जयपुर
राजस्थान प्रदेश कांग्रेस में मचे सियासी बवाल के बाद उन विधायकों ने भी सचिन पायलट खेमे की तरह आंखें तरेरना शुरू कर दिया है जो कांग्रेस में बगावत के पिछले एपिसोड में बसपा से टूटकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ खड़े हो गए थे। तब कुछ निर्दलीय विधायकों ने भी कांग्रेस से मिलकर सत्ता फिसलने के किनारे पर ही खड़ी गहलोत सरकार को गिरने से बचा लिया था। गहलोत सरकार को डूबने से बचाने वाले इन विधायकों ने अब सरकार पर तीखा हमला शुरू कर दिया है। इनमें से बसपा के रास्ते से आए पूर्व मंत्री और उदयुपरवाटी से विधायक राजेन्द्र गुढ़ा का एक बयान सामने आया है। इसमें उन्होंने कहा है कि BSP से कांग्रेस में आने वाले 6 विधायक और 10 निर्दलीय साथ नहीं होते तो अब तक तो गहलोत सरकार पहली पुण्यतिथि मना चुकी होती।
वर्चुअल बैठक में करेंगे चर्चा
आपको बता दें कांग्रेस के बगावत के पिछले एपिसोड में पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट खेमे के साथ कांग्रेस के 19 विधायक और तीन निर्दलीय जा चुके थे। इससे गहलोत की सत्ता डोल गई थी। उस संकट की घड़ी में बीएसपी से कांग्रेस में शामिल हुए 6 और दस अन्य निर्दलीय विधायकों ने कांग्रेस का दामन थाम कर सरकार को बचा लिया था।पर तब उनको सत्ता में भागीदारी नहीं मिली थी, लेकिन अब इन विधायकों ने भी मंत्रिमंडल विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियों में हो रही देरी पर नाराजगी जताई है। विधायक राजेंद्र सिंह गुढ़ा, लाखन मीणा और संदीप यादव ने जल्द मंत्रिमंडल विस्तार करके BSP से कांग्रेस में आए विधायकों को भागीदारी देने की मांग उठाई है। बीएसपी से कांग्रेस में शामिल हुए इन विधायकों ने इस विषय को लेकर बात करने के लिए अपनी वर्चुअल बैठक करने का भी फैसला किया है। बैठक में दीपचंद खैरिया, लाखन मीणा, राजेंद्र सिंह गुढ़ा, संदीप यादव, जोगिन्दर सिंह अवाना मौजूद रहेंगे। भरतपुर के नगर विधायक वाजिब अली, जो वर्तमान में ऑस्ट्रेलिया में हैं, उनके फोन या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़ने की संभावना है। बैठक में सभी विधायक मंत्रिमंडल में हिस्सेदारी और राजनीतिक नियुक्तियों पर बात करेंगे। गुढ़ा ने कहा कि कि हम सभी मुख्यमंत्री के साथ हैं।
विधायक राजेंद्र गुढ़ा ने कहा कि पिछले साल BSP से कांग्रेस में आने वाले 6 विधायक और 10 निर्दलीय नहीं होते तो अब तक तो सरकार की पहली पुण्यतिथि मन चुकी होती। आलाकमान को यह बात अच्छी तरह समझ लेनी चाहिए कि उस वक्त हम नहीं होते तो मुख्यमंत्रीजी के पास रिजाइन देने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा था।
ढाई साल से ज्यादा का तो वक्त यूं ही गुजार दिया
गुढ़ा ने कहा कि तीन बार प्रभारी अजय माकन से मिलने बाद भी हर बार यही कहा गया कि एक दो महीने में मंत्रिमंडल विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियों का काम हो जाएगा। अब करते हैं तो ठीक है। अन्यथा ज्यादा कुछ बचा नहीं है, ढाई साल से ज्यादा का तो वक्त निकल चुका है। अजय माकन हर बार आश्वासन देते हैं। हमारे वाले सभी दुखी हैं। राजेंद्र गुढ़ा इससे पहले विधायकों की सुनवाई नहीं होने का मुद्दा उठा चुके हैं। उदयपुरवाटी में पानी की स्कीम मंजूर नहीं होने से नाराज होकर पिछले दिनों जलदाय विभाग के ग्रामीण चीफ इंजीनियर के दफ्तर में फर्श पर धरना देकर बैठ गए थे। उस वक्त गुढ़ा ने कहा था कि ये दिन देखने को सरकार नहीं बचाई।
पार्टी कार्यकर्ताओं की इच्छा पूरी करें गहलोत: लखन सिंह
राजस्थान की करौली सीट से विधायक लखन सिंह ने भी मंत्रिमण्डल विस्तार को लेकर आवाज मुखर की है। उन्होंने कहा, ‘सरकार से उम्मीदें लगाने वाले पार्टी कार्यकर्ताओं की इच्छा पूरी होनी चाहिए।’ उन्होंने अपने एक बयान में कहा है कि कैबिनेट का विस्तार होना चाहिए क्योंकि इससे सरकार की दक्षता में सुधार होगा और काम पूरा करने में मदद मिलेगी। सिंह ने कहा है कि कुछ विभाग अब पूरी तरह से सरकारी अधिकारियों पर निर्भर हैं। अगर इन विभागों को मंत्री मिल जाते हैं, तो वे बेहतर तरीके से काम करेंगे, उचित निगरानी होगी और विकास होगा। उल्लेखनीय है कि करौली सीट से प्रतिनिधित्व करने वाले सिंह सितंबर 2019 में कांग्रेस में शामिल होने वाले बसपा के छह विधायकों में से एक हैं।
सीम बसपा से कांग्रेस में आए विधायकों से वीडियोकॉल पर करेंगे बात
बसपा से कांग्रेस में आए एक एनी विधायक संदीप यादव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि पिछले कार्यकाल में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सरकार का समर्थन करने वालों को सरकार में भागीदारी दी थी, लेकिन इस बार सरकार को ढाई साल हो गए, पर भागीदारी अभी तक नहीं मिली। अब मंत्रिमंडल विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियों का काम जल्द होना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री से हमने मिलने का वक्त मांगा है। सीएम ने वीडियोकॉल पर बात करने को कहा है।
ये विधायक भी गहलोत के खिलाफ हुए मुखर
पायलट खेमे के झुंझुनू विधायक बृजेंद्र सिंह ओला ने भी कैबिनेट विस्तार की मांग की। ओला ने कहा, “पांच साल तक हमने पायलट के साथ संघर्ष किया। हम किसानों और आम आदमी के पास गए और उनसे वादा किया कि अगर कांग्रेस की सरकार बनती है, तो सत्ता में उनकी हिस्सेदारी होगी। सरकार बनी, हम विधायक भी हैं। लेकिन काम नहीं हो रहा है, कार्यकर्ताओं को क्या कहें? हम मूक दर्शक नहीं बने रह सकते। पायलट खेमे के ही सीकर के श्रीमाधोपुर विधायक और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष दीपेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि “मांगों पर एक प्रारंभिक निर्णय पार्टी के हित में होगा। लोग बेचैन हो रहे हैं, ऐसे में जल्द फैसला होना चाहिए।
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