कुहरे की छाँव घनी हो गई
पुरबइया नाग फनी हो गई
दरपन मन टूक टूक हो गया
Tag: poem
मैं अक्षर तुम मात्रा…
मैं अक्षर हूं एक तुम्हारा, तुम मेरी मात्रा हो।
मैं कदमों सा एक बटोही, तुम जैसे यात्रा हो।।
प्रभु-सहचर्य
चौरासी लाख योनियों में से एक
अति दुर्लभ है मानव योनि एक
है इस में इच्छा और कर्म का संपूर्ण समावेश
