बागपत
उत्तर प्रदेश (UP) के बागपत (Bagpat) जिले के बड़ौत (Baraut) मंगलवार सुबह एक हृदयविदारक हादसा हुआ, जिसने हजारों श्रद्धालुओं की भावनाओं को झकझोर दिया। भगवान आदिनाथ के निर्वाण लड्डू पर्व के दौरान बने 65 फीट ऊंचे लकड़ी के मंच के ढहने से 7 लोगों की मौत हो गई, जबकि 75 से अधिक लोग घायल हो गए। खून से लथपथ श्रद्धालुओं को अस्पताल पहुंचाया गया। हादसे के बाद का दृश्य मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देने वाला था।
मंच ढहा, भगदड़ में हुई मौतें
बड़ौत के श्री दिगंबर जैन डिग्री कॉलेज ग्राउंड में आयोजित निर्वाण महोत्सव के दौरान 65 फीट ऊंचा लकड़ी का मंच बनाया गया था। श्रद्धालु भगवान आदिनाथ की प्रतिमा तक लड्डू चढ़ाने के लिए मचान पर चढ़ रहे थे। भारी भीड़ और मचान पर बढ़ते वजन के चलते पूरा ढांचा भरभराकर गिर गया। नीचे गिरे लकड़ी के टुकड़ों में फंसे लोगों की चीख-पुकार से माहौल गमगीन हो गया।
बागपत में बड़ा हादसा: निर्वाण महोत्सव में 65 फीट ऊंचा मंच टूटते ही मची अफरा-तफरी, 80 श्रद्धालु घायल pic.twitter.com/a2gWU9VXJK
— Raju Sharma (@RajuSha98211687) January 28, 2025
खून से लथपथ लोग, व्यवस्थाओं की कमी
हादसे के बाद घायलों को तत्काल मदद की दरकार थी, लेकिन मौके पर एंबुलेंस तक मौजूद नहीं थी। मजबूरी में लोगों ने घायलों को ई-रिक्शा और ठेलों में डालकर अस्पताल पहुंचाया। कई तस्वीरें और वीडियो में घायल लोग लकड़ी के टुकड़ों में फंसे नजर आए।
मरने वालों में परिवार बिखरे
इस हादसे में जिनकी जानें गईं, उनमें तरसपाल (66), अमित (35), अरुण (48), ऊषा (24), शिल्पी (24), विनीत जैन (40) और कमलेश जैन (65) शामिल हैं। इन परिवारों पर अचानक गमों का पहाड़ टूट पड़ा।
शासन-प्रशासन की जांच शुरू
घटना की जानकारी मिलते ही जिला अधिकारी अस्मिता लाल और एसपी मौके पर पहुंचे। शुरुआती जांच में पता चला कि हाल ही में ग्राउंड का भराव हुआ था, लेकिन भारी भीड़ के दबाव के चलते मिट्टी धंस गई और मचान टूट गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना का संज्ञान लेते हुए राहत कार्य में तेजी लाने और घायलों के समुचित इलाज के निर्देश दिए।
650 साल पुराना मंदिर, आस्था का केंद्र
यह हादसा श्री दिगंबर जैन मंदिर परिसर में हुआ, जो 650 साल पुराना है और जैन समुदाय में इसकी गहरी मान्यता है। निर्वाण महोत्सव में हर साल हजारों श्रद्धालु देशभर से शामिल होते हैं।
संवेदनाएं और सवाल
बागपत की यह घटना प्रशासनिक व्यवस्थाओं और सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। क्या इतने बड़े आयोजन में भीड़ को संभालने के लिए पर्याप्त तैयारी की गई थी? हादसे में बिखरी जिंदगियों की पीड़ा को संभालने के लिए संवेदनशीलता और सुधार की आवश्यकता है।
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