धरती को बचाने का संकल्प | कोटा में बरगद-पीपल से लेकर जामुन तक लगाए गए छायादार और फलदार पौधे

कोटा में राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन, स्वामी विवेकानंद विचार संस्थान और शिक्षा विभाग के संयुक्त अभियान के तहत बरगद, पीपल, नीम, जामुन सहित कई प्रजातियों के पौधे लगाए गए। जिला शिक्षा अधिकारी रामचरण मीणा और एडवोकेट गिरिराज गुप्ता ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

कोटा। बढ़ते पर्यावरण संकट और जलवायु परिवर्तन के बीच कोटा में रविवार को प्रकृति संरक्षण का मजबूत संदेश देखने को मिला। राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन, स्वामी विवेकानंद विचार संस्थान और राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय सुभाष नगर द्वितीय के संयुक्त तत्वावधान में ‘प्रकृति बचेगी, जीवन बचेगा’ अभियान के तहत विद्यालय परिसर और आसपास के क्षेत्र में बड़े स्तर पर वृक्षारोपण किया गया।

अभियान के दौरान बरगद, पीपल, नीम, अशोक, बेलपत्र, कदम और जामुन सहित छायादार एवं फलदार प्रजातियों के पौधे लगाए गए। आयोजन का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि उनके संरक्षण और संवर्धन के प्रति समाज को जागरूक करना भी रहा।

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संस्था के प्रवक्ता श्याम मनोहर हरित ने बताया कि कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला शिक्षा अधिकारी रामचरण मीणा ने कहा कि शिक्षा विभाग पिछले कई वर्षों से राजस्थान के विद्यालयों में व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण अभियान चला रहा है, जिसके सकारात्मक परिणाम अब दिखाई देने लगे हैं। उन्होंने बताया कि इस वर्ष भी जिले के सभी ब्लॉकों और विद्यालयों को निर्धारित लक्ष्य दिए गए हैं। विभाग की प्राथमिकता केवल पौधे रोपना नहीं, बल्कि उनकी नियमित देखभाल सुनिश्चित करना है, ताकि वे विकसित होकर बड़े वृक्ष बन सकें।

इस अवसर पर स्वामी विवेकानंद विचार संस्थान के अध्यक्ष एडवोकेट गिरिराज गुप्ता ने कहा कि प्रकृति संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का व्यक्तिगत दायित्व है। उन्होंने कहा कि दुनिया के वैज्ञानिक वर्ष 2030 तक के समय को मानवता के लिए चेतावनी काल मान रहे हैं। ऐसे में प्रत्येक व्यक्ति को अपनी क्षमता के अनुसार प्रकृति के संरक्षण और संवर्धन में योगदान देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि विकास के नाम पर पहाड़ों को काटना, चौड़ी सड़कें बनाना, सुरंगें खोदना, बांध निर्माण और अत्यधिक खनन जैसी गतिविधियां बिना संतुलन के जारी रहीं तो इसके दुष्परिणाम बेहद गंभीर होंगे। उन्होंने कहा कि उनकी संस्था का लक्ष्य केवल पौधों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि प्रत्येक पौधे को जीवित रखकर वृक्ष बनाना है।

कार्यक्रम में प्राचार्य श्रीमती संतोष शर्मा, उपाचार्य सुरेश राठौड़, प्राचार्य गणेश जांगिड़, व्याख्याता शिवानी चौधरी, सी.एल. प्रजापति, नारायण गौतम, सत्येंद्र गंगवाल, प्रकृति प्रेमी मदनलाल मानव, पूर्व पार्षद ब्रजमोहन गोड, महेंद्र सिंह चौहान, गायत्री सुमन, मनोज दाधीच, बृजेश राठौर, जीवनधर तथा पीयूष राठौड़ सहित बड़ी संख्या में प्रकृति प्रेमी मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में उपाचार्य सुरेश राठौड़ ने सभी अतिथियों एवं प्रकृति प्रेमियों का आभार व्यक्त किया।

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