केंद्र सरकार ने CGHS के तहत मेडिकल रीइम्बर्समेंट की सीमा 5 लाख से बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दी है। मंत्रालयों के हेड अब बिना IFD सलाह के 10 लाख तक के क्लेम निपटा सकेंगे।
नई दिल्ली
केंद्र सरकार के कर्मचारियों (Central government employees) और पेंशनर्स (Pensioners) के लिए बड़ी खुशखबरी है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) ने Central Government Health Scheme (CGHS) के तहत मेडिकल रीइम्बर्समेंट की अधिकतम सीमा बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दी है। इससे पहले यह लिमिट 5 लाख रुपये थी।
क्या बदला है?
जारी ऑफिस मेमोरेंडम (OM) के अनुसार अब मंत्रालयों और विभागों के हेड बिना इंटीग्रेटेड फाइनेंस डिवीजन (IFD) से सलाह लिए 10 लाख रुपये तक के मेडिकल क्लेम का निपटान कर सकेंगे — बशर्ते तय शर्तें पूरी हों।
इसके साथ ही जिन मामलों में नियमों में कोई छूट नहीं दी जाती और भुगतान पूरी तरह CGHS/CS(MA) की तय दरों पर होता है, उनकी निपटान सीमा 2 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दी गई है।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि पहले 23 नवंबर 2016 के OM के तहत यह सीमा 2 लाख से बढ़ाकर 5 लाख की गई थी, जिसे अब और विस्तार दिया गया है।
10 लाख की बढ़ी सीमा पर दो साफ शर्तें
- क्लेम में CGHS या CS(MA) नियमों में किसी प्रकार की छूट नहीं दी जानी चाहिए।
- रीइम्बर्समेंट की राशि पूरी तरह CGHS/CS(MA) की तय दरों के अनुसार ही हो।
सरकार के इस फैसले से मेडिकल बिल पास होने की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है, क्योंकि अब बड़े क्लेम के लिए बार-बार वित्तीय मंजूरी की प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा।
पेंशनर्स को क्या करना होगा?
पेंशनर्स को उपचार पूरा होने या अस्पताल से डिस्चार्ज के 6 महीने के भीतर संबंधित सीएमओ (वेलनेस सेंटर), जहां उनका CGHS कार्ड रजिस्टर्ड है, वहां आवेदन करना होगा। इसके साथ निम्न दस्तावेज जरूरी हैं:
- भरा हुआ मेडिकल रीइम्बर्समेंट क्लेम फॉर्म
- चेकलिस्ट
- डिस्चार्ज समरी की कॉपी
- रेफरल/परमिशन स्लिप की कॉपी
- (यदि लागू हो) इमरजेंसी सर्टिफिकेट की कॉपी
- मूल अस्पताल बिल
- मूल रसीदें
- वैध CGHS कार्ड की कॉपी
- ECS के लिए बैंक डिटेल वाला कैंसल चेक
यदि चेक पर लाभार्थी का नाम प्रिंटेड नहीं है, तो उसकी जगह बैंक विवरण वाला मैंडेट फॉर्म जमा करना होगा।
एम्बुलेंस चार्ज भी रीइम्बर्सेबल
CGHS स्कीम के तहत शहर के भीतर एम्बुलेंस चार्ज भी रीइम्बर्सेबल है — बशर्ते इलाज करने वाले डॉक्टर का प्रमाण पत्र हो कि अन्य माध्यम से ले जाने पर मरीज के जीवन को खतरा हो सकता था या उसकी स्थिति गंभीर रूप से बिगड़ सकती थी।
कुल मिलाकर, यह फैसला केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए राहत भरा कदम माना जा रहा है, जिससे इलाज के खर्च की भरपाई अब पहले से कहीं ज्यादा आसान और तेज हो सकेगी।
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