भरतपुर
भरतपुर की ऐतिहासिक सुजानगंगा नहर की सफाई अब आधुनिक मशीन से आनासागर की तर्ज पर होगी। इसके लिए अजमेर नगर निगम से पंद्रह हजार रुपए रोज के भाड़े पर पानी में से कचरा साफ़ करने की मशीन मंगवाई गई है। शुक्रवार को इस मशीन ने नहर की सफाई भी शुरू कर दी।
करीब चार टन वजनी इस मशीन को शुक्रवार को क्रेन की सहायता से नहर में उतारा गया। यह मशीन 10 दिन सुजान गंगा नहर से कचरा निकालेगी। आपको बता दें भरतपुर की यह ऐतिहासिक नहर शहर के लोगों के लिए नरक बन चुकी है। इसकी साफ-सफाई के लिए बीते दशकों में बड़ी-बड़ी योजनाएं बनीं, लेकिन कोई भी योजना आकार नहीं ले सकी। करोड़ों रुपए का बजट भी आया, पर सब ठिकाने लग गया। उसकी बन्दर-बांट हो गई।
करीब 22 साल पहले भरतपुर के एक पर्यावरणविद महेंद्र गर्ग ने इसके पानी को लेकर एक शोधपत्र तैयार किया था जिसमें सुजान गंगा नहर में बढ़ते जलीय प्रदूषण को लेकर राजस्स्थान सरकार को आगाह किया गया था कि इसका जल भयंकर प्रदूषण के कारण अपना रंग बार-बार बदल रहा है जो जलीय जीव-जंतुओं और शहर की जनता के लिए खतरनाक है। इसके बाद भी सरकार ने कोई कारगर कदम नहीं उठाए नहर के उद्धार के नाम पर करोड़ों को बंदर-बांट हो गई।
स्थानीय राजनीतिक इच्छा शक्ति की कमी के कारण भरतपुर के लोगों का सपना पूरा नहीं हो पा रहा है। नहर की सफाई के लिए इस बार फिर भले ही प्रयास हो रहे हों, लेकिन लोगों को संदेह बना हुआ है कि कहीं पिछली बार की तरह यह एक बार फिर ड्रामा बनकर नहीं रह जाए।
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