नई दिल्ली
राजस्थान के अभिभावकों को सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले से झटका लगा। सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी है जिसमें उसने कोरोनाकाल में स्कूली बच्चों से 70% फीस लेने के आदेश दिए थे। इस मामले में निजी स्कूलों ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। उन्होंने अभिभावकों से पूरी फीस लेने की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने निजी स्कूलों के खिलाफ अवमानना याचिकाओं को भी खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब निजी स्कूल कोरोना काल की पूरी फीस वसूल सकेंगे। इस फैसले के बाद कोरोना की इस दूसरी लहर में अभिभावकों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस कृष्णा मुरारी की बैंच ने यह फैसला सुनाया। आपको बता दें कि इसी मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने 8 फरवरी को अंतरिम फैसला देते हुए कहा था कि अभिभावकों को सत्र 2020-21 की पूरी फीस देनी होगी। हालांकि अभिभावकों को राहत देते हुए कोर्ट ने तब यह फीस 6 किस्तों में अदा करने की छूट दी थी। हालांकि विस्तृत फैसला आने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि निजी स्कूलें कितनी और किस तरह से फीस की वसूली (Collection of fees) कर सकेंगी।
हाई कोर्ट का यह था फैसला
राजस्थान हाई कोर्ट ने 18 दिसम्बर, 2020 को फैसला सुनाते हुए कहा था कि प्रदेश की निजी स्कूलें जो माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से सम्बद्ध रखती हैं वे 60 फीसदी ट्यूशन फीस और जो स्कूलें सीबीएसई से एफिलेटेड हैं वे 70 फीसदी ट्यूशन फीस वसूल कर सकती हैं। हाई कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ भारतीय विद्या भवन और एसएमएस सहित प्रदेश के कई नामी स्कूल सुप्रीम कोर्ट चले गए थे। स्कूलों की तरफ से अधिवक्ता प्रतीक कासलीवाल, अधिवक्ता अनुरूप सिंघी व अन्य ने पैरवी की।
राजस्थान सरकार फैसले का करेगी अध्ययन
अब अभिभावकों को भी इस संबंध में राजस्थान सरकार के अगले कदम का इंतजार है। फ़िलहाल सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राजस्थान के शिक्षा मंत्री का एक बयां सामने आया है जिसमें उनका कहना है कि राज्य सरकार पहले सुप्रीम कोर्ट के फैसले का अध्ययन करेगी। इसके बाद ही कोई फैसला करेंगे। हम चाहते हैं कोर्ट की भी गरिमा रहे और हमारे अभिभावकों के साथ भी कोई अन्याय न हो।
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