इकलौते बेटे की दरिंदगी: पिता को गोली मार बाथरूम में आरी से काटा शव | टुकड़े ड्रम में भरे, सिर 21 किमी दूर फेंका, बदबू छिपाने को छिड़कता रहा स्प्रे

लखनऊ (Lucknow) में बेटे अक्षत प्रताप सिंह ने पिता मानवेंद्र सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी, शव के टुकड़े कर ड्रम में भर दिए और सिर 21 किमी दूर फेंक दिया।

लखनऊ 

यह सिर्फ एक हत्या नहीं, यह उस भरोसे की निर्मम हत्या है, जो एक पिता अपने इकलौते बेटे पर करता है। आशियाना के सेक्टर-L में रहने वाले पैथोलॉजी लैब संचालक मानवेंद्र सिंह को शायद यह अंदाजा भी नहीं रहा होगा कि जिस बेटे के भविष्य के लिए वह सपने बुन रहे थे, वही उनकी जिंदगी का आखिरी फैसला लिख देगा।

20 फरवरी की सुबह 4:30 बजे, जब शहर नींद में था, घर की तीसरी मंजिल पर एक बेटा अपने पिता के सामने खड़ा था—हाथ में लाइसेंसी राइफल और दिल में गुस्से का तूफान। ट्रिगर दबा… और एक गोली ने पिता की सांसें छीन लीं। आरोपी बेटा अक्षत प्रताप सिंह यहीं नहीं रुका। उसने उस शरीर को भी नहीं छोड़ा, जिसमें कभी उसके लिए धड़कन थी।

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बहन के सामने हत्या, फिर शव को आरी से काटा

गोली चलने की आवाज के साथ घर की दीवारें कांप उठीं। पास खड़ी बहन चीखना चाहती थी, लेकिन भाई की धमकी ने उसकी आवाज को वहीं कैद कर दिया—“अगर किसी को बताया, तो तुम भी जिंदा नहीं बचोगी।”

इसके बाद जो हुआ, वह इंसानियत को शर्मसार करने वाला था। आरोपी बाजार से आरी खरीदकर लाया और अपने ही पिता के शव को टुकड़ों में काट डाला। शरीर के हिस्सों को पॉलीथिन में भरकर एक नीले ड्रम में ठूंस दिया। सिर को कार में रखा और 21 किलोमीटर दूर सुनसान इलाके में फेंक आया—मानो वह कोई रिश्ता नहीं, बल्कि एक सबूत मिटा रहा हो।

घर में बदबू न फैले, इसलिए वह लगातार रूम फ्रेशनर छिड़कता रहा। कार को धोया, फर्श साफ किया—जैसे वह अपने अपराध के निशान मिटा सकता हो। लेकिन दीवारों पर पसरा सन्नाटा सब कुछ बयां कर रहा था।

आरोपी बेटा अक्षत
नीले ड्रम में पन्नी के अंदर मानवेंद्र सिंह का धड़

तीन दिन तक रचा झूठ का नाटक, फिर खुद ही पहुंचा थाने

हत्या के बाद आरोपी तीन दिन तक सामान्य जीवन जीने का अभिनय करता रहा। फिर खुद ही थाने पहुंचा और पिता की गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखवाई। बोला—’पापा दिल्ली गए हैं, लौटे नहीं।’

लेकिन पुलिस की नजरें सच को पहचान चुकी थीं। पूछताछ में उसका आत्मविश्वास टूटने लगा। सवालों का दबाव बढ़ा तो झूठ बिखर गया। और फिर उसने कबूल कर लिया—जिस पिता ने उसे जन्म दिया, उसी की जिंदगी उसने खत्म कर दी।

एक सपना, जो पिता देख रहे थे… और बेटा तोड़ना चाहता था

जांच में सामने आया कि मानवेंद्र सिंह चाहते थे कि उनका बेटा NEET पास कर डॉक्टर बने। लेकिन अक्षत उस सपने को अपना नहीं मानता था। वह रेस्टोरेंट या लॉन खोलना चाहता था। यही मतभेद धीरे-धीरे विवाद में बदला, और विवाद ने हत्या का रूप ले लिया।

विडंबना यह है कि जिस पिता ने पत्नी की मौत के बाद अकेले बेटे-बेटी को संभाला, उसी बेटे ने उन्हें सबसे दर्दनाक मौत दी।

अब उस घर में सिर्फ सन्नाटा है

तीन मंजिला मकान, जहां कभी परिवार की आवाजें गूंजती थीं, अब वहां पुलिस की आवाजें हैं, सवाल हैं और एक गहरा सन्नाटा है।

यह हत्याकांड सिर्फ एक व्यक्ति की मौत नहीं है—यह उस रिश्ते की मौत है, जिसे दुनिया का सबसे पवित्र रिश्ता कहा जाता है।

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