ऐसे थे सुन्दरलाल बहुगुणा…

सुंदरलाल बहुगुणा सुंदर शख़्सियत थे। छरहरे बदन, रजत दाढ़ी, मृदुभाषा या उनकी पहचान बने सफ़ेद पटके भर के कारण नहीं…

बेड़ा पार…

हे कृष्ण गोपाल!, हे नंद के लाल…

जीवन की डोर को थामे रखना…

जीवन की डोर को थामे रखना …

सब कुछ अनुकूल नहीं होता…

जीवन में दुःख सुख आते हैं , कुछ अनुभव देकर जाते हैं…

बिटिया की पाती पापा के नाम…

पापा,
आपने कहा था -तुम बड़ी हो गई…

जीतेंगे यह जंग दुबारा…

कोरोना के घातक तीर चल रहे
घर-घर में ये पीर भर रहे…

आखिर वो मां होती है…

जब हम गर्भ में आते हैं,तब से कष्ट सह रही होती है…

प्रथम गुरू यूँ ही नहीं कहलाती…

माँ तो आखिर माँ है होती…

तू ही तो है इस सृष्टि की आदि शक्ति…

माँ है एक दिव्य शक्ति अनादि…

तबाही का मंजर…

हर जगह चीखे हैं…