जयपुर | नई हवा ब्यूरो
राजस्थान के कर्मचारियों ने राज्य की अशोक गहलोत सरकार की कर्मचारियों विरोधी नीतियों के खिलाफ गुस्सा जाहिर करते हुए असहयोग आंदोलन शुरू करने का ऐलान किया है। कर्मचारियों का आरोप है कि सरकार कमेटियों पर कमेटियां बना कर छलावा कर रही है। कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि सरकार कर्मचारियों को मूर्ख समझने की गलती न करे वरना मुंह की खानी पड़ेगी।
कर्मचारियों के ऐसे ही मुद्दों को लेकर जयपुर में अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ की प्रदेश कार्यकारिणी एवं सम्बद्ध संगठनों के प्रदेशाध्यक्षों व महामंत्रियों की एक संयुक्त बैठक कर्मचारी संयुक्त महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष आयुदान सिंह कविया की अध्यक्षता में हुईं। इसी बैठक में गहलोत सरकार के खिलाफ असहयोग आंदोलन शुरू करने का फैसला किया गया, लेकिन असहयोग आंदोलन कैसे करेंगे, इसका अभी खुलासा नहीं किया गया है।
संघर्ष समिति के बैनर तले चलेगा आंदोलन
कर्मचारी नेताओं ने असहयोग आंदोलन की रणनीति का तो अभी खुलासा नहीं किया, लेकिन कहा है कि आंदोलन संघर्ष समिति के बैनर तले चलेगा। राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ के संयुक्त महामंत्री अर्जुन शर्मा ने बताया कि सरकार के खिलाफ आंदोलन की मुहिम संघर्ष समिति बनाकर चलाई जाएगी और इस संघर्ष समिति का संयोजक राजस्थान ग्राम विकास अधिकारी संघ के प्रदेशाध्यक्ष महावीर प्रसाद शर्मा को बनाया गया है। महावीर प्रसाद शर्मा ने कहा कि अहसहयोग आंदोलन से अब सरकार को करारा जवाब दिया जाएगा।
महासंघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष के.के. गुप्ता ने राज्य सरकार को चेतावनी दी और कहा कि राज्य का कर्मचारी बुद्धिजीवी वर्ग से आता है। गहलोत सरकार कर्मचारियों को मूर्ख समझने की गलती नहीं करे। उन्होंने कहा कि इतिहास साक्षी है कि जब-जब राज्य कर्मचारियों के साथ अन्याय हुआ है, तब-तब राज्य सरकारों को मुंह की खानी पड़ी है। उन्होंने कहा कि अब कर्मचारी संयुक्त महासंघ ने आर-पार की लड़ाई की रूपरेखा तैयार कर ली है।
कमेटियां बना कर सरकार कर रही है छलावा
महासंघ के महामंत्री अर्जुन शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार कर्मचारियों के साथ कमेटियों के नाम पर छलावा कर रही है। राज्य सरकार द्वारा पूर्व में डीसी सामन्त की अध्यक्षता में समिति का गठन किया गया था, जिसका वर्तमान सरकार ने भी कार्यकाल बढ़ा दिया था। समिमि ने इस सरकार को जुलाई 2019 में रिपोर्ट सौंप दी थी, इसके बावजूद उसे सार्वजनिक नहीं किया गया है। अब गहलोत सरकार ने एक अन्य कमेटी का गठन सेवानिवृत आईएएस खेमराज चौधरी की अध्यक्षता में कर दिया। महासंघ इस कमेटी का विरोध करता है। राज्य सरकार की इस कावायद से कर्मचारियों में आक्रोश व असंतोष है।
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शर्मा ने मांग की कि सरकार द्विपक्षीय वार्ता करे और कर्मचारियों की मांगों का निराकरण किया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार कर्मचारियों की कोई सुनवाई नहीं कर रही, इसलिए गहलोत सरकार के खिलाफ महासंघ ने राज्यव्यापी आंदोलन का निर्णय किया है।
महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष आयुदान सिंह कविया ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि नौकरशाह गुमराह कर गलत निर्णय करवा रहे है और सरकार वैसा ही कर रही है। राज्य सरकार की कर्मचारी विरोधी नीतियों का हर स्तर पर विरोध किया जाएगा।
ये हैं कर्मचारियों का मांग पत्र
कर्मचारियों के मांग पत्र में वित्त विभाग की अधिसूचना दिनांक 30-10-2017 निरस्त करने, केन्द्र के समान वेतन.भत्ते, एमटीएस संवर्ग लागू करने, नई पेंशन योजना निरस्त करने, संविदा कार्मिकों को नियमित करने , निगम बोर्ड के कर्मचारियों को 7वां वेतन लागू करने आदि की मांगें शामिल हैं। बैठक में महासंघ से सम्बद्ध एवं सहयोगी 55 संगठनों ने भाग लिया। आंदोलन के कार्यक्रम अलग से घोषित किया जाएगा।
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