सुंदरलाल बहुगुणा सुंदर शख़्सियत थे। छरहरे बदन, रजत दाढ़ी, मृदुभाषा या उनकी पहचान बने सफ़ेद पटके भर के कारण नहीं…
हे कृष्ण गोपाल!, हे नंद के लाल…
जीवन की डोर को थामे रखना …
जीवन में दुःख सुख आते हैं , कुछ अनुभव देकर जाते हैं…
पापा, आपने कहा था -तुम बड़ी हो गई…
कोरोना के घातक तीर चल रहे घर-घर में ये पीर भर रहे…
जब हम गर्भ में आते हैं,तब से कष्ट सह रही होती है…
माँ तो आखिर माँ है होती…
माँ है एक दिव्य शक्ति अनादि…
हर जगह चीखे हैं…