नई दिल्ली
राजनीतिक गलियारों ज्यादातर खादी के कुरता-पायजामा और जैकेट में नजर आने वाले राजस्थान कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट शनिवार को सेना की वर्दी में नजर आए। सेना की वर्दी में सचिन हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच रहे थे। आज सचिन पायलट सेना की ड्रेस (Sachin pilot in army uniform) में अभ्यास करते हुए दिखाई दिए।
दरअसल सचिन पायलट टेरिटोरियल आर्मी में कैप्टन हैं। 3 महीने पहले ही सचिन पायलट का प्रमोशन लेफ्टिनेंट से कैप्टन पद पर हुआ था, इसके बाद आज सचिन पायलट दिल्ली के इंडिया गेट पर अपनी यूनिट 124 सिख रेजीमेंट की जनरल मीटिंग में शामिल हुए। इसके बाद सचिन पायलट ने अपनी रेजीमेंट के ड्रिल (अभ्यास) में हिस्सा लिया।
आपको बता दें कि टेरिटोरियल आर्मी में भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान रहे महेंद्र सिंह धोनी, सचिन तेंदुलकर, कपिल देव और केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर भी हैं। टेरिटोरियल आर्मी को सेकंड लाइन ऑफ डिफेंस कहा जाता है, इसमें मिलिट्री ट्रेनिंग पोलिंग तैयार होते हैं। इस समय टेरिटोरियल आर्मी में 50 हजार जवान हैं।
सचिन ने 2012 में ज्वाइन की थी टेरिटोरियल आर्मी
सचिन पायलट ने सात साल पहले वर्ष 2012 में टेरिटोरियल आर्मी ज्वाइन की थी। वे उस समय केंद्रीय दूरसंचार राज्यमंत्री थे। टेरिटोरियल आर्मी ज्वाइन करने के साथ ही पायलट इसमें लेफ्टिनेंट बन गए थे। उन्हें बतौर रेग्युलर ऑफिसर टेरिटोरियल आर्मी में शामिल किया गया था। पायलट ये उपलब्धि हासिल करने वाले पहले मंत्री हैं। अब 3 महीने पहले ही सचिन पायलट का प्रमोशन लेफ्टिनेंट से कैप्टन पद पर हुआ है।
सचिन पायलट के पिता राजेश पायलट और दादा जय दयाल भी सेना से ही जुड़े थे। दादा इंफेंट्री में सैनिक थे। पिता वायुसेना में लड़ाकू पायलट थे। साल 2012 में हुए एक कार्यक्रम में तब के सेना प्रमुख रहे जनरल बिक्रम सिंह ने साउथ ब्लॉक स्थित अपने कार्यालय में सचिन पायलट के कंधे पर रैंक का फीता लगाकर उन्हें टेरिटोरियल आर्मी में शामिल किया था।उस दौरान पायलट की मां रमा पायलट भी उपस्थित थीं।
क्या होती है टेरिटोरियल आर्मी
टेरिटोरियल आर्मी यानी प्रादेशिक सेना, भारतीय सेना की एक ईकाई और सेवा है। इसके स्वयंसेवकों को प्रतिवर्ष कुछ दिनों का सैनिक प्रशिक्षण दिया जाता है ताकि आवश्यकता पड़ने पर देश की रक्षा के लिए उनकी सेवायें ली जा सकें।
भारतीय संविधान सभा द्वारा सितंबर, 1948 में पारित प्रादेशिक सेना अधिनियम 1948, के अनुसार भारत में अक्टूबर, 1949 में प्रादेशिक सेना स्थापित हुई। इसका उद्देश्य संकटकाल में आंतरिक सुरक्षा का दायित्व लेना और आवश्यकता पड़ने पर नियमित सेना को यूनिट (दल) प्रदान करना है। साथ ही नवयुवकों को देशसेवा का अवसर प्रदान करना है। इसमें होने के लिए आयु सीमा 18 और 35 वर्ष है। सेवानिवृत्त सैनिकों और प्राविधिज्ञ सिविलियनों के लिए शिथिलता दी जा सकती है।
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