को फिर गुलाबी कर दें।
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