राज्यपाल हरिभाऊ बागडे (Governor Haribhau Bagde) का कड़ा संदेश—’सुधरो या बंद हो जाओ।’ राजस्थान की उच्च शिक्षा (Higher Education) में अब नो एक्सक्यूज़ ज़ोन, गुणवत्ता और नेक रैंकिंग पर सख्ती।
जयपुर
राजस्थान (Rajasthan) की उच्च शिक्षा व्यवस्था के लिए अब चेतावनी नहीं, निर्णय का समय है। लोकभवन में हुई कुलगुरु समन्वय समिति की बैठक में राज्यपाल एवं कुलाधिपति हरिभाऊ बागडे ने साफ शब्दों में कह दिया कि जिन शिक्षण संस्थानों में गुणवत्ता नहीं है, वे या तो खुद को सुधारें—या फिर बंद होने के लिए तैयार रहें। राज्यपाल का संदेश एकदम स्पष्ट था—अब कोई बहाना, कोई ढील और कोई समझौता नहीं।
राज्यपाल ने दो टूक कहा कि राज्य में शैक्षिक गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जिन कॉलेजों या शिक्षण संस्थानों को बगैर अनुमति विश्वविद्यालय स्तर पर मान्यता दी गई है, वहां सख्त कार्रवाई तय है। उन्होंने विश्वविद्यालयों को मजबूत करने और कुलगुरुओं का मनोबल बढ़ाने के लिए भी ठोस कदम उठाने पर जोर दिया।
नेक रैंकिंग: अब समयसीमा में नतीजे चाहिए
बैठक में राज्यपाल ने सभी विश्वविद्यालयों को NAAC (नेक) रैंकिंग के लिए प्रभावी और समयबद्ध कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने विश्वविद्यालयवार कुलगुरुओं से सीधे यह जाना कि नेक प्रक्रिया में कहां-कहां अड़चनें आ रही हैं।
राज्यपाल ने स्पष्ट कहा कि पाठ्यक्रम, शिक्षण पद्धति और अकादमिक नवाचार से जुड़े लंबित कार्य अब और नहीं लटकने चाहिए। भर्ती, वित्तीय स्वीकृति और विश्वविद्यालय स्वीकृतियों से जुड़ी फाइलें किसी भी स्तर पर अनिर्णय की स्थिति में नहीं रहनी चाहिए—इस पर उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए।
शिक्षा का मतलब केवल डिग्री नहीं
राज्यपाल बागडे ने नई शिक्षा नीति के तहत विद्यार्थियों की बौद्धिक क्षमता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने विश्वविद्यालयों में भारतीय इतिहास, संस्कृति, ज्ञान परंपरा और जीवन मूल्यों से जुड़ी शिक्षा को और मजबूत करने की आवश्यकता बताई।
उन्होंने निर्देश दिए कि पुस्तकों से लुप्त हो चुके महत्वपूर्ण भारतीय विषयों और ज्ञान परंपरा को विश्वविद्यालय परिसरों में चयनित दीवारों पर प्रदर्शित किया जाए, ताकि विद्यार्थी रोज़ उनसे जुड़ सकें।
इसके साथ ही, उन्होंने विद्यार्थी–अध्यापक संवाद को शिक्षा का अनिवार्य हिस्सा बताते हुए माह में दो बार या सप्ताह में एक बार नियमित संवाद शुरू करने पर बल दिया।
दीक्षांत, ऑडिट और सामाजिक जिम्मेदारी
राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों को निर्देश दिए कि
- दीक्षांत समारोह हर वर्ष आयोजित किए जाएं,
- खर्च न्यूनतम रखा जाए,
- महालेखाकार ऑडिट प्रतिवर्ष अनिवार्य रूप से कराया जाए।
उन्होंने विश्वविद्यालयों द्वारा गांव गोद लेकर उनके विकास, शिक्षा सुधार और गरीबी उन्मूलन के लिए सक्रिय भूमिका निभाने पर भी जोर दिया। तकनीकी विश्वविद्यालयों को गांवों में कौशल विकास से जुड़े प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने के निर्देश भी दिए गए।
सरकार का भरोसा: भर्तियां और संसाधन बढ़ेंगे
उपमुख्यमंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री प्रेमचंद बैरवा ने बताया कि नेक रैंकिंग के मद्देनज़र विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की भर्ती के लिए प्रस्ताव मंगाए जा चुके हैं। रिक्त पदों का रोस्टर बनाकर जल्द भर्तियां की जाएंगी।
उन्होंने पेंशन, भवन और अन्य आवश्यक सुविधाओं को लेकर मुख्यमंत्री स्तर पर चर्चा कर सकारात्मक फैसलों का भरोसा भी दिलाया।
विकास योजनाओं और सुधारों पर विस्तृत मंथन
उच्च शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव कुलदीप रांका ने विश्वविद्यालयों में ग्लोबल टैलेंट रिटर्न स्कीम, प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस, कौशल विकास और रिक्त पदों को भरने से जुड़ी कार्यवाही की जानकारी दी।
विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने विश्वविद्यालयों के राजस्व सृजन, व्यय नियंत्रण और गुणवत्ता सुधार पर अपने सुझाव रखे।
बैठक के आरंभ में राज्य के वित्तपोषित विश्वविद्यालयों के कुलगुरुओं ने अपने-अपने संस्थानों में किए जा रहे नवाचार, नेक एक्रेडिटेशन और नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन की स्थिति से अवगत कराया।
नई हवा खबरें अपने मोबाइल पर नियमित और डायरेक्ट प्राप्त करने के लिए व्हाट्सएप नंबर 9460426838 सेव करें और ‘Hi’ और अपना नाम, स्टेट और सिटी लिखकर मैसेज करें। आप अपनी खबर या रचना भी इस नंबर पर भेज सकते हैं।
‘नई हवा’ की खबरों को Subscribe करने के लिए हमारे WhatsApp Channel से जुड़ें।
