जजों की अनिवार्य रिटायरमेंट पर बदली व्यवस्था, राजस्थान हाईकोर्ट ने उठाया यह कदम

राजस्थान हाईकोर्ट ने न्यायिक अधिकारियों की अनिवार्य सेवानिवृत्ति के मामलों की समीक्षा के लिए पांच जजों की कमेटी बनाई। पुरानी समितियों को सौंपे गए मामले भी इसके विचारार्थ होंगे।

जयपुर। न्यायिक अधिकारियों की अनिवार्य सेवानिवृत्ति से जुड़े मामलों में अब समीक्षा की जिम्मेदारी पांच न्यायाधीशों की एक नई स्क्रीनिंग कमेटी संभालेगी। राजस्थान हाईकोर्ट ने इस संबंध में प्रशासनिक आदेश जारी किया है। इस फैसले का दायरा सिर्फ आगे आने वाले मामलों तक सीमित नहीं है। पहले दो अलग-अलग समितियों को सौंपे गए मामले भी नई कमेटी के सामने रखे जाएंगे।

इस बदलाव की अहमियत इसलिए है कि अनिवार्य सेवानिवृत्ति से जुड़े मामलों को देखने के लिए पहले उच्च न्यायपालिका समिति और अधीनस्थ न्यायपालिका समिति की व्यवस्था थी। अब 26 सितंबर 2026 के आदेश के तहत इन समितियों को सौंपे गए मामलों को भी नई स्क्रीनिंग कमेटी के विचारार्थ लेने का निर्देश दिया गया है।

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पांच जजों की टीम में कौन-कौन?

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजय के. अग्रवाल की स्वीकृति से गठित कमेटी में राजस्थान हाईकोर्ट के ये पांच न्यायाधीश शामिल हैं:

  • जस्टिस विनीत कुमार माथुर

  • जस्टिस इंद्रजीत सिंह

  • जस्टिस अनूप कुमार ढंड

  • जस्टिस समीर जैन

  • जस्टिस आशुतोष कुमार

कमेटी को न्यायिक अधिकारियों की अनिवार्य सेवानिवृत्ति से संबंधित मामलों की जांच और समीक्षा का जिम्मा दिया गया है।

समीक्षा के दायरे में आएंगे तीन न्यायिक संवर्ग

नई व्यवस्था में जिला न्यायाधीश संवर्ग के अधिकारियों के साथ सीनियर सिविल जज और सिविल जज संवर्ग के मामले भी शामिल होंगे। यानी समीक्षा का दायरा न्यायिक सेवा के इन तीनों संवर्गों तक रहेगा। रजिस्ट्रार जनरल की ओर से जारी आदेश में राजस्थान सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1996 के नियम 53(1) को इस प्रक्रिया का आधार बताया गया है। मामलों पर इसी प्रावधान के तहत विचार किया जाएगा।

पुराने मामलों का क्या होगा?

आदेश में स्पष्ट किया गया है कि 26 सितंबर 2026 को जारी आदेश के तहत उच्च न्यायपालिका समिति और अधीनस्थ न्यायपालिका समिति को दिए गए अनिवार्य सेवानिवृत्ति के मामले भी अब नई स्क्रीनिंग कमेटी के विचारार्थ आएंगे। इस तरह पहले से दोनों समितियों को सौंपे गए मामलों को भी नई व्यवस्था में शामिल किया गया है।

हालांकि, आदेश में किसी खास न्यायिक अधिकारी के मामले का उल्लेख या किसी अधिकारी की अनिवार्य सेवानिवृत्ति पर अंतिम निर्णय नहीं दिया गया है। फिलहाल स्पष्ट बदलाव समीक्षा के लिए कमेटी के गठन और पुराने मामलों को उसके विचारार्थ रखने से संबंधित है।

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