जयपुर ग्रामीण के नरैना में RSS के सांभर जिला प्रचारक कृष्णकांत से कथित मारपीट के मामले में थानाधिकारी समेत छह पुलिसकर्मी निलंबित। एएसपी स्तर पर जांच शुरू।
जयपुर। नरैना कस्बे में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सांभर जिला प्रचारक कृष्णकांत के साथ मारपीट का मामला सामने आने के बाद पुलिस महकमे में कार्रवाई हुई है। गश्त के दौरान विवाद और बाद में प्रचारक को शांतिभंग के आरोप में गिरफ्तार किए जाने के मामले में नरैना थानाधिकारी समेत छह पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। मामले की जांच एएसपी स्तर के अधिकारी को सौंपी गई है।
घटना शनिवार शाम की है। जानकारी के अनुसार, जिला प्रचारक कृष्णकांत कहीं से लौट रहे थे, तभी पुलिस की गश्त टीम ने उन्हें रोक लिया। इस दौरान पुलिसकर्मियों ने उनके साथ बदसलूकी की और विरोध करने पर मारपीट की। इसके बाद उन्हें थाने ले जाकर शांतिभंग के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया।
थाने पहुंचे स्वयंसेवक, अधिकारियों ने संभाला मोर्चा
घटना की जानकारी मिलने पर रविवार सुबह RSS के कई स्वयंसेवक नरैना थाने पहुंच गए और विरोध दर्ज कराया। मामले के तूल पकड़ने पर सांभर वृत्ताधिकारी मुकेश जोशी और फुलेरा के पूर्व विधायक निर्मल चौधरी भी थाने पहुंचे। उन्होंने वहां मौजूद लोगों से बातचीत कर स्थिति शांत कराने का प्रयास किया।
थानाधिकारी समेत छह पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई
जयपुर ग्रामीण के एसपी हनुमान प्रसाद मीणा के अनुसार, नरैना थाने के पुलिसकर्मियों के खिलाफ लापरवाही की शिकायत मिली थी। इसके बाद थानाधिकारी उमराव गुर्जर, एएसआई ओंकार और रमेश तथा कांस्टेबल कुलदीप, महिपाल और विनोद को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
निलंबित पुलिसकर्मियों का मुख्यालय जयपुर ग्रामीण जिला पुलिस लाइन रहेगा। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें नियमानुसार निर्वाह भत्ता देय होगा। मामले की विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है।
अब जांच में यह स्पष्ट होगा कि गश्त के दौरान आखिर क्या हुआ था और प्रचारक के साथ कथित मारपीट तथा गिरफ्तारी के मामले में किसकी क्या भूमिका रही। फिलहाल, छह पुलिसकर्मियों का निलंबन इस घटना में पुलिस विभाग की शुरुआती कार्रवाई है।
नई हवा खबरें अपने मोबाइल पर नियमित और डायरेक्ट प्राप्त करने के लिए व्हाट्सएप नंबर 9460426838 सेव करें और ‘Hi’ और अपना नाम, स्टेट और सिटी लिखकर मैसेज करें। आप अपनी खबर या रचना भी इस नंबर पर भेज सकते हैं।
पति-पत्नी की एक जगह पोस्टिंग पर राजस्थान हाईकोर्ट का फैसला, फिर भी कर्मचारियों के लिए खुला ये रास्ता
