दौसा
दौसा (Dausa) शहर के मुर्शिद नगर लालसोट बाईपास स्थित दरगाह में हज़रत ख़्वाजा सूफ़ी हकीमुद्दीन शाह (Hazrat Khwaja Sufi Hakimuddin Shah) के 41वें सालाना उर्स के तहत रात्रि में मीलाद शरीफ़ एवं कव्वालियों का आयोजन हुआ। मीलाद शरीफ में सूफ़ी स्कॉलरों ने अपने–अपने व्याख्यान पेश किए।
व्याख्यान में सूफीवाद पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि सूफ़ी का काम शांति कायम करवाना है। सूफ़ी भाईचारा, प्रेम, शांति, सद्भाव करने की कोशिश करता है। सूफ़ी के यहां सभी लोगों के विचार सुने जाते हैं। सभी की मुराद पूरी की जाती हैं। दुनिया में सूफ़ी की अहमियत के बारे में भी बताया गया। उर्स के दूसरे दिन मंगलवार को दरगाह परिसर में जायरीनों का तांता लगा रहा। मुल्क की तरक्की और शांति के लिए दुआ की गई। जायरीनों ने मजार शरीफ़ पर मखमल की चादर एवं अकीदत के फूल पेश किए।
हज़रत ख़्वाजा सूफ़ी हकीमुद्दीन शाह के सालाना उर्स के अवसर पर दरगाह के खादिमों की ओर से आने वाले जायरीनों को तबर्रूख (प्रसाद) के रूप में शीरीनी, मिठाईयां दी गई। लंगर खाने में हजारों लोगों ने सामूहिक रूप से पंक्ति में बैठकर लंगर (भोजन) ग्रहण किया। सम्पूर्ण दरगाह परिसर में लोगों की भीड़ देखने को मिली। उर्स के साथ मेले का भी आयोजन किया गया। जिसमें झूले, चकरी, खिलौने, चाट–पकौड़ी की दुकाने आदि भी देखने को मिला।
कव्वालों ने सूफीयाना कव्वाली सुनाई। लोगों को सूफ़ी के प्रेम के बारे में बताया। महफ़िल की सरपरस्ती हज़रत सूफ़ी इकबाल अहमद शाह मुजफ्फरी ने की। सूफ़ी डॉ. अब्दुल लतीफ शाह उर्फ अन्ना मियां ने बताया कि उर्स के तीसरे दिन बुधवार को सुबह 11 बजे कुल की रस्म अदा की जाएगी।
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