पत्रकार आवास योजना पर उठे सवाल, 76.68 लाख के प्लॉट पर 15 लाख की छूट भी नाकाफी, सस्ती आवासीय सुविधा की मांग

राजस्थान में पत्रकार आवास योजना की कीमत, लोकेशन और निर्माण समयसीमा पर एसोसिएशन ऑफ स्मॉल एंड मीडियम न्यूजपेपर्स ऑफ इंडिया ने मुख्यमंत्री से पुनर्विचार की मांग की।

जयपुर। पत्रकारों के लिए आवास की योजना घोषित होने के बाद अब उसकी कीमत, लोकेशन और वास्तविक उपयोगिता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। एसोसिएशन ऑफ स्मॉल एंड मीडियम न्यूजपेपर्स ऑफ इंडिया ने राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र भेजकर अधिस्वीकृत पत्रकारों के लिए प्रस्तावित आवासीय योजना पर पुनर्विचार करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि महंगे प्लॉट पर घोषित रियायत के बावजूद अनेक पत्रकारों के लिए मकान खरीदना आर्थिक रूप से मुश्किल रह सकता है।

प्रदेशाध्यक्ष गोपाल गुप्ता की ओर से भेजे गए पत्र में राजस्थान आवासन मंडल की पत्रकार आवास योजना के विभिन्न पहलुओं पर सवाल उठाते हुए सरकार से किफायती आवासीय भूखंड या मकान उपलब्ध कराने का आग्रह किया गया है।

76.68 लाख का प्लॉट, 15 लाख की छूट; फिर भी कितना किफायती?

पत्र में राजस्थान आवासन मंडल की ग्रीनवुड होराइजन योजना का उल्लेख किया गया है। संगठन के अनुसार, प्रताप नगर स्थित इस योजना में करीब 1400 वर्गफुट कार्पेट एरिया वाले प्लॉट की कीमत 76.68 लाख रुपये बताई गई है।

पत्र में 17 अक्टूबर को मुख्यमंत्री की ओर से अधिस्वीकृत पत्रकारों के लिए घोषित 15 लाख रुपये की रियायत का स्वागत किया गया है। हालांकि, संगठन का तर्क है कि छूट के बाद भी प्लॉट की प्रभावी कीमत अनेक पत्रकारों की आर्थिक क्षमता से बाहर रह सकती है। इसी वजह से करीब 70 प्रतिशत तक छूट अथवा समान प्रभाव वाली विशेष मूल्य रियायत देने की मांग की गई है।

संगठन ने यह भी कहा है कि पत्रकारों की आय एक जैसी नहीं होती। खासकर छोटे और मध्यम समाचार पत्रों, स्थानीय समाचार माध्यमों तथा स्वतंत्र पत्रकारिता से जुड़े लोगों के लिए इतनी बड़ी रकम जुटाना आसान नहीं है। प्लॉट खरीदने के लिए ऋण लेने की स्थिति में मासिक किस्तों का बोझ परिवार के घरेलू खर्च, बच्चों की शिक्षा और चिकित्सा जैसी जरूरतों को प्रभावित कर सकता है।

लोकेशन और आसपास की कीमतों की तुलना की मांग

पत्र में योजना की लोकेशन को लेकर भी सवाल उठाया गया है। संगठन ने ग्रीनवुड होराइजन की स्थिति की तुलना पत्रकारों के लिए प्रस्तावित आवासीय योजना की लोकेशन से करते हुए कहा है कि दोनों स्थानों की सुविधाओं, परिवहन, सामाजिक वातावरण और भविष्य में विकसित होने वाली सुविधाओं का निष्पक्ष आकलन किया जाना चाहिए।

पत्र के अनुसार, पत्रकारों के लिए प्रस्तावित आवासीय योजना की लोकेशन यूएन के पीछे, खो नागोरियान क्षेत्र में बताई गई है। संगठन का आग्रह है कि इस स्थान पर उपलब्ध नागरिक सुविधाओं, सार्वजनिक परिवहन, सुरक्षा और आसपास के आवासीय माहौल की तुलना दूसरी योजना से की जाए।

संगठन ने सरकार से यह भी कहा है कि दोनों स्थानों की कीमत, सुविधाओं, निर्माण गुणवत्ता और कार्पेट एरिया का तुलनात्मक विवरण सार्वजनिक किया जाए, ताकि पत्रकार यह समझ सकें कि उनसे ली जाने वाली राशि के बदले उन्हें वास्तव में क्या सुविधाएं मिलेंगी।

जुलाई 2033 तक निर्माण पूरा होने की समयसीमा पर सवाल

पत्र में राजस्थान रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) की वेबसाइट पर संबंधित परियोजना की पूर्णता अवधि जुलाई 2033 दर्ज होने का उल्लेख किया गया है। संगठन ने इस समयसीमा की पुष्टि करने और परियोजना की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।

पत्र में कहा गया है कि यदि यही समयसीमा पत्रकार आवास परियोजना पर लागू होती है, तो मौजूदा आवासीय जरूरतों के लिहाज से यह गंभीर विषय है। संगठन के मुताबिक, पत्रकारों को आवास की आवश्यकता अभी है, जबकि निर्माण पूरा होने में कई वर्ष लगने की स्थिति उनके लिए तत्काल समाधान नहीं देगी। इसी आधार पर परियोजना की निर्माण स्थिति, संभावित कब्जा तिथि और भुगतान की शर्तों की समीक्षा करने की मांग की गई है। संगठन चाहता है कि पत्रकारों को आर्थिक प्रतिबद्धता से पहले परियोजना के बारे में पूरी जानकारी उपलब्ध हो।

महंगे प्लॉट के बजाय 138 वर्गमीटर का आवासीय भूखंड देने का सुझाव

संगठन ने महंगे प्लॉट के विकल्प के रूप में जयपुर के किसी विकसित या विकासशील, लेकिन रहने योग्य क्षेत्र में 138 वर्गमीटर का आवासीय भूखंड कम कीमत पर उपलब्ध कराने का सुझाव दिया है। पत्र में कहा गया है कि ऐसा विकल्प अनेक पत्रकारों के लिए अधिक व्यावहारिक हो सकता है। पत्र में यह भी उल्लेख है कि प्रस्तावित योजना की लोकेशन के आसपास लगभग 1200 वर्गफुट क्षेत्रफल के प्लॉट करीब 55 लाख रुपये तक की कीमत में उपलब्ध होने की जानकारी है। संगठन ने इस आधार पर आसपास के समान आकार के भूखंडों की बाजार दरों को ध्यान में रखते हुए कीमत तय करने की मांग की है।

सरकार से क्या हैं संगठन के आठ प्रमुख आग्रह?

एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री से आवास योजना पर पुनर्विचार करते हुए आठ प्रमुख मांगें रखी हैं—

  • प्रस्तावित आवासीय योजना की कीमत और लोकेशन की निष्पक्ष समीक्षा की जाए।

  • ग्रीनवुड होराइजन और पत्रकार आवास योजना की कीमत, सुविधाओं, कार्पेट एरिया तथा निर्माण गुणवत्ता की तुलना सार्वजनिक की जाए।

  • रेरा में दर्ज जुलाई 2033 की पूर्णता तिथि की पुष्टि कर परियोजना की वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए।

  • 74.68 लाख रुपये जैसे भारी मूल्य वाले प्लॉट के बजाय 138 वर्गमीटर का किफायती आवासीय भूखंड उपलब्ध कराने पर विचार हो।

  • घोषित 15 लाख रुपये की छूट को बढ़ाकर मूल कीमत पर लगभग 70 प्रतिशत तक किया जाए अथवा समान प्रभाव वाली विशेष रियायत मिले।

  • आसपास उपलब्ध लगभग 50 लाख रुपये तक के 1200 वर्गफुट प्लॉट की कीमतों को ध्यान में रखकर योजना की अंतिम कीमत का पुनर्निर्धारण किया जाए।

  • पत्रकारों के लिए सरल भुगतान व्यवस्था और वहनीय किस्तों का विकल्प बनाया जाए।

  • अंतिम निर्णय लेने से पहले पत्रकार संगठनों के प्रतिनिधियों, वरिष्ठ पत्रकारों और संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक की जाए।

योजना ऐसी हो, जिसे पत्रकार वास्तव में खरीद सकें

संगठन ने अपने पत्र में जोर दिया है कि पत्रकारों को आवास उपलब्ध कराना केवल सरकारी योजना शुरू करने का विषय नहीं है, बल्कि उनकी आर्थिक स्थिति और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा सवाल भी है। संगठन के अनुसार, योजना की सफलता तभी होगी, जब पत्रकार वास्तविक रूप से उसका लाभ उठाने की स्थिति में हों।

पत्र में मुख्यमंत्री से आग्रह किया गया है कि भवन निर्माण की लागत और राजस्व प्राप्ति के साथ-साथ पत्रकारों की आय, नौकरी की प्रकृति, सीमित बचत और पारिवारिक जिम्मेदारियों को भी ध्यान में रखा जाए। संगठन ने पत्रकारों की समस्याएं सुनने के बाद ही योजना को अंतिम रूप देने की मांग की है।

अब सवाल यह है कि सरकार घोषित रियायत के बाद योजना को अंतिम रूप देगी या पत्रकारों की आर्थिक क्षमता और आवास की वास्तविक जरूरतों को देखते हुए इसकी कीमत, लोकेशन और शर्तों पर नए सिरे से विचार करेगी?

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