तबाही का मंजर…

हर जगह चीखे हैं…

जब कोई अपना जाता है…

जब कोई अपना जाता है…

हे! सृष्टि के परमेश्वर, अब लेते क्यों अवतार नहीं?

दम तोड़ती निर्बल सांसें…

तो बुरा समय क्यों ठहरेगा…

तो बुरा समय क्यों ठहरेगा…

रिश्ता नाम समर्पण का…

रिश्ता नाम समर्पण का…

पर हार नहीं मानेंगे हम…

आंधी आए, तूफ़ान आए…

रिश्ते जब दरकने लगें…

अपने जब दमकने लगें,
रिश्ते जब दरकने…

बसन्त का पारस…

बसन्त का पारस
पतझड़ के बाद
आनेवाला बसन्त
सुख का सन्देशा लाता है…

‘ढाई अक्षर’ का कमाल

जन्म से लेकर मृत्यु तक
हम बंधे हैं ढाई अक्षर में
ढाई अक्षर ही वक्त में
और ढाई अक्षर ही अन्त में।
समझ न पाया कोई भी
है रहस्य क्या ढाई अक्षर में।
पढ़िए ‘ढाई अक्षर’ का कमाल …